MP board 9th सामाजिक विज्ञान त्रैमासिक पेपर 2021 IMP question

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MP board 9th सामाजिक विज्ञान त्रैमासिक पेपर 2021 IMP question

MP board 9th samajik vigyan trimasik paper 2021: दोस्तों आज हम आपके लिए एक क्लास नाइंथ सामाजिक विज्ञान त्रैमासिक पेपर के लिए कुछ इंपोर्टेंट क्वेश्चन आपको इस पोस्ट में बताने वाले हैं जिन्हें आप अवश्य पढ़ें यह क्वेश्चन त्रैमासिक परीक्षा ही नहीं बल्कि वार्षिक परीक्षा के लिए भी IMP question है और साथ में आपको इस पोस्ट में इंपोर्टेंट क्वेश्चन और उनका सलूशन भी मिलेगा जैसा कि आप नीचे देख सकते हैं।

इतिहास
खण्ड (अ)
  भारत और समकालीन विश्व

Chepter ― 1

फ्रांसीसी क्रांति

प्रश्न 1. उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति कौन-सी विरासत छोड़ गई है?

उत्तर- 19वों और 20वीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति को मुख्य देन (विरासत) निम्न प्रकार है

(i) स्वतंत्रता– स्वतंत्रता का विचार, फ्रांसीसी क्रांति का एक मूल सिद्धांत था। उन्होंने इसे मनुष्य का प्राकृतिक अधिकार माना। ‘स्वतंत्रता से फांसीसी क्रांतिकारियों का अभिप्राय ऐसे काम करने की शक्ति था जो औरों के लिए नुकसान दायक न हो। स्वतंत्रता का यह विचार उपनिवेशों की जनता के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। विश्व के सभी लोकतांत्रिक देशों ने इस अधिकार को अपनाया। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित मानव अधिकारों में भी इसे मानव का नैसर्गिक अधिकार माना गया।
(ii) समानता– फ्रांसीसी क्रांति का अन्य मत्त्वपूर्ण सिद्धांत समानता का सिद्धांत था जिसे 19वीं सदी के सभी लोकतांत्रिक देशों द्वारा अपनाया गया। इस प्रकार फ्रांसीसी क्रांति द्वारा स्थापित समानता का आदर्श वर्तमान के समस्त लोकतांत्रिक संविधानों का मूल आधार है।
(iii) बंधुत्व की भावना – फ्रांसीसी क्रांति ने बंधुत्व की भावना के रूप में विश्व के समक्ष एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया कि यदि जनता सामूहिक रूप से बंधुत्व के विचार का पालन करे तो वह देश का नवनिर्माण कर सकती है।
(iv) लोकतंत्र – फ्रांसीसी क्रांति ने राजतंत्र की कमियों और कमजोरियों को सारी दुनिया के समक्ष उजागर कर दिया। फ्रांसीसी क्रांति द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक विचारों ने बुद्धिजीवी वर्ग को आंदोलित कर दिया जिसके फलस्वरूप 19वीं तथा 20वीं सदी में विश्व के अनेक देशों में लोकतांत्रिक सरकारों की स्थापना हुई।
प्रश्न 2. नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है?
उत्तर – सन् 1796 निर्देशिका के पतन के तुरंत बाद नेपोलियन का उदय हुआ। निदेशकों का प्रायः विधान सभाओं से झगड़ा होता था जो कि बाद में उन्हें बर्खास्त करने का प्रयास करती। निर्देशिका राजनैतिक रूप से अत्यधिक अस्थिर थी; अतः नेपोलियन सैन्य तानाशाह के रूप में सत्तारूढ़ हुआ। सन् 1804 में नेपोलियन बोनापार्ट ने स्वयं को फ्रांस का सम्राट बना दिया। वह पड़ोसी यूरोपीय देशों पर विजय करने निकल पड़ा, राजवंशों को हटाया और साम्राज्यों को जन्म दियाँ जिसमें उसने अपने परिवार के सदस्यों को आरूढ़ किया। उसने निजी संपत्ति की सुरक्षा जैसे कई कानून बनाए और दशमलव प्रणाली पर आधारित नाप-तौल की एक समान पद्धति की। अंततः 1815 ई. में वाटरलू में उसकी हार हुई।
प्रश्न 3.  बास्तील की जेल को कब तोड़ा गया?
उत्तर – बास्तील की जेल को क्रांतिकारियों द्वारा 14 जुलाई,
1789 की सुबह तोड़ा गया।
प्रश्न 4 . 1774 में फ्रांस में कौन-सा शासक सत्ता में आया?
उत्तर – 1774 में बूबों राजवंश का लुई XVI फ्रांस की राजगद्दी पर बैठा।
प्रश्न 5. नेशनल असेंबली के संविधान का प्रारूप कब पूरा हुआ तथा इसका मूल उद्देश्य क्या था?
उत्तर – संविधान का प्रारूप 1791 में पूरा हुआ था तथा इसका मूल उद्देश्य सम्राट की शक्ति को सीमित करना था।
प्रश्न 6. मिराब्यो कौन था?
उत्तर – मिराब्यो तीसरे एस्टेट का एक प्रतिनिधि था। वह कुलीन परिवार में उत्पन्न हुआ था लेकिन वह सामंती विशेषाधिकारों वाले समाज को समाप्त करने की जरूरत से सहमत था।
प्रश्न 7. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम ने फ्रांस पर और अधिक कर्ज कैसे लाद दिया?
उत्तर – फ्रांस की सेना ने अमेरिका के 13 उपनिवेशों को ब्रिटेन के खिलाफ उनकी स्वतंत्रता की लड़ाई में सहयोग दिया था। इस युद्ध ने फ्रांस पर दस अरब लिव्रे (फ्रांस की मुद्रा की इकाई) से भी अधिक कर्ज और जुड़ गया जबकि उस पर पहले से ही दो अरब लिवे का कर्ज चढ़ा हुआ था।
प्रश्न 8.  18वीं सदी के फ्रांस में कौन-सा सामाजिक समूह
‘मध्यवर्ग के रूप में उभरा?
उत्तर – फ्रांस का वह सामाजिक समूह मध्यवर्ग के रूप में उभरा जिन्होंने समुद्रपारीय व्यापार और ऊनी तथा रेशमी वस्त्रों के उत्पादन के बल पर संपत्ति अर्जित की थी। ऊनी और रेशमी कपड़ों का या तो निर्यात किया जाता था या समाज के समृद्ध लोग उन्हें खरीद लेते थे।
प्रश्न 9. “डिरेक्ट्री” क्या थी? इसे फ्रांस से क्यों हटाया गया?
उत्तर – जैकोबिंस के पतन के बाद, एक नया संविधान  बनाया गया जिसने संपत्तिहीन लोगों को मताधिकार देने से इनकार कर दिया। इसने दो निर्वाचित विधायी परिषदें बनाई जिन्होंने एक ”   नई डायरेक्टरी को नियुक्त किया, डिरेक्ट्री एक कार्यपालिका थी जो पाँच सदस्यों से बनी थी। यद्यपि डिरेक्ट्री के भी विधायी परिषद् से मतभेद थे इसीलिए अंत में इसे भी भंग कर दिया गया। इसके साथ फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई जिसने एक सैनिक तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट के उदय को दिशा दी।
प्रश्न 10.  फ्रांसीसी समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए क्या कानून बनाए गए थे?
