MP board 12th Biology Trimasik Paper 2021-22 Most imp Solution

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12th Biology Trimasik Paper Solution 2021-22 : दोस्तों माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा सितंबर में त्रैमासिक परीक्षा आयोजित की जाएंगी कोरोना काल के चलते विद्यार्थियों की विगत 2 वर्षों की शिक्षा अवरुद्ध हुई है जिसके कारण इस वर्ष की होने वाली परीक्षाओं में बहुत से  परिवर्तन किये गये हैं कुछ सिलेबस भी रिड्यूस कर दिया गया है। अब विद्यार्थियों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि परीक्षा की तैयारी किस प्रकार से करें परीक्षा की दृष्टि से क्या important है। दोस्तों यदि आप important questions की खोज कर रहे हैं तो बिल्कुल सही जगह पर आये हैं क्योंकि हम आपको त्रिमासिक परीक्षा की तैयारी के लिए सभी विषयों के important questions यहां उपलब्ध करेंगे। आज हम आपको 12वी कक्षा के biology विषय के important questions यहां बता रहे 

class 12th biology important questions :-

यहां आपको कक्षा 12वीं के बायोलॉजी विषय के सभी important question को solution सहित बताने वाले हैं जो आपके त्रिमासिक और वार्षिक परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है । 

Important questions

Chapter→1
( जीवो में जनन )

अति लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.  सूक्ष्म प्रवर्धन द्वारा उत्पन्न पौधों को  सोमा क्लोन क्यों कहते हैं?

उत्तर-  पौधे के किसी का एक भाग से कुछ ऊतक लेकर ऊतक संवर्धन द्वारा अत्यंत ही कम समय में हजारों पादपों को उत्पन्न करने की विधि सूक्ष्म प्रवर्धन कहलाती है। सूक्ष्म प्रवर्धन द्वारा उत्पन्न प्रत्येक पौधा अनुवांशिक रूप से मूल पादप के समान होता है इसलिए इन पौधों को सोमा क्लोन कहते हैं।

प्रश्न 2. आलू का कन्द एक भूमिगत भाग है फिर भी इसे तना कहते हैं। दो कारण लिखिए।

उत्तर-  इसके दो कारण इस प्रकार हैं –

1.  कंदों पर स्पष्ट पर्व एवं पर्व संधि का पाया जाना। 

2.   पर्व संधियों पर कलिका का पाया जाना।

प्रश्न 3. युग्मक जनन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-  सभी जीवो में नर तथा मादा युग्मकों की जनन प्रक्रिया युग्मक जनन कहलाती है जीवो में बीजाणु धानीयों में बीजाणु निर्माण अर्धसूत्री विभाजन द्वारा होता है इन बीजाणुओं का एक विशिष्ट प्रक्रिया के तहत युग्मकों में परिवर्धन होता है। परिवर्धन की  यह प्रक्रिया युग्मक जनन कहलाती है।

प्रश्न 4.  चार द्विलिंगी प्राणियों के नाम लिखिए।

उत्तर-   1. स्पंज  2. टेपवर्म  3. केंचुआ  4. जोंक

प्रश्न 5.  अकोशकीय जीवों जैसे कि अमीबा को अमर क्यों कहते हैं?

उत्तर-  एक कोशिकीय जीवो उदाहरण के लिए अमीबा में गुणन की कई विधियाँ जैसे विखण्डन, बहुखण्डन , स्पोरिलेशन पायी जाती हैं जिससे यह कोशिका एक साथ कई सन्तति कोशिकाओं को बना सकती है। अत: कोई भी कोशिका बूढ़ी होने से पहले विभक्त होकर सन्तति कोशिकाओं में बट जाते हैं इस कारण से एक कोशिकीय जीवों को अमर जीव कहते हैं।

लघुत्तरीयर प्रश्नोत्तरी –

प्रश्न 6.   नर मधुमक्खी में 16 गुणसूत्र होते हैं जबकि मादा में 32 गुणसूत्र होते हैं इसका कारण बताइए।

