vigyan ke chamatkar par nibandh | विज्ञान के चमत्कार निबंध

vigyan ke chamatkar par nibandh | विज्ञान के चमत्कार निबंध
vigyan ke chamatkar par nibandh | विज्ञान के चमत्कार निबंध

vigyan ke chamatkar par nibandh- दोस्तों हम जानते हैं कि विज्ञान के चमत्कार पर निबंध परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है क्योंकि विज्ञान जिस रफ्तार से प्रगति कर रहा है और दिन-ब-दिन भर्ती यह प्रगति आपको और ज्यादा सुविधा के साधन प्रदान करेगी किन्तु इसके दुरुपयोग भी उतने ही बरतें बढ़ते चले जा रहे हैं इसलिए इस विषय पर निबंध लेखन परीक्षा में कई बार पूछा गया है और आपको इस पर निबंध लेखन करना यदि आप विज्ञान के चमत्कार पर निबंध लेखन सर्च कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं । आज हम आपको विज्ञान के चमत्कार पर निबन्ध लिखना बतायेगें।

यह विज्ञान के चमत्कार पर निबंध (vigyan ke chamatkar par nibandh) आपकी सभी प्रकार की परीक्षाओं के लिए है चाहे आप किसी भी क्लास में पढ़ते हो जैसे क्लास 10th क्लास नाइंथ क्लास 8th क्लास 7th Class 12th , Class 11 सभी क्लास के छात्र इस निबंध को याद कर सकते हैं। अगर आप विज्ञान के चमत्कार पर निबंध इस प्रकार से लिखते हैं तो आपको पूरे नंबर जरूर मिलेंगे

vigyan ke chamatkar par nibandh | विज्ञान के चमत्कार निबंध

निबन्ध
विज्ञान के चमत्कार निबंध

विस्तृत रूपरेखा-

(1) प्रस्तावना,

(2) विज्ञान की देन,

(3) चिकित्सा के क्षेत्र में

(4) कृषि के क्षेत्र में,

(5) मनोरंजन के साधन,

(6) संचार के क्षेत्र में,

(7) विज्ञान के दुरुपयोग

(8) उपसंहार।]

समस्याओं के समाधान का हल पाओगे।

यदि विज्ञान की ताकत को समझ जाओगे।।

प्रस्तावना- यह स्वयं सिद्ध बात है कि प्रत्येक वस्तु के दो प्रकार के उपयोग होते हैं अच्छे और बुरे अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे किस प्रकार उपयोग करते हैं सही कार्य में अथवा गलत कार्य में, जब किसी वस्तु विशेष के एक पक्ष को जब हम देखते हैं तो उसके अन्तर्गत सुंदरता दृष्टिगोचर होती है लेकिन जब उसके दूसरे पक्ष को देखते हैं तो उसमें अभिशापों की काली छाया मँडराती रहती है। जब हम किसी वस्तु को प्रयोग की कसौटी पर कसते हैं तभी उसके स्वरूप का यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। वैसे विष प्राणघातक होता है, लेकिन जब कोई चिकित्सक उसका शोधन करके औषधि के रूप में प्रयोग करता है तब वही विष संजीवनी बूटी का काम करता है।अतः ज्ञान का प्रयोग ही उसके परिणाम का उद्घोषक होता है। इसी प्रकार विज्ञान के भी सिक्के की भांति दो पहलू हैं अच्छा और बुरा यह हमारे ऊपर निर्भर है कि चाहे हम विज्ञान को विनाशकारी रूप दें अथवा मंगलकारी भव्य रूप प्रदान करें।

विज्ञान की देन-विज्ञान ने मानव को कई सुख- सुविधाएं प्रदान की है। मनोरंजन तथा खेल प्रसादन और अन्य कई साधन प्रदान किए हैं वे अनगिनत हैं। गर्मी सर्दी,बारिश सभी मौसमों पर विज्ञान का आधिपत्य है। आज गर्मी में सर्दी का मजा विज्ञान द्वारा ही संभव हो पाया है। रेल, वायुयान, स्कूटर, मोटर कार तथा अन्य शीघ्रगामी साधनों के फलस्वरूप यात्रा बहुत ही सुगम तथा आरामदायक हो गयी है। आपदाओं से निपटने के लिए उचित व्यवस्था तथा उनका पूर्वानुमान विज्ञान की ही देन है।आज आकाश से लेकर समन्दर की गहराइयों तक विज्ञान ने अपना वर्चस्व कायम किया हुआ है।