उत्तर – फ्रांसीसी समाज में; शुरूआत में क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए कई कानून बनाए जैसे
(i) सभी लड़कियों के लिए विद्यालय जाना अनिवार्य बना
दिया गया।
(ii) उनके पिता उनकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती उनका विवाह नहीं कर सकते थे।
(ii) तलाक को वैध माना गया और स्त्रियाँ व पुरुष दोनों इसकी पहल कर सकते थे।
(iv) स्त्रियों को अब नौकरी के लिए प्रशिक्षित किया जाने लगा। वे छोटे उद्योग भी चला सकती थीं।
प्रश्न 11. फ्रांसीसी क्रांति का तात्कालिक कारण क्या
था?
उत्तर-खराब फसल के कारण रोटी की कीमतें आसमान छू रही थी, आटे की कीमतें बढ़ गई थीं, बेकरी वाले भी कभी- कभी स्थिति का शोषण करते थे, और पूर्ति को रोक देते थे। बेकरी पर घंटों लाइनों में खड़े-खड़े, गुस्से में भरी औरतों की भीड़ दुकानों पर टूट पड़ी। इसी समय, राजा ने सेना को पेरिस में घुसने का आदेश दिया और 14 जुलाई, को आंदोलनकारी भीड़ ने उग्र रूप धारण किया और बास्तील को नष्ट कर दिया।

Chapter ― 2
यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
प्रश्न 1,1917 में जार का शासन क्यों खत्म हो गया?
उत्तर-(1) 1905 की क्रांति के बाद रूस में क्रांतियों का सिलसिला शुरू हो गया था। 9 जनवरी, 1905 को विंटर पैलेस में जार को याचिका देने जाते हुए श्रमिकों पर सेंट पीट्सबर्ग में गोली चलाई गई। उस घटना की खबर ने पूरे रूस में अभूतपूर्व अशांति फैला दी और यह घटना 1917 की क्रांति की ड्रेस रिहर्सल साबित हुई।
(ii) जार में रूस को प्रथम विश्व युद्ध में धकेल दिया। यह रूस के निरंकुशवाद के लिए घातक और निर्णायक सिद्ध हुआ। फरवरी 1917 तक 6 लाख सैनिक युद्ध में मारे जा चुके थे। पूरे सामान्य में भारी असंतोष था। क्रांति के लिए भी यही ही समय उचित था।
(iii) 1914 से 1916 के बीच जर्मनी और आस्ट्रिया में रूसी सेनाओं को भारी पराजय झेलनी पड़ी। पीछे हटती रूसी सेनाओं ने रास्ते में पड़ने वाली फसलों और इमारतों को भी नष्ट कर डाला ताकि दुश्मन की सेना वहाँ टिक ना सके। फसलों और इमारतों के विनाश के कारण रूस में 30 लाख से ज्यादा लोग शरणार्थी हो गए। इन हालातों ने सरकार और ज़ार दोनों को अलोकप्रिय बना दिया।
प्रश्न 2. बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति के फौरन बाद कौन-
कौन से प्रमुख परिवर्तन किए?
उत्तर – अक्टूबर क्रांति के तुरंत बाद होने वाले प्रमुख परिवर्तन
निम्नलिखित हैं – (i) नई सरकार की पहली महत्त्वपूर्ण घोषणा शांति का आदेश था। सभी लोगों के लिए एक आज्ञा पत्र जारी किया गया और युद्धरत राज्यों को बिना किसी सम्मिलन या क्षतिपूर्ति के केवल शांति के लिए वार्ता शुरू करने के लिए कहा गया। रूस की ओर से युद्ध समाप्त करने के लिए युद्ध विराम का निर्णय लिया गया हालाँकि जर्मनी के साथ शांति समझौते पर बाद में हस्ताक्षर किए गए।
 (ii) दूसरी घोषणा ज़मीन के विषय में थी। सरकार ने ज़मीन पर निजी सम्पत्ति का अधिकार समाप्त कर दिया और ज़मीन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया। सबके लिए श्रम आवश्यक कर दिया गया और पूँजीपतियों और भू-स्वामियों द्वारा शोषण का अंत हो गया।
 (iii) उद्योगों का नियंत्रण श्रमिक संगठनों के हाथों में आ गया। सभी बैंकों, बीमा कम्पनियों, बड़े उद्योगों,खदानों तल-परिवहन और रेलवे का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
(iv) लोगों के अधिकारों का घोषणा-पत्र जारी किया गया और सभी राष्ट्रीयताओं पर आत्मनिर्भरता का अधिकार प्रदान किया गया।
 (v) बैंकों और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
प्रश्न3. रैडिकल किन्हें कहा जाता था?
उत्तर-रैडिकल वह लोग थे जो ऐसी सरकार चाहते थे जो देश की आबादी के बहुमत के समर्थन पर आधारित हो। ये लोग समाज या व्यवस्था में मौलिक (मूलभूत) परिवर्तन (बदलाव) लाना चाहते थे।
प्रश्न 4- रॉबर्ट ओवेन कौन था?
उत्तर-रॉबर्ट ओवेन इंग्लैंड का एक जाना-माना उद्योगपति था। उसने इंडियाना (अमेरिका) में नए समन्वय के नाम से एक नए समुदाय की रचना की।
प्रश्न 5.  रूसी क्रांति किसे कहते हैं?
उत्तर – फरवरी, 1917 में राजशाही के पतन और अक्टूबर की घटनाओं को ही सामान्यतः रूसी क्रांति कहा जाता है।
प्रश्न 6. – 1905 में रूस में हुई क्रांति का तात्कालिक कारण में क्या था?
उत्तर-खूनी रविवार वह घटना थी जिससे 1905 की रूसी एवं क्रांति की शुरूआत हुई। इस घटना में 100 से ज्यादा मजदूर मारे गए तथा 300 से अधिक मजदूर घायल हुए।
प्रश्न 7. – स्टालिन कौन था?
उत्तर- स्टालिन लेनिन का घनिष्ठ सहयोगी था तथा रूस में वह लेनिन की मृत्यु के पश्चात् सत्ता में आया। उसने खेती के लिए आपात उपायों की शुरुआत की।
प्रश्न 8. – ‘कोलखोज’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – यह सामूहिक खेत थे; किसान इन जमीनों पर कार्य करते थे और मुनाफे को आपस में बाँट लेते थे। सामूहिकीकरण का विरोध करने वालों को सख्त सजा दी जाती थी।
प्रश्न 9.  – रूसी क्रांति का वैश्विक प्रभाव क्या था?
उत्तर – 1. कई देशों में साम्यवादी दलों का गठन हुआ जैसे ग्रेट ब्रिटेन का साम्यवादी दल
2. बोल्शेविकों ने उपनिवेशों के लोगों को स्वतंत्रता के लिए युद्ध करने की प्रेरणा दी
3. रुप के बाहर कई गैर-रूसी लोगों ने समाजवादियों की सभाओं में भाग लिया और बोल्शेविकों ने जो कम्युनिस्ट इंटरनेशनल बनाया उसन कई देशों के लोग थे
4. कई लोगों ने रूसी साम्यवादी विश्वविद्यालय से  शिक्षा ग्रहण की।
 5. द्वितीय विश्व युद्ध के समय तक रूस ने aसमाजवाद को एक वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।
प्रश्न 10. – कार्ल मार्क्स कौन था? उसके समाजवाद के
सिद्धांत क्या थे?