उत्तर –   नर मधुमक्खी का विकास अनिषेचित अण्ड से होता है अत: इनमें गुणसूत्रों की संख्या अगुणित होती है जो कि 16 है परंतु  मादा मधुमक्खी का विकास निषेचित अंडे से होता है जिसमें अगुणित नर युग्मक  (16 गुणसूत्र) तथा अगुणित अंड या मादा युग्मक संयोजन करते हैं अतः  इनमें गुणसूत्रों की संख्या 32 होती है।

प्रश्न 7.  कायिक प्रवर्धन से क्या समझते हैं ? दो उदाहरण दीजिए । 

उत्तर –   कायिक प्रवर्धन-  पौधों में होने वाला एक प्रकार का अलैंगिक जनन है जिसमें पौधों के कायिक अंग जैसे तना, जड़ और पत्ती का प्रयोग नये पौधे उगाने में किया जाता है। पुराने पौधों के विभिन्न अंगों में उपस्थित कायिक प्रवर्ध या अंकुर को जब अनुकूल परिस्थितियां ( नमी ताप आदि ) दी जाती हैं तब वे नए पौधे के रूप में विकसित होने लगते हैं ।

उदाहरण- 1. आलू के कंद का प्रयोग कर आलू की फसल प्राप्त करना ।

2. अदरक के प्रकंद से पौधा उगाना।

प्रश्न 8.  जीवो में जनन कितने प्रकार का पाया जाता है?

उत्तर –   जीवो में जनन तीन प्रकार का पाया जाता है-  1.कायिक जनन   2.अलैंगिक जनन   3.लैंगिक जनन

प्रश्न 9. जुस्पोर (अलैंगिक चल बीजाणु) एवं युग्मक में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-  जुस्पोर एवं युग्मक में अंतर निम्नलिखित हैं –

1. जूस्पोर स्पोरेन्जियम  में उत्पन्न होते हैं जबकि युग्मक गैमेटेंजिया में।

2.  जूस्पोर सीधे अंकुरण करके लैंगिक विधि के तहत जीव को जन्म देते हैं जबकि युग्मक अंकुरित नहीं होते वह संलयन के पश्चात ही युग्मनज बनाते हैं तथा युग्मनज से नया जीव बनता है।

3.  युग्मक में अनुवांशिक विविधता आती है पर स्पोर में यह आवश्यक नहीं है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

10.   अलैंगिक जनन तथा लैंगिक जनन के मध्य विभेद स्थापित कीजिये।  

उत्तर- 1. अलैंगिक जनन वह विधि है जिसमें अगली पीढ़ी की संगति का निर्माण बिना युग्मक एवं युग्मक संलयन के होता है अलैंगिक जनन बीजाणु अंकुरण अनिषेक फलन अपोमिक्सिस कायिक प्रवर्धन आदि का प्रकार का होता है जबकि लैंगिक जनन वह विधि है जिसमें युग्मक निर्माण एवं युग्मक संलयन के पश्चात अगली पीढ़ी की संतति का निर्माण होता है।

2. अलैंगिक जनन में अनुवांशिक विविधता का समावेशन नहीं होता जबकि लैंगिक जनन में युग्मक निर्माण एवं युग्मक संलयन दोनों चरणों में अनुवांशिक विविधता का समावेशन होता है ।

3. अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संततियों में अनुकूलन का अभाव होता है जबकि लैंगिक जनन से उत्पन्न संततियों  में विविधता का समावेशन होने के कारण अनुकूलन पाया जाता है।

प्रश्न 11.  पुष्पी पौधे में कायिक जनन का वर्णन कीजिये।

अथवा

कायिक जनन को प्रारूपिक अलैंगिक जनन क्यों माना गया है?