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चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की देन- चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने कई चमत्कारिक अविष्कार किए है। शल्य चिकित्सा, एक्स-रे तथा हृदय प्रत्यारोपण इस बात के ज्वलन्त प्रमाण हैं। प्लास्टिक सर्जरी एवं कृत्रिम अंगों का प्रत्यारोपण भी आज सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जिससे मानव को नया जीवन दान मिलता है। असाध्य रोगों पर विज्ञान द्वारा आविष्कृत औषधियाँ मानव को नया जीवन प्रदान कर रही हैं।रक्त जांच, CTस्कैन,MRI,आदि के द्वारा शरीर के हर प्रकार के विकार तथा बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

कृषि के क्षेत्र में विज्ञान-कृषि के क्षेत्र में भी विज्ञान ने कई नवीनतम आविष्कारों के माध्यम से कृषकों में एक नवीन आशा तथा उत्साह का संचार किया है। विभिन्न प्रकार की रासायनिक खादों और कीटनाशकों की मदद से खेतों में भरपूर अन्न उत्पन्न हो रहा है। थ्रेसर, ट्रैक्टर आदि यन्त्रों के माध्यम से खेतों में बोआई, कटाई सुविधापूर्वक एवं कम समय में सम्पन्न हो रही है।

मनोरंजन के साधन-विज्ञान ने आज के मानव को मनोरंजन के साधन भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराये हैं। सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन एवं टेप रिकॉर्डर मनोरंजन के सुलभ तथा मनभावन साधन हैं। जिनसे आप अपने व्यस्थ जीवन मे उदासीन एवं चिन्ताग्रस्त हैं तो सिनेमा हॉल में तीन घण्टे बैठकर चिन्ताओं से मुक्त हो सकते हैं। दूरदर्शन के माध्यम से यह आनन्द सपरिवार घर पर कमरे में बैठकर भी ग्रहण किया जा सकता है। साथ ही विश्व में घटित होने वाली घटनाओं को भी अपनी आंखों से देख सकते हैं और उनसे बाख़बर हो सकते हैं।

संचार के क्षेत्र में विज्ञान-संचार के क्षेत्र में विज्ञान के द्वारा अत्यधिक क्रान्ति हुई है। यह विज्ञान का ही चमत्कार है कि आज हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति से वीडियो कॉल पर उसके चित्र देखते हुए बातें कर सकते हैं। पलक झपकते ही किसी भी आवश्यक पत्र अथवा कागजातों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित किया जा सकता है।

विज्ञान के दुरूपयोग- जिस प्रकार सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार हर वस्तु के दो पहलू होते हैं। एक ओर जहाँ उसमें हजारों अच्छाइयां होती हैं वहीं दूसरी ओर उसमें कई सारी बुराइयां भी होती हैं यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसका सदुपयोग करते हैं या फिर दुरुपयोग विज्ञान में ना केवल सुख सुविधाओं के साधन दिए हैं बल्कि त्राहि-त्राहि मचा देने वाले विस्फोटक बम और मिसाइलें भी दिए जैसे जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी नगर इसके ज्वलन्त प्रमाण हैं। हाइड्रोजन बम, एटम बम, न्यूट्रॉन बम अलमारी में सजाने के लिए नहीं बनाये गये निश्चित रूप से इनका विस्फोट होगा। विषैली गैसें वातावरण को दूषित तथा विषाक्त बना रही हैं। प्रदूषण तथा शोरगुल भी बढ़ा है। विज्ञान ने मानव के सुख-साधनों में वृद्धि की है, जिसके चलते आज का मानव विलासप्रिय हो गया है। और आलसी बन गया है।

उपसंहार-विज्ञान मानव द्वारा की गई खोज बीन और अविष्कारों का ही नाम है। दूसरे शब्दों में विज्ञान मानवीय जिज्ञासा मात्र ही है। विज्ञान के यह अविष्कार मानव के हाथ में पड़कर ही शक्ति प्राप्त करते है। इस प्रकार विज्ञान वरदान तथा अभिशाप कुछ न होकर मानव के उपयोग पर ही आधारित है। विज्ञान पर दोषारोपण करना निरर्थक है। भगवान मानव को सद्बुद्धि प्रदान करे जिससे वह विज्ञान को मानव के कल्याण के लिए प्रयुक्त करे। विज्ञान का कल्याणमय स्वरूप विश्व के कल्याण के लिए है और विनाशमय स्वरूप विनाश के लिए। अत: विश्व कल्याण के लिए ही विज्ञान का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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