उत्तर- कार्ल मार्क्स एक समाजवादी था जिसने समाजवाद की अवधारणा दी।
कार्ल मार्क्स का समाजवाद सिद्धांत-
1. उसने महसूस किया कि औद्योगिक समाज पूँजीपतियों से संबंध रखता है।
2. पूँजीपति पूँजी प्राप्त करते हैं, उद्योगों में निवेश करते हैं लेकिन लाभ श्रमिकों द्वारा ही अर्जित होता है।
3. उसका विश्वास था कि श्रमिकों की दशा कभी भी नहीं सुधर सकती जब तक लाभ पर पूँजीपति का हक रहेगा।
4. मार्क्स का विश्वास था पूँजीपतियों के शोषण से श्रमिकों  को बचाने के लिए श्रमिकों को एक समाजवादी समाज की स्थापना करनी होगी जहाँ सारी संपत्ति पर समाज का नियंत्रण होगा। यह एक समाजवादी समाज होगा।
राजनीति
Chapter ― 1
समकालीन विश्व में लोकतंत्र
प्रश्न 1. जब सेना लोकतांत्रिक शासन को उखाड़ फेंकती है तो सामान्यतः कौन-सी स्वतंत्रताएँ छीन ली जाती ज़हैं?
उत्तर– जब एक लोकतांत्रिक सरकार का सेना द्वारा तख्ता पलट कर दिया जाता है, तो लोगों की निम्नलिखित स्वतंत्रताएँ प्रायः छीन ली जाती हैं –
(i) किसी भी तरह की राजनैतिक गतिविधि मान्य नहीं की जाती। यदि कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसको गिरफ्तार किया जा सकता है।
(ii) प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है।
(iii) किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय कारण बताए बिना गिरफ्तार करके कई वर्षों के कारावास की सजा दी जा सकती है। वकील या दलील के लिए सैन्य शासन में कोई स्थान नहीं है।
(iv) आन्दोलनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
(v) प्रजातांत्रिक रास्ते पूर्णतः बंद हो जाते हैं।
(vi) राजनैतिक गतिविधि के मामूली अपराध के लिए भी कारावास का दंड दिया जाता है।
प्रश्न 2. जब सेना लोकतांत्रिक शासन को उखाड़ फेंकती है तो सामान्यतः कौन-सी स्वतंत्रताएँ छीन ली जाती हैं?
उत्तर- जब एक लोकतांत्रिक सरकार का सेना द्वारा तख्ता पलट कर दिया जाता है, तो लोगों की निम्नलिखित स्वतंत्रताएँ प्रायः छीन ली जाती हैं –
(i) किसी भी तरह की राजनैतिक गतिविधि मान्य नहीं की जाती। यदि कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसको गिरफ्तार किया जा सकता है।
(ii) प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है।
(iii) किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय कारण बताए बिना गिरफ्तार करके कई वर्षों के कारावास की सजा दी जा सकती है। वकील या दलील के लिए सैन्य शासन में कोई स्थान नहीं है।
(iv) आन्दोलनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
(v) प्रजातांत्रिक रास्ते पूर्णतः बंद हो जाते हैं।
(vi) राजनैतिक गतिविधि के मामूली अपराध के लिए भी कारावास का दंड दिया जाता है।
प्रश्न 3 – राजनीतिक बंदी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर – जेल में डाले गए अथवा अपने ही घर में नजरबंद ऐसे लोग जिनके विचार, कामकाज या छवि को सरकार देश के लिए खतरा मानती है। ऐसे लोगों के खिलाफ झूठे या बढ़ा-चढ़ा मामले दायर कर उन्हें कैद में रखा जाता है।
प्रश्न 4- वीटो पावर क्या है? वीटो पावर विश्व के किन- किन देशों को प्राप्त है?
उत्तर – वीटो पावर वह अधिकार है जिसमें किसी व्यक्ति, पार्टी या राष्ट्र को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह किसी कानून को अकेले रोक सकता है। यह किसी फैसले को रोकने का असीमित अधिकार देता है, उसे लागू कराने का नहीं। वीटो पावर विश्व के पाँच देशों अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस को प्राप्त है।
प्रश्न 5 – गठबंधन का अर्थ बताएँ।
उत्तर – लोगों, संगठनों, पार्टियों या राष्ट्रों का एकजुट होना गठबंधन कहलाता है। यह गठबंधन अस्थायी होता है यह सुविधाजनक रहने तक ही रह सकता है।
प्रश्न 6- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है।
उत्तर – पार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ है लिंग, जाति, धर्म, ग अथवा संपत्ति के आधार पर अद-भाव किए बिना सभी वयाकी को वोट देने का अधिकार देना है। प्रारंभ में कई यूरोपीय देशों ने सभी लोगों को वोट देने की अनुमति नहीं दी। कुछ देशों में केवल संपत्तिधारी लोगों को ही वोट देने का अधिकार था। प्रायः महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरे देश में अश्वत लोगों को सन् 1965 तक वोट देने का अधिकार नहीं था। जो लोग लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे थे वे सभी वयस्कों – चाहे पुरुष हो या महिला, अमीर हो या गरीब, श्वेत हाँ या अश्वेत; सभी को सार्वभौमिक रूप से वोट का अधिकार दिलाना चाहते थे। इसे ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ अथवा ‘ सार्वभौमिक मताधिकार’ कहा जाता है।
प्रश्न 7- सद्दाम हुसैन कौन था? अपनी सरकार के अधीन उसने लोगों के कल्याण के लिए क्या कदम उठाए ?
उत्तर – मदाम हुसैन इराक की ‘बाथ’ पार्टी का नेता था। उसने 1968 के तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 1979 में इराक का राष्ट्रपति बना। सद्दाम हुसैन की सरकार द्वारा लोगों के कल्याण के लिए उठाए गए कदम इस प्रकार हैं-
1. उसने पारंपरिक इस्लामी कानूनों को हटाया और औरतों को ऐसे अधिकार दिए जो अन्य पश्चिम एशियाई देशों में कहीं नहीं दिए गए थे।
2. उसने महिलाओं के सेना में भाग लेने की प्रशंसा की।
3. उसने इराकी नागरिकों के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान किया था।
प्रश्न 8-“1980 के बाद लोकतंत्र की ओर तेजी से कदम बढ़े।”व्याख्या कीजिए।
उत्तर – 1980 के उपरांत लातीनी अमेरिका के कई देशों में लोकतंत्र का पुनर्जन्म होने लगा। सोवियत संघ के विघटन ने इस प्रक्रिया में और तेजी ला दी। सोवियत संघ ने पूर्वी यूरोप के कई पड़ोसी कम्युनिस्ट देशों पर नियंत्रण किया हुआ था। 1989-90 के दौरान पोलैंड सहित कई अन्य देश सोवियत संघ के नियंत्रण से मुक्त हो गए। 1991 में स्वयं संघ भी विघटित हो गया। सोवियत संघ कई गणराज्यों से मिलकर बना था। सभी घटक गणराज्य स्वतंत्र देश बन गए। हाल ही में आजाद हुए गणतंत्रों में से अधिकतर लोकतंत्र को अपना लिया। इस प्रकार पूर्वी यूरोप पर सोवियत संघ के नियंत्रण की समाप्ति एवं सोवियत संघ के विघटन विश्व के राजनैतिक मानचित्र में बड़े बदलाव का कारण बने। इसने लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना में और तेजी ला दी।
Chapter ― 2 
लोकतंत्र क्या ? लोकतंत्र क्यों?
प्रश्न 1-जनमत संग्रह का क्या अर्थ होता है?
उत्तर– जनमत संग्रह किसी विशिष्ट प्रस्ताव पर समय निर्वाचकों द्वारा एक साथ स्वीकार और अस्वीकार के रूप में अपना मत देता है। यह नए संविधान का अंगीकरण एक कानून या विशिष्ट सरकारी नीति हो सकता है।
प्रश्न 2-लीगल फेमवर्क ऑर्डर क्या है?