उत्तर-  कायिक जनन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत पौधे की संतति पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाने के लिए पौधे की जीवित शाखाओं को काट कर सीधा जमीन या पेड़ के किसी भी भाग में रोपित करके नए पौधे का निर्माण किया जाता है आलू गन्ना अदरक डेहरिया जैसे पादप ओ की खेती मैं कायिक जनन का ही प्रयोग किया जाता है कायिक जनन को एक प्रारूपिक अलैंगिक जनन इसलिए माना गया है क्योंकि इसमें उत्पन्न पौधों पौधे बिना युग्मक संलिप्तता केका विकसित होते हैं तथा वे एक दूसरे के क्लोन होते हैं।

प्रश्न 12.  यद्यपि लैंगिक जनन एक लंबे समय तक चलने वाली अधिक ऊर्जा की मांग वाली एवं जटिल प्रक्रिया है तथापि जंतु एवं पादप जगत के अनेक समूह के जीव इसी प्रकार के जनन क महत्व देते हैं इसके कारण बताइये।

उत्तर-.  लंबी अवधि तक चलने एवं जटिल होने की बाद भी प्रकृति द्वारा लैंगिक जनन का महत्व दिया जाता है इसके निम्नलिखित कारण हैं-

1.  लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संततियों  में अनुवांशिक विविधता का समावेश होने के कारण भी कठिन परिस्थितियों के लिए अधिक अनुकूलित होते हैं।

2. लैंगिक जनन  उद्विकास की संभावना को बनाए रखते हैं तथा लम्बे समय तक प्रजातियों का अंत  नहीं हो पाता है।

 3. लैंगिक जनन के फलस्वरूप बना युग्मनज  कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में अपनी सुसुप्तिय गुण के कारण बच निकलते है तथा अनुकूलित परिस्थितियां आने पर अंकुरण द्वारा पुन: अगली पीढ़ी का निर्माण करता है।

Chapter  –  2    
पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन

अति लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.  परागण के दो लाभ लिखिए।

 उत्तर- 1.  पर परागण द्वारा संकर बीज बनाया जा सकता है जो बीमारी रोधक, उच्च उत्पादकता, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे देते हैं ।

2. पर परागण द्वारा बने बीज हाइब्रिड गुणों वाले होते हैं जिनमें कई नये गुणों का समावेश संभव होता है।

प्रश्न 2.  भ्रूणपोष किसे कहते हैं?

उत्तर-  पुष्पी पादपों में द्विनिषेचन के समय नर युग्मक तथा द्वितीय न्यूक्लियाइ  के सनलयन  से त्रि गुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनाता है जो बाद में त्रिगुणित भ्रूणपोष ऊतक के रूप में विकसित होता है यह विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। इसे ही भ्रूण पोष कहते हैं।

प्रश्न 3. किसी भ्रूण कोष के उपकरण में भाग लेने वाली कोशिकाओं के नाम लिखिए।

 उत्तर-  अण्ड उपकरण में 2 सहायक कोशिकाएं तथा एक अंड कोशिका शामिल होती है।

प्रश्न 4.  विपुन्सन (एमस्कुलेशन) किसे कहते हैं?

उत्तर-  एक मादा जनक  का द्वि लिंगी पुष्प से पराग के एंथेसिस से पहले पुष्पकलीका   से पराग कोष के निष्कासन की क्रिया एमस्कुलेशन कहलाती है

प्रश्न 5.  स्व-असंगतता क्या है?

उत्तर-  स्व असंगतता  एक प्रक्रम है जो एक पादप पर विकसित क्रियाशील नर एवं मादा युवकों के बीच स्वपरागण के पश्चात संलयन को रोकता है यह एक आनुवांशिक प्रक्रिया है। यह पर परागण को प्रोत्साहित करता है।

प्रश्न 6.  बहु भ्रूणता किसे कहते हैं?

उत्तर-  एक बीज में एक से अधिक भ्रूण की उपस्थिति को बहु भ्रूणता कहते हैं।

लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 7.  द्वि निषेचन क्या है ?  इसका महत्व लिखिये।

उत्तर- पुष्पी पादप के भ्रूण कोष में पराग नली के द्वारा दो स्पर्म प्रविष्ट कराए जाते हैं जो भ्रूणकोष  के अंदर दो प्रकार के निषेचन संपन्न करते हैं। पहले स्पर्म का अण्ड कोशिका से संलयन  होता है जिसे युग्मक संलयन कहते हैं तथा दूसरे स्पर्म का ध्रुवीय न्यूक्लियाई से संलयन होता है जिसे त्रि संलयन कहते हैं दोनों प्रकार की संलयन को द्वि निषेचन कहते हैं पहले संलयन से भ्रूण तथा दूसरे से भ्रूणपोष का निर्माण होता है।

प्रश्न 8.  पराग बैंक किस प्रकार उपयोगी होते हैं?

