MP board 12th इतिहास वार्षिक पेपर 2022 Solution [IMP/Q]

MP board class 12th History paper important solution 2022― Mp board द्वारा कुछ आंशिक परिवर्तनों के साथ परीक्षा की जो रणनीति तैयार की गई है उसके चलते सभी स्टूडेंट की उलझने बढ़ गई हैं अब किस प्रकार से तैयारी की जाए कितना syllebus पूछा जायगा और पेपर किस प्रकार का  आयेगा। ऐसे ही प्रश्नों में स्टूडेंट उलझे हुए हैं तो दोस्तों यहां आपको आपकी परीक्षाओं से जुड़ी सभी उलझनों का हल मिल जाएगा । यदि आप अपनी परीक्षाओं की तैयारी के लिए important solution पाना चाहते हैं तो वह भी आपको यहां मिल जाएगा ।

आज की इस पोस्ट में हम आपको history class 12th के important solution लाये हैं जिसके तहत आज हम आपको chapter― 15  संविधान का निर्माण : एक नये युग की शरुआत का important solution उपलब्ध कर रहे हैं। हम अपनी पिछले आर्टिकल्स में blueprint तथा reduce syllabus के बारे में विस्तृत जानकारी दे चुके हैं।यदि आपने अभी तक  blueprint तथा reduce syllabus सम्बन्धी जानकारी प्राप्त नहीं कि है तो नीचे दी गई लिंक पर जाकर आप हमारी पिछली पोस्ट को विजिट कर सकते हैं।

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MP board 12th इतिहास वार्षिक पेपर 2022 Chapter -15 important questions solution 2022 

Chapter 1 में से आपकी परीक्षा के प्रश्नपत्र में 2 प्रश्न 2-2 अंक के पूछे जायगे। साथ ही दो वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी पूछे जाएँगे अर्थात chapter 15 से आपको पूरे 6 अंक मिल सकते हैं।

 

परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिए आप आज से ही तैयारी आरम्भ कर दे ऐसा करने से exam के समय में आप पर अधिक दबाब नहीं होगा और आप शांत मन से परीक्षा दे पाएंगे जिसके लिए हम आपको class 12th के सभी विषयों के important solution उपलब्ध कर रहे हैं जिससे आप अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं।

 

इतिहास
Chapter ― 15
संविधान का निर्माण : एक नये युग की शुरुआत

प्रश्न 1. संविधान सभा के गठन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर-संविधान सभा कैबिनेट मिशन योजना के आधार पर गठित की गई। जुलाई में संविधान सभा के चुनाव हुए, जिसमें 296 सदस्यों के ही चुनाव हुए किन्तु भारतीय 1946 रियासतों के 93 सीटों के लिए चुनाव नहीं हुए। इस चुनाव में काँग्रेस के 208 तथा मुस्लिम लोग के 73 सदस्य चुने गए। शेष अन्य दलों के चुने गये। इसका स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को बनाया गया और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आम्बेदकर बनाए गये। प्रारूप समिति के कुछ सदस्य भी नियुक्त किए गये।

 

प्रश्न 2. पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर-(1) भारत को सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने का निश्चय किया गया।

(2) भारत के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति तथा धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता प्रदान की जाएगी।

 

प्रश्न 3. संविधान सभा के सदस्य एन. जी. रंगा द्वारा अल्पसंख्यकों की अवधारणा को किस तरह परिभाषित किया है ?

उत्तर-अल्पसंख्यक कौन हैं ? तथाकथित पाकिस्तानी प्रान्तों में रहने वाले हिन्दू, सिक्ख और यहाँ तक मुसलमान भी अल्पसंख्यक नहीं हैं। असली अल्पसंख्यक तो देश की जनता है। वह