उत्तर– यह पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ झाला पार एक आदेश था जिसमें यह प्रावधान था कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों को भंग कर सकता था। मात्रपरिषद के काम काज पर एक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् को निगरानी रहती है जिसके ज्यादातर अधिकारी सेना के अधिकारी होते है।
प्रश्न 3- सही लोकतंत्र क्या कहता है?
उत्तर– लोकतंत्र निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर आधारित होना चाहिए ताकि सत्ता में बैठे लोगों के लिए जीत-हार का समान अवसर हो।
प्रश्न 4- लोकतंत्र को शासन का सबसे अच्छा स्वरूप क्यों माना जाता है?
उत्तर- लोकतंत्र को शासन का सबसे अच्छा स्वरूप इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें गलतियों को ज्यादा देर तक छुपाकर नहीं रखा जा सकता। इन गलतियों पर सार्वजनिक चर्चा की गुजांइश होती है
प्रश्न 5-किस प्रकार लोकतंत्र निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है?
उत्तर- लोकतंत्र का आधार व्यापक चर्चा और बहसें हैं। लोकतांत्रिक फैसले में हमेशा ज्यादा लोग शामिल होते हैं, चर्च करके फैसले होते हैं, बैठकें होती हैं अगर किसी एक मसले पर अनेक लोगों की सोच लगी हो तो उसमें गलतियों की गुजांइश कम से कम हो जाती है। इसमें कुछ ज्यादा समय जरूर लगता है। लेकिन महत्वपूर्ण मसलों पर थोड़ा समय लेकिन फैसले करने के अपने लाभ भी हैं। इससे अधिक उग्र या गैर-जिम्मेदार फैसले लेने की संभावना घटती है। इस प्रकार लोकतंत्र बेहतर निर्णय लेने की संभावना को बढ़ाता है।
प्रश्न 6- प्रजातंत्र के गुण-दोषों का वर्णन कीजिये।
उत्तर – प्रजातंत्र के गुण – प्रजातंत्र के गुण निम्नलिखित गुण है-
(1) मानवता के उच्च मूल्यों पर आधारित प्रजातंत्र समानता, न्याय और भ्रातृत्व जैसे उच्च मूल्यों पर आधारित है। लोकतंत्र में सभी व्यक्ति समान रूप से स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं। जनता की सम्प्रभुता एवं सहभागिता पर आधारित होने से प्रजातंत्र में व्यक्ति में आत्मसम्मान व आत्मनिर्भरता के उच्च गुण विकसित होते हैं।
(2) लोककल्याण पर आधारित प्रजातंत्र में प्रभुसत्ता अन्ततः जनता में निहित होती है। अत: इसमें जनता के कल्याण का विशेष ध्यान रखा जाता है, किसी विशेष व्यक्ति, वर्ग एवं संगठन का नहीं।
(3) जनमत पर आधारित प्रजातंत्र में शासक वर्ग में (दल) जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हैं क्योंकि यदि वे जनमत व की अवहेलना करते हैं तो जनता को अधिकार होता है कि वह अवहेलना करने वाले दल व प्रतिनिधि को निर्वाचित करने से इन्कार कर दे।
(4) राजनीतिक शिक्षण प्रजातंत्र राजनीतिक प्रशिक्षण का उत्तम साधन है। मताधिकार और राजनीतिक पद प्राप्त करने की स्वतंत्रता एवं भाषण अभिव्यक्ति संचार माध्यमों के उपयोग की स्वतंत्रता जनता में विचारों के आदान-प्रदान करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। सभी राजनीतिक दल एक चुनाव से दूसरे चुनाव तक निरंतर प्रचार द्वारा जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते रहते हैं। अत: प्रजातंत्र में नागरिकों को प्रशासनिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी प्रकार का शिक्षण प्राप्त होता है।
(5) राष्ट्रप्रेम की भावना का विकास प्रजातंत्र जनता द्वारा लोकहित की प्राप्ति के लिए जनता का शासन है। नागरिक यह अनुभव करते हैं कि शासन उन्हीं की बनायी हुई व्यवस्था है तथा सार्वभौम सत्ता के अधिकारी एवं स्वामी वे स्वयं हैं। इससे जनता के मन में राष्ट्रप्रेम व अपने दायित्व निर्वाह की भावना पैदा होती है।
(6) हिंसात्मक क्रांति की न्यूनतम संभावना प्रजातंत्र शांति और सहिष्णुता का दर्शन है। विपक्ष को भी अपनी बात कहने का और शासक दल के प्रति जनविरोध का कारण स्पष्ट करने का पूरा अवसर प्राप्त होता है। बहुसंख्यक जनता यदि शासक वर्ग की मनमानी नीतियों से या उसके दमनात्मक रवैये से असंतुष्ट है तो वह उसे सरलतापूर्वक संवैधानिक उपायों से हटा सकती है। इसलिए प्रजातंत्र में हिंसक क्रांति की संभावना न्यूनतम होती है।
प्रजातंत्र के दोष-    प्रजातांत्रिक प्रणाली के कार्य को क्रियात्मक रूप देने में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयाँ भी हैं । अत: इसमें कुछ दोष भी आ जाते हैं। प्रजातंत्र के प्रमुख दोष निम्न हैं-
(1) गुणों की अपेक्षा संख्या को महत्व प्रजातंत्र में गुणों की अपेक्षा संख्या को अधिक महत्व दिया जाता है। प्रत्येक मतदाता चाहे वह योग्य हो या अयोग्य समानता के आधार पर उसके मत का मूल्य एक ही होता है। अत: अधिक गुणी व्यक्तियों की महत्ता का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता।
(2)अयोग्यों का शासन – शासन एक कला है। शासन करने की कला, योग्यता और क्षमता केवल कुछ लोगों में रहती है, किन्तु प्रजातंत्र में प्रत्याशी उसके परिचय, जाति अथवा लोकप्रियता के आधार पर चुन लिया जाता है। इसलिए प्रजातंत्र को अयोग्यों का शासन भी कहते हैं।
(3) सार्वजनिक समय व धन का अपव्यय – में चुनावों की लम्बी और जटिल प्रक्रिया के पश्चात् ही व्यवस्थापिका का गठन हो पाता है। अत्यावश्यक कानूनों के निर्माण करने में भी कई बार वर्षों लग जाते हैं । चुनावों की प्रक्रिया में काफी धन खर्च होता है। अतः प्रजातंत्र में धन व समय दोनों का अपव्यय होता है।
(4) धनिकों का वर्चस्व प्रजातंत्र में सभी को समान रूप से राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी मिलती है। यह सैद्धान्तिक बात है व्यवहार में प्रजातंत्र में चुनाव इतने खर्चीले हो गए हैं कि सामान्य जन तो चुनावों में किसी पद हेतु प्रत्याशी के रूप में भाग लेने की बात भी नहीं सोच सकते हैं। इससे जनता का शासन’ सहज ही ‘धनिकों के शासन में परिवर्तित होता जा रहा है।
(5) दलीय गुटबन्दी वर्तमान प्रजातंत्र के संचालन के लिये राजनीतिक दल अनिवार्य होते हैं। राजनीतिक दलों का गठन प्रजातंत्र की सफलता व लोक कल्याणकारी नीतियों द्वारा जनहित करने के उद्देश्य से होता है किन्तु व्यवहार में सत्ता प्राप्ति ही इनका मुख्य लक्ष्य रह गया है। राजनीतिक दल अपना वर्चस्व व स्वार्थ सिद्ध करने के उपाय खोजते रहते हैं।
(6) युद्ध व संकट के समय निर्बल और संकट के समय अधिक शीघ्रतापूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, किन्तु प्रजातांत्रिक प्रणाली ऐसे समय में प्रभावहीन सिद्ध होती है। प्रजातंत्र में सत्ता के फैलाव के कारण निर्णय लेने तथा उसे क्रियान्वित करने में बहुत अधिक समय लगता है।
Chepter ― 3
संविधान निर्माण
प्रश्न 1- नेहरू ने क्यों कहा कि भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं है?