उत्तर-  द्रव नाइट्रोजन का तापमान  -196 डिग्री सेल्सियस होता है जिस पर बहुत से प्रजाति के पराग कणों को कई वर्षों तक भंडारित करके तथा संरक्षित रखा जा सकता है इस प्रकार विभिन्न प्रजातियों के परागकणों  का एक स्थान पर संग्रहण किया जा सकता है इसे पराग बैंक कहते हैं इन पराग बैंक का उपयोग कर फसल प्रजनन कार्यक्रम को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

प्रश्न 9.  सेव को आभासी फल क्यों कहते हैं?  पुष्प का कौन-सा भाग फल की रचना करता है?

उत्तर- अंडाशय के अलावा फूल के किसी अन्य भाग से विकसित फल को आभासी फल कहते हैं यह एक आभासी फल है क्योंकि यह पुष्पासन की भागीदारी से विकसित होता है। सामान्यता अंडाशय ही निषेचन के पश्चात फल की रचना करता है।

प्रश्न 10.  बहु भ्रूणता क्या है? व्यवसायिक रूप से इसका किस प्रकार से अतिदोहन किया जा सकता है?

उत्तर-   बीच में एक से अधिक भ्रूण विकसित होने की प्रक्रिया बहु ढूंढता कहलाती है ऐसी स्थिति में एक बीजाण्ड के अंदर कई भ्रूण विकसित हो जाते हैं । अतः हम बहु भ्रूणता का प्रयोग कर रोगरहित तथा उच्च उत्पादन क्षमता वाले फल और सब्जियों की किस्में विकसित की जा सकती हैं।

प्रश्न 11.  स्त्री केसर का नामांकित चित्र बनाइये।

उत्तर-

स्त्री केसर का नामांकित चित्र

      पाठ –  3       
मानव जनन

अति लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. सेमिनल फ्लूइड (शुक्रिय तरल ) के प्रमुख संघटक क्या है?

उत्तर-  शुक्रिय तरल के मुख्य संघटक निम्नलिखित हैं-

1. सिट्रिक एसिड,  2. एसिट फोस्फेटेज ,3. केल्शियम Ca,  4.  Na (सोडियम) ,  5.  K(पोटैशियम), 6.  प्रोटोन डिग्रेडिंग एंजाइम ,7. फ्रक्टोज।

प्रश्न 2.  रजोधर्म क्या है? 

उत्तर-  स्त्रियों में  हर 28 व 29 वे दिन पर 3 से 4 दिनों तक रक्त स्त्राव होता है इसे रजोधर्म कहते हैं । इस रक्त स्त्राव का कारण गर्भाशय की अंत: परत और उसकी रक्त वाहिनीयों का नष्ट होना  है जो तरल रूप में योनि से बाहर आता है परंतु सगर्भता की स्थिति में रजोधर्म बंद हो जाता है।

प्रश्न 3.  मादा जनन मार्ग में एम्प्युलरी इस्थमिक सन्धि स्थल का क्या महत्व है?

उत्तर- मादा जनन प्रिजनीय नलिका में एम्पुला तथा इस्थमिक संधि स्थल वह जगह है जहां स्पर्म तथा अंडाणु के बीच निषेचन होता है निषेचन के बाद बना युग्मनज अंड वाहिनी के संकीर्ण पथ की ओर बढ़ता है तथा इसी नलीका में इसका विदलन शुरू हो जाता है।