उत्तर – (क) नेहरू ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अभी उन सभी वायदों को पूरा करना है, जो देशवासियों से किए गए हैं; अतः किए गए वायदों को पूरा करने के लिए निरन्तर प्रयास करने का समय है, आराम का नहीं।
प्रश्न 2- नेल्सन मंडेला कौन थे?
उत्तर – नेल्सन मंडेला अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के नेता थे। उन्हें 28 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका की सबसे भयानक जेल-रोब्बेन द्वीप में कैद रखा गया था।
प्रश्न 3- ANC क्या था?
उत्तर – यह अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस था, यह वह संगठन था जिसके झंडे तले एक जुट होकर पृथक्करण सिद्धांतों के खिलाफ संघर्ष किया गया। इसमें कम्युनिस्ट पार्टी, बहुत सारे मजदूरों के संघ सम्मिलित थे।
प्रश्न 4- संविधान क्या है?
उत्तर – किसी देश का संविधान लिखित नियमों की एक श्रृंखला है जिसे देश में रहने वाले सभी लोग स्वीकार करते हैं।
प्रश्न 5 – उद्देशिका क्या है?
उत्तर – उद्देशिका (Preamble) किसी पुस्तक की प्रस्तावना (Preface) के जैसा है। यह भारतीय संविधान की आत्मा है। यह सरकार की कार्यशैली एवं सभी कानूनों का संक्षिप्त विवरण देता है।
प्रश्न 6-‘प्रभुत्व-संपन्न’ का क्या अर्थ है?
उत्तर – प्रभुत्व संपन्न का अर्थ है कि जनता/लोग अपने से जुड़े प्रत्येक मामले में चाहे वो बाहरी हो या आंतरिक निर्णय करने का सर्वोच्च अधिकार रखती है। कोई भी बाहरी शक्ति भारतीय सरकार को आदेश नहीं दे सकती है।
प्रश्न 7. पंथ-निरपेक्ष (Secular) का क्या अर्थ है?
उत्तर – नागरिकों को किसी भी धर्म को मामने की पूरी स्वतंत्रता है। परन्तु कोई धर्म राजकीय नहीं है। सरकार सभी धार्मिक मान्यताओं और आचरणों को समान सम्मान देती है।
प्रश्न 8- डॉ. भीमराव अंबेडकर कौन थे? किस प्रकार उन्होंने संविधान निर्माण में केन्द्रीय भूमिका निभाई?
उत्तर- डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। वे एक सामाजिक क्रांतिकारी थे। वे जाति आधारित भेदभाव के विरोधी भी थे। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन एक अलग दृष्टिकोण के साथ। असमानताओं को कैसे दूर किया जाए इस पर उनके विचार गाँधी जी के विरुद्ध थे। उनका विचार था कि राजनीति में सभी समान होने चाहिए लेकिन सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों से भी असमानताओं को दूर किया जाना चाहिए।
प्रश्न 9- भारतीय संविधान की प्रस्तावना एव महत्त्व  लिखिये।
उत्तर – भारतीय संविधान की प्रस्तावना – “हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी, धर्म- निरपेक्ष, लोकतन्त्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बन्धुता को बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनाँक 26 नवम्बर, 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी संवत् 2006 वि.) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
प्रस्तावना का महत्व– सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अनेक निर्णयों में प्रस्तावना के स्वरूप और इसके महत्व की व्याख्या की है। संवैधानिक विधिशास्त्री इसे संविधान निर्माताओं की मनोभावना का प्रतीक मानते हैं। जहाँ संविधान की भाषा में संदिग्धता होती है वहाँ प्रस्तावना संविधान की वैधानिक व्याख्या में सहायता करती है।
प्रश्न 10- भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- भारत का संविधान 1935 के भारत शासन अधिनियम तथा विभिन्न देशों के संविधानों से प्रभावित संविधान है। इसके प्रमुख स्रोत निम्न है
1.ब्रिटेन का संविधान–  ब्रिटेन के संविधान से संसदीय शासन प्रणाली, विधि निर्माण प्रक्रिया, विधायिका के अध्यक्ष का पद, इकहरी नागरिकता और न्यायपालिका के ढाँचे का प्रावधान भारतीय संविधान में लिया गया है।
2. अमेरिका का संविधान – अमेरिका के संविधान से संविधान को सर्वोच्चता, संघीय व्यवस्था, न्यायिक पुनरावलोकन, निर्वाचित राज्याध्यक्ष, राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने की प्रक्रिया, संविधान संशोधन में राज्यों की विधायिकाओं द्वारा अनुमोदन आदि प्रमुख प्रावधान लिये गये हैं।
3. आयरलैण्ड का संविधान– आयरलैण्ड के संविधान का अनुकरण करते हुए राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की व्यवस्था भारतीय संविधान में की गई है।
4. कनाडा का संविधान – भारत को राज्यों की यूनियन’ कहा गया है। ये प्रेरणा कनाडा की है। भारतीय संविधान निर्माताओं के सामने भी संविधान की रचना करते समय राष्ट्र की एकता और अखण्डता का प्रश्न बड़ा ही महत्वपूर्ण था अतः उन्होंने अवशिष्ट अधिकार केन्द्र सरकार को सौंपने का निश्चय किया।
5. आस्ट्रेलिया का संविधान – शक्तियों की लम्बी सूची और समवर्ती विषयों पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों में मतभेत के समय उसका हल निकालने का तरीका आस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है।
6. जर्मनी का संविधान संकटकालीन अवस्था में राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार भारतीय संविधान ने दे रखे हैं। नागरिकों के मौलिक अधिकारों और संघीय ढाँचे को निलम्बित या स्थगित करने तक की शक्ति उसे प्राप्त है। यह व्यवस्था जर्मनी के वाइनर संविधान से मिलती-जुलती है
7. दक्षिण अफ्रीका का संविधान राज्य सभा के सदस्यों होगा के चुनाव की अप्रत्यक्ष पद्धति और संविधान की संशोधन विधि दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गई है।
भूगोल
Chepter ― 1
भारत – आकर और स्थिति
प्रश्न 1- हमारे उत्तर-पश्चिमी, उत्तरी तथा उत्तर-पूर्वी पड़ोसी देशों के नाम बताइए।
उत्तर – उत्तर पश्चिम में – पाकिस्तान, अफगानिस्तान।
उत्तर में – चीन (तिब्बत), नेपाल, भूटान,
उत्तर पूर्व में- म्यांमार, बांग्लादेश
प्रश्न 2- भारत में किन-किन राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है? उनके नाम बताइए।
उत्तर – गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम, राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है।
प्रश्न 3 – भारत का देशांतरीय विस्तार क्या है?
उत्तर – भारत का देशांतरीय विस्तार 68°7′ पूर्व से 97°25′ पूर्व देशांतर तक है।
प्रश्न 4- कौन-सीरेखा भारत को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है?
उत्तर – कर्क रेखा (23°30′) उत्तर में भारत को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है।
प्रश्न 5- कौन-से देश भारत के साथ अपनी सीमा साझा करते हैं?
उत्तर– भारत अपनी भूमिगत सीमा पाकिस्तान, अफगानिस्तान चीन (तिब्बत), नेपाल, भूटान, म्यांमार तथा बांग्लादेश के साथ साझा करता है।
प्रश्न 6- कौन-सा जल निकाय श्रीलंका को भारत में अलग करता है?
उत्तर – पाक जलसंधि जल निकाय श्रीलंका को भारत से अलग करता है।
प्रश्न 7-82°32′ पूर्व देशांतर को भारत की मानक मध्याह्न रेखा क्यों कहा जाता है?
उत्तर – 82° 32′ पूर्व देशांतर को निम्नलिखित कारणों से भारत की मानक मध्याह्न (याम्योत्तर) चुना गया –
(1) यह सामान्य ज्ञान है कि विश्व के देशों के बीच मानक याम्योत्तर का चुनाव प्रधान मध्याह्न के 7° 30′ पूर्व तथा पश्चिम के गुणक में होता है। यह आधे घंटे के बराबर होता है।
(ii) एक देश का मानक समय केन्द्रीय मध्याह्न से लिया जाता है।दो मानक मेरिडियन्स के बीच का समय अंतराल कम से कम आधा घंटा है।(ii) गुजरात से अरुणाचल के स्थानीय समय में दो घंटे का अंतर है। अत: 82° 30′ पूर्व देशांतर रेखा को भारत की मानक याम्योत्तर माना गया है जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरती है। यहीं से पूरे देश का मानक समय लिया जाता है।
Chepter ―2
भारत का भौतिक स्वरूप
प्रश्न 1- हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए।
उत्तर – (क) हिमालय की सबसे उत्तरी श्रृंखला को महान या आंतरिक हिमालय या हिमाद्रि कहते हैं।
(ख) हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित श्रृंखला को हिमाचल या निम्न हिमाचल कहते हैं।
(ग) हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला को शिवालिक नाम से पुकारा जाता है।
प्रश्न 2 – अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में कौन-सा पठार स्थित है?
उत्तर – अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में मालवा का पठार स्थित है।
प्रश्न 3- भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के हैं।
उत्तर – भारत के द्वीपीय समूह में से लक्षद्वीप द्वीप समूह प्रवाल भित्ति के हैं।
प्रश्न 4- बांगर तथा खादर में अंतर बताइए ।
उत्तर – 1 बांगर मैदान पुरानी जालौर मिट्टी के नीचे से निर्मित होते है जबकि खादर मैदान बाढ़ में लाई गई नई जलोढ़ मिट्टी से निर्मित होते हैं ।
2. बांगर भूमि का निर्माण उच्च भू आकार के रूप में होता है जबकि खादर भूमि का निर्माण निकले भू आकार के रूप में होता है ।
3  ऊंचाई के कारण बाढ़ का प्रभाव ना के बराबर होता है जबकि खादर भूमि में के कारण बाढ़ का प्रभाव बंगार भूमि की अपेक्षा अधिक होता है।
4 बांग भूमि में चुनाव आयुक्त कंकड़ होने से यह कम उपजाऊ होती है जबकि खादर भूमि अधिक उपजाऊ होती है ।
5 बंगाल भूमि भारत के पंजाब व उत्तर प्रदेश में मिलती है जबकि खादर भूमि उत्तर प्रदेश बिहार पश्चिम बंगाल में पाई जाती है ।
 6 बांगर मिट्टी को जरूर मिट्टी भी कहते हैं जबकि खादर मिट्टी को नवीन जलोढ़ मिट्टी कहा जाता है
प्रश्न 5- हिमालयन चित्र कथा प्रायद्वीपीय पठार में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर-  हिमालय क्षेत्र नवीन वलित पर्वत का क्षेत्र है जबकि प्रायद्वीपीय पठार भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन भूखंड है यह गोंडवाना का एक भाग है नंबर दो हिमालय क्षेत्र परतदार तथा आग ने शेरों से बने हैं जबकि प्रायद्वीपीय पठार कटोरा गने और कायांतरित शैलो से बने हैं नंबर 3 हिमालय क्षेत्र समानांतर 3 पर्वत श्रेणियों में बटा है जबकि प्रायद्वीपीय पठार पर्वत श्रेणियों पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है नंबर 4 हिमालई क्षेत्र मैं बहुत सी पर्वत शिखर तथा घाटियां है इसकी आकृति चापाकल है जबकि प्रायद्वीपीय पठार की आकृति त्रिभुजाकार है नंबर 5 हिमालय क्षेत्र में कई दर्रे पाई जाती है जबकि प्रायद्वीपीय पठार खनिज संपदा में बहुत धनी है नंबर 6 हिमालय क्षेत्र से कई नदियां निकलती है जो सदानीरा है जबकि प्रायद्वीपीय पठार से नदिया तो निकलती है किंतु ग्रीष्म ऋतु में यह सूख जाती है
प्रश्न 6- इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट का यूरेशियन प्लेट से टकराने का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर– इस टकराव के कारण इन दोनों प्लेटों के बीच स्थित ‘टेथिस’ भू-अभिनति के अवसादी चट्टान, वलित होकर हिमालय तथा पश्चिम एशिया की पर्वतीय श्रृंखला के रूप में विकसित हो गए।
प्रश्न 7 – वितरिकाएँ क्या हैं?
उत्तर– नदियाँ अपने निचले भाग में गाद एकत्र हो जाने के कारण अनेक धाराओं में बँट जाती हैं, इन धाराओं को ही वितरिकाएँ कहते हैं।
प्रश्न 8- बरकान क्या है?
उत्तर – यह अर्ध चंद्राकार बालू का टीला है। यह राजस्थान के थार मरुस्थल तक फैला है। 
प्रश्न 9-चिल्का झील कहाँ स्थित है?
उत्तर-चिल्का झील ओडिशा (उड़ीसा) में महानदी डेल्टा के दक्षिण में स्थित है। यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की नदी झील है।
प्रश्न 10- दक्कन के पठार की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर – दक्कन के पठार की विशेषताएँ निम्न हैं –
(i) दक्कन का पठार एक त्रिभुजाकार भू-भाग है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है।
(ii) यह प्राचीनतम भू-भाग है और कठोर आग्नेय और कायांतरित शैलों से बना है।
(iii) सतपुड़ा श्रृंखला अपने वृहत आधार का प्रसार उत्तर की ओर करती है जबकि महादेव और कुमाऊँ पहाड़ियाँ और मैकाल श्रृंखला अपने पूर्व की ओर विस्तार लेती हैं।
(iv) इसके पश्चिमी किनारे से पश्चिमी घाट अधिक ऊँचे तथा विस्तृत हैं पूर्वी घाट की अपेक्षा पठार पूर्व की ओर ढाल लिए हुए हैं।
(v) इसका उत्तर-पूर्व विस्तार मेघालय और कार्बो एंगलांग पठार के नाम से जाना जाता है। यह छोटा नागपुर पठार से एक भ्रंश के द्वारा अलग हो जाता है।
(vi) पूर्वी किनारा, पूर्वी घाट द्वारा चिह्नित होता है जो कि छोटी-छोटी पहाड़ियों में विभाजित हैं।
(vii) इसकी तीन मुख्य पर्वत श्रेणियाँ हैं पश्चिम से पूर्व की ओर गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ ।
प्रश्न 11- हिमालय पर्वत श्रृंखला का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर – हिमालय भू-गर्भीय रूप से युवा एवं बनावट के दृष्टिकोण से वलित पर्वत श्रृंखला है। ये पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम- पूर्व दिशा में सिंधु से लेकर ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं। हिमालय  विश्व की ऊंची पर्वत श्रेणी है और एक अत्यधिक असम अवरोधों में से एक है। ये 2,400 किमी. की लम्बाई में फैले एक अर्द्धवृत्त का निर्माण करते हैं। इसकी चौडाई कश्मीर में 400 किमी. एवं अरुणाचल में 150 किमी. है। पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।
अर्थशास्त्र
Chepter ― 1
पालमपुर गांव की कहानी
प्रश्न 1. एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग- अलग कौन-से तरीके हैं? समझाने के लिए उदाहरणों का प्रयोग कीजिए।
उत्तर – एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के दो अलग- अलग तरीके निम्नलिखित हैं
(i) बहुविध फसल प्रणाली – एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को बहुविध फसल प्रणाली कहते हैं। यह भूमि के किसी एक टुकड़े में उपज बढ़ाने की सबसे सामान्य प्रणाली है।
उदाहरण– बरसात के मौसम में किसान ज्वार और बाज़र उगा सकते हैं। इसके बाद अक्टूबर और दिसम्बर के बीच आलू की खेती करते हैं और सर्दी के मौसम में खेतों में गेहूँ उगाया जाता
(ii) आधुनिक कृषि विधियाँ – दूसरा तरीका अधिक उपज के लिए खेती में आधुनिक कृषि विधियों का प्रयोग करना है जो केवल अति उपज प्रजातियों वाले बीजों, सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों आदि के संयोजन से ही संभव है।
उदाहरण– 1960 में हरित क्रांति ने भारतीय किसानों को अधिक उपज वाले बीजों के द्वारा गेहूँ और चावल ज्यादा मात्रा में पैदा करना सिखाया।
प्रश्न 2-‘मानव पूँजी’ का क्या अर्थ है?
उत्तर – यह उत्पादन का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है जो स्वयं उपभोग हेतु या बाजार में बिक्री हेतु उत्पादन के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूँजी का एक साथ प्रयोग अपने ज्ञान और उद्यम की सहायता से करता है।
प्रश्न 3- ‘हरित क्रांति’ से भारतीय किसानों को किस प्रकार के लाभ हुए?
उत्तर– हरित क्रान्ति से भारतीय किसानों को निम्न लाभ हुए
-1. हरित क्रान्ति ने भारतीय किसानों को ज्यादा उपज वाले बीजों (एच.वाई.वी.) का प्रयोग करना बताया। 
2. भारतीय किसानों ने गेहूँ और चावल की आधुनिक कृषि पद्धति को भी अपनाया।
प्रश्न 4 – पालमपुर गाँव में क्या-क्या सुविधाएं उपलब थीं?
उत्तर- गाँव के अधिकांश घरों में बिजली की सुविधा थी।।बिजली का प्रयोग खेतों में नलकूप चलाने और कई दूसरे कामों के लिए भी किया जाता था। पालमपुर में एक उच्च विद्यालय।और दो प्राथमिक विद्यालय हैं, गाँव में सरकार द्वारा चलने वाला एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है जहाँ बीमार व्यक्तियों की देखभाल होती है। यहाँ एक अच्छी विकसित सड़क व्यवस्था और परिवहन सुविधाएँ थीं।
प्रश्न 5- मानवीय पूंजी तथा भौतिक पूंजी में अंतर स्पष्ट कीजिए 
उत्तर- मानवीय पूंजी तथा भौतिक पूंजी में अंतर – 
1 मानव पूंजी का दृश्य होती है जबकि भौतिक पूंजी दृश्य होती है ।
2. मानव पूंजी को बाजार में बेचा नहीं जा सकता केवल इसकी सेवाओं को बेचा जा सकता है जबकि भौतिक पूंजी को अन्य वस्तुओं की तरह सरलता से बाजार में बेचा जा सकता है 
3 . मानव पूंजी को उसके स्वामी से अलग नहीं किया जा सकता जबकि बहुत ही पूंजी को उसकी स्वामी से अलग किया जा सकता है ।
4 .मानव पूंजी ज्ञान और उद्यम का स्टॉप है जबकि भौतिक पूंजी मानव निर्मित उत्पादन का एक साधन है।
5. मानवीय पूंजी का उदाहरण श्रम है जबकि भौतिक पूंजी के उदाहरण और चार मशीनें जनरेटर आदि हैं।
प्रश्न 6- पालमपुर गाँव में कौन-कौन सी गैर-कृषि क्रियाएँ होती हैं? संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर – पालमपुर गाँव में निम्नलिखित गैर-कृषि क्रियाएँ होती हैं –
1. डेयरी– पालमपुर के कई परिवारों में डेयरी एक प्रचलित क्रिया है। लोग अपनी भैंसों को कई तरह की घास, बरसात के मौसम में उगने वाली ज्वार और बाजरा आदि खिलाते हैं। दूध को पास के बड़े गाँव रायगंज में बेच दिया जाता है।
2. पालमपुर में लघुस्तरीय विनिर्माण- इस समय पालमपुर में 50 से कम लोग विनिर्माण कार्य में लगे हुए हैं। इसमें बहुत  साधारण उत्पादन क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है और यह छोटे स्तर पर किया जाता है। ये कार्य पारिवारिक श्रम की सहायता से घर में या खेतों में किया जाता है। मजदूरों को कभी-कभार ही किराए पर लिया जाता है।
3. दुकानदार – पालमपुर में बहुत कम लोग व्यापार (वस्तु विनिमय) करते हैं। पालमपुर के व्यापारी दुकानदार हैं जो शहरो के थोक बाजार से कई प्रकार की वस्तुएँ खरीदते हैं और उन्हें गाँव में बेच देते हैं। उदाहरणतः गाँव के छोटे जनरल स्टोर चावल, गेहूँ, चीनी, चाय, तेल, बिस्कुट, साबुन, टूथ पेस्ट, बैट्री, मोमबत्ती, कॉपी, पैन, पेन्सिल और यहाँ तक कि कपड़े भी बेचते हैं।
4. परिवहन– पालमपुर और रायगंज के बीच की सड़क पर – बहुत से वाहन चलते हैं जिनमें रिक्शा वाले, तांगे वाले, जीप, ट्रैक्टर, ट्रक चालक, पारंपरिक बैल गाड़ी एवं बग्गी (भैंसागाड़ी) शामिल हैं। इस काम में लगे हुए कई लोग अन्य लोगों को उनके गंतव्य स्थानों तक पहुँचाने और वहाँ से उन्हें वापस लाने का काम करते हैं जिसके लिए उन्हें पैसे मिलते हैं। वे लोगों और वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाते हैं।
Chepter ― 2
संसाधन के रूप में लोग
प्रश्न 1. ‘संसाधन के रूप में लोग’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर– ‘संसाधन के रूप में लोग’ से अभिप्राय देश के उन कार्यशील लोगों से है, जो निपुण तथा योग्य हैं। संसाधन के रूप में लोग सकल राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान देते हैं। दूसरे संसाधनों की तरह जनसंख्या भी एक संसाधन है, जिसे मानव संसाधन कहा जाता है।
प्रश्न 2. आर्थिक और गैर आर्थिक क्रियाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-   आर्थिक क्रियाएं का उद्देश्य धन कमाना होता है जबकि गैर आर्थिक क्रियाओं का उद्देश्य मनोरंजन समाज सेवा देश प्रेम व दया भाव होता है नंबर दो आर्थिक क्रियाओं का वैधानिक होना आवश्यक होता है जबकि गैर आर्थिक क्रियाओं का वैधानिक होना आवश्यक नहीं होता नंबर तीन आर्थिक क्रियाएं मानवीय आवश्यकताओं से प्रेरित होती हैं जबकि गैर आर्थिक क्रियाएं मानवीय इच्छा से प्रेरित होती है आर्थिक क्रियाओं का क्षेत्र सीमित होता है जबकि अन आर्थिक क्रियाओं का क्षेत्र व्यापक होता है।
प्रश्न 3. प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी में क्या अंतर है?
उत्तर- प्रच्छन्न बेरोजगारी– जब काम में लगे हुए श्रमिको की संख्या वास्तव में उस काम को पूरा करने के लिए आवश्यक श्रमिकों से अधिक है तो ऐसी स्थिति को प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं। अगर इनमें से कुछ को काम से हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन प्रभावी नहीं होगा। उदाहरण के लिए, कृषि क्षेत्र में आमतौर पर ऐसी बेरोजगारी देखी जाती है।
मौसमी बेरोज़गारी – जब लोग वर्ष के कुछ महीनों में रोजगार प्राप्त नहीं कर पाते हैं। तो ऐसी स्थिति को मौसमी बेरोजगारी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, कृषि पर आश्रित लोग आमतौर पर इस तरह की समस्या से जूझते हैं। वर्ष में कुछ व्यस्त मौसम होते हैं जब बुआई, कटाई, निराई और गहाई होती है। कुछ विशेष महीनों में कृषि पर आश्रित लोगों को अधिक काम नहीं मिल पाता।
प्रश्न 4. शिक्षित बेरोज़गारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों है?
उत्तर-शिक्षित बेरोजगारी भारत के लिए एक विशेष समस्या निम्न कारणों से है – 
1. शहरी क्षेत्रों के मामले में मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारी अनेक युवक रोजगार पाने में असमर्थ हैं।
2. एक ओर तकनीकी योग्यता प्राप्त लोगों के बीच बेरोज़गारी है, तो दूसरी ओर आर्थिक संवृद्धि के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल वाले लोगों की कमी भी है। 
3. एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मैट्रिक की तुलना में स्नातक और स्नातकोत्तर युवकों में बेरोजगारी अधिक तेजी से बढ़ी है। 
4. उच्च वर्ग में बहुत हैं उन सबको रोजगार नहीं मिला रहा है।इसके विपरीत कुछ विशेष श्रेणियों (जैसे दलित वर्ग) में शिक्षित लोगों की कमी है।
प्रश्न 5- जनसंख्या कैसे मानव पूँजी बन जाती है?
उत्तर – जनसंख्या मानव पूँजी तब बन जाती है जब शिक्षा, स्वास्थ्य तथा प्रशिक्षण सेवाओं में निवेश किया जाता है।
प्रश्न- क्या महिलाओं का कार्य आर्थिक गतिविधि है?
उत्तर – नहीं, महिलाओं का कार्य आर्थिक गतिविधि नहीं है क्योंकि महिलाओं को परिवार में सेवा प्रदान करने के लिए भुगतान नहीं किया जाता। अत: महिलाओं द्वारा किए गए घरेलू कार्य को राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़ा जाता।
प्रश्न 6-शिक्षित बेरोजगार कौन हैं?
उत्तर – शिक्षित बेरोजगार वे हैं जो मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारक होने के बावजूद रोजगार पाने में असमर्थ हैं।
प्रश्न 7- ‘मानव पूंजी निर्माण’ क्या है? मानव पूंजी में निवेश कैसे किया जाता है?
उत्तर – जब विद्यमान मानव संसाधन के लिए और अधिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य विकसित किया जाता है तब यह मानव पूंजी निर्माण कहलाता है। मानव पूँजी में निवेश शिक्षा और स्वास्थ्य द्वारा किया जाता है जो भौतिक पूँजी की तरह लाभ देता है। अधिक शिक्षित अथवा बेहतर प्रशिक्षित लोगों की उच्च उत्पादकता के कारण होने वाली अधिक आय और साथ ही अधिक स्वस्थ लोगों की उच्च उत्पादता के रूप में इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है।
प्रश्न 8 बाजार क्रियाएं और गैर बाजार क्रिया में अंतर बताइए । 
उत्तर–  बाजार क्रियाएं भी हैं जिनमें कार्य को पूरा करने के लिए दूसरों को पारिश्रमिक दिया जाता है और उत्पादन को लाभ प्राप्त करने के लिए बाजार में बेचा जाता है जबकि गैर बाजार क्रिया में उत्पादन स्वयं के उपभोग के लिए किया जाता है नंबर दूं इसमें वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन शामिल होता है जबकि गैर बाजार क्रिया में उपभोग के लिए प्राथमिक वस्तुओं का संसाधन करके स्वयं उपभोग पर आधारित है नंबर तीन बाजार क्रियाएं हमें लाभ देती है जबकि गैर बाजार क्रिया के लाभ नहीं देती।
प्रश्न 9- स्वास्थ्य के लिए भारत की राष्ट्रीय नीति क्या है?
उत्तर – स्वास्थ्य के लिए भारत की राष्ट्रीय नीति स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं में वृद्धि करना है। परिवार कल्याण और पोषण सेवाओं पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है, पिछले पाँच दशकों में भारत ने एक वृहत स्वास्थ्य संरचना और प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक क्षेत्रों में सरकारी और निजी क्षेत्रों के लिए अपेक्षित एक विस्तृत स्वास्थ्य आधारिक संरचना और जनशक्ति का निर्माण किया है। वर्तमान में जनसंख्या के अल्प सुविधा प्राप्त वर्गों पर विशेष ध्यान देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं, परिवार कल्याण और पौष्टिक सेवा तक इनकी पहुँच को बेहतर बनाया जा रहा है।
प्रश्न 10- बेरोजगारी के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – बेरोजगारी के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं-
1. बेरोजगारी से जनशक्ति संसाधन की बर्बादी होती है तथा आर्थिक बोझ में वृद्धि होती है।
 2. जो लोग अर्थव्यवस्था के लिएपरिसम्पत्ति होते हैं, वे बेरोजगारी के कारण दायित्व में बदल जाते हैं। 
3. बेरोजगारी से युवकों में निराशा और हताशा की भावना पैदा होती है। इससे स्कूल प्रणाली से अलगाव में वृद्धि होती है।
4. इससे कार्यरत जनसंख्या पर बेरोजगारों की निर्भरता बढ़ती है। इससे व्यक्ति और साथ ही साथ समाज के जीवन की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 
5. इससे बेरोजगार व्यक्ति के स्तर पर एक आम गिरावट आती है। 
6. इससे किसी अर्थव्यवस्था के समग्र विकास पर अहितकर प्रभाव पड़ता है। 
7. इससे उन संसाधनों की बर्बादी होती है, जिन्हें उपयोगी ढंग से नियोजित किया जा सकता था।
Note –  दोस्तों आशा करते हैं आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो यह अवश्य आपकी परीक्षाओं के लिए सहायता प्रदान करेगी इसे अपने सभी दोस्तों में शेयर अवश्य करें जिससे कि सभी विद्यार्थियों की मदद हो सके और हमें कमेंट करके बताएं की आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी।
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