प्रश्न 4 शुक्राणु जनन तथा अण्डाणुजनन में अंतर लिखिये।

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प्रश्न 5. मानव शुक्राणु की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर-   एक परिपक्व मानव शुक्राणु की संरचना कैसा होता है शुक्राणु का शरीर मुख्यता शेर रीवा मध्य खंड तथा पुछ में बटा होता है. शुक्राणु का पूरा शरीर एक प्लाज्मा झिल्ली से घिरा होता है सिर भाग मेंं सबसे आगे अग्रिम  पिंडक या एक्रोसोम होता हैै जिसमें हायलोरियूरेेंनीडेज एंजाइम होते हैं जो शुक्राणु द्वारा अंडाणुु के बाहरी आवरण को भेजने में मदद करते हैं  अग्र  पिंडक के  पीछे एक दीर्घिकृत  केंद्रक होता है शुक्राणु के मध्य भाग में असंख्य माइटोकॉन्ड्रिया एकीकृत होकर घने काया केे रुप में व्यवस्थित होते हैं।ये शुक्राणु को गति प्रदान करने हेतु ऊर्जा प्रदान करते हैं। पूँछ का अर्धसूत्र मध्यखण्ड में स्थित होता है। इसमें कशाभिकीय रूप में गति प्रदान करने की क्षमता होती है।

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परिपक्व शुक्राणु की संरचना



प्रश्न 6.  प्रसव क्या है ? प्रसव को प्रेरित करने में कोनसेहार्मोन शामिल होते हैं?
उत्तर- सगर्भता के अंत में गर्भाशय की जोरदार संकुचन के कारण गर्भस्थ शिशु योनि द्वारा बाहर आ जाता है इस प्रक्रिया को प्रसव कहते है। प्रसव के लिए संकेत पूर्ण विकसित र्गभ एवं अपरा से उत्पन्न होते हैं जो गर्भाशय संकुचनों को प्रेरित करते हैं इन्हें गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त कहते हैं।  इसमें मातृ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटॉसिन का स्त्रावण होता है जो उत्क्षेपन प्रतिवर्त को  और उद्दीपित करता है इसके अलावा एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन दो हार्मोन है जो प्रसव की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं एंडोर्फिन एवं प्रोलैक्टिन हार्मोन भी प्रशव में मदद करते हैं।
प्रश्न 7.  हीमोकोरियल अपरा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर-    अपरा एक ऐसा अंग है जो भ्रूण के कुछ भाग तथा माता के गर्भाशय की दीवार की कुछ भाग के मिलने से बनता है। मानव में हीमोकोरियल अपरा पाई जाती है इस प्रकार की अपरा में तीन प्रकार की परतें होती हैं जो भ्रूण शरीर द्वारा निर्मित होती है तथा भ्रूण की एंडो थिलीयल परत सीधे मात्र रक्त में घुसी रहती है अर्थात शिशु भ्रूण की रक्त वाहिनीयां मातृ रक्त में सीधे जुड़ी रहती है।
 अपरा की तीन परतें होती है-  कोरियोनिक एपिथीलियम,  भ्रूण संयोजी ऊतक ,तथा पूर्व रक्त वाहिनीयों की एंडोथीलीयम।

पाठ – 4   
जनन स्वास्थ्य 

प्रश्न 1.  क्या विद्यालयों में योन शिक्षा आवश्यक है? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर-  विद्यालयों  मैं छात्र-छात्राएं  योवनावस्था को प्राप्त करने के करीब होते हैं आत: यौन शिक्षा को आवश्यक करने से युवाओं को योन संबंधी सही जानकारी मिलेगी तथा वे योन संबंधी विभिन्न पहलुओं के बारे में फैली भ्रांतियों पर विश्वास नहीं करेंगे तथा गलत धारणा उसे छुटकारा मिलेगा।
प्रश्न 2.  यौन संचारित रोग क्या है? गोनोरिया , सिफलिस तथा एड्स के रोगाणुओं के नाम लिखिये ।
उत्तर- वह रोग संक्रमण जो मैथुन द्वारा  संचारित होते हैं सामूहिक रूप से योन संचारित रोग कहलाते है । इन्हें रतिज रोग अथवा जनन मार्ग संक्रमण भी कहा जाता है।
1. गोनोरिया –  नाइसेरिया गोनोरी ( जीवाणु )
2. सिफलिस – ट्रेपोनिमा पैलेडिम
3. एड्स – ह्यूमन इम्योनो वायरस
प्रश्न 3. किसी व्यक्ति को यौन संचारित रोगों के सम्पर्क में आने से बचने के लिये कोनसे उपाय अपनाने चाहिए?
उत्तर- 1. एक से अधिक या बहुत से व्यक्तियों से यौन संबंध न रखना।
2. सुरक्षित यौन संबंध स्थापित करना जैसे कॉन्डोम का उपयोग करना। 
3. शंका की स्थिति में समुचित जांच एवं सही चिकित्सकीय उपचार करना ।
प्रश्न 4. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिये-
1.  जिफ्ट   2. गिफ्ट  3.  MTP

उत्तर-  1. जिफ्ट (जाइगोट  इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर)-  
यह एक प्रकार के इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक का रूपांतरित रूप है जिसमें निषेचित अंडाणु को भ्रूण की प्रारंभिक अवस्था में महिला के फैलोपियन ट्यूब में स्थानांतरित किया जाता है यह गिफ्ट से बेहतरीन तरीका है।
2.  गिफ्ट(गेमीटी इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर) – 
ऐसे मामले में जहां स्त्रियां अंडाणु उत्पन्न नहीं कर सकती लेकिन फर्टिलाइजेशन और भ्रूण के परिवर्तन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करने में सक्षम है उनके लिए गिफ्ट तकनीक अपनाई जाती है । इसमें दाता से अंडाणु लेकर उन स्त्रियों की फैलोपियन ट्यूब में पुरुष के स्पर्म के साथ ट्रांसफर कर दिया जाता है यह है एक सहायक जनन प्रौद्योगिकी कहलाती है।
3. MTP( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी)- 
इसे  चिकित्सकीय सगर्भता समापन कहते हैं । यह वह चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत गर्भावस्था पूर्ण होने के पहले स्वैच्छिक रूप से गर्व के समापन को मूर्त रूप दिया जाता है । भारत सरकार ने 1971 ईस्वी में चिकित्सकीय सगर्भता  समापन को कानूनी रूप दे दिया है जिससे इस तकनीक का नाजायज प्रयोग ना हो सके।
प्रश्न 5. एमनियो सेंटेसिस एक घातक लिंग निर्धारण प्रक्रिया है जो  हमारे देश में निषेधित है। क्या यह आवश्यक होना चाहिये?
उत्तर- एमनियो सेंटेंसेस एक तकनीक है जो गर्भस्थ शिशु की कोशिकाएं, एमनियोटिक द्रव से निकाल कर उसके गुण सूत्रीय विश्लेषण का अवसर प्रदान करता है इस गुणसूत्र के विश्लेषण का एक घातक एवं खतरनाक पहलू है गर्भस्थ शिशु के लिंग परीक्षण की सुविधा होना। यह ऐसे रूढ़िवादी माता पिता करवाते  है जो सदैव बेटे की इच्छा रखते हैं। यह तकनीक पैसे कमाने की हवश वाले कुछ क्लीनिक एवं डॉक्टर्स के हाथ में एक घातक हथियार की तरह है इसका फल यह हुआ है कि एलिफेंटाइसिस तकनीक का सदुपयोग से कई गुना दुरुपयोग हुआ है मादा भ्रूण हत्या इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जो आधुनिक समाज में सबसे बड़ी सामाजिक बुराई है इन्हीं सब खतरों को देखते हुए लिंग परीक्षण को हमारे देश में निश्चित कर दिया है इस संबंध में कानून व्यवस्था  भी की गई है ।चिकित्सकीय संघर्ष का समापन एक्ट 1971 जिसे 2002 में संशोधित किया गया था। जन्म पूर्व जांच तकनीक एक्ट 1994 इसी भी 2002 में संशोधित किया गया है। 
जहां पहला कानून कुछ आवश्यक एवं अनिवार्य परिस्थितियों के अलावा गर्भपात को निशेधित करता है वही दूसरा कानून गर्भपात के उद्देश्य से पूर्ण लिंग परीक्षण को निषेधित करता है ।उपरोक्त कानून उपबंध होना बेहद जरूरी है इस दिशा में कानून प्रवर्तन अधिकारी को मजबूत करने की आवश्यकता है जिससे दोषियों को यथाशीघ्र उचित दंड दिलाया जा सके।
NOTE- दोस्तों आशा करते हैं आप सभी को हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो किस पोस्ट में उपलब्ध सभी क्वेश्चन आपके आप की परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण इन सभी प्रश्नों की आप अच्छे से तैयारी करे और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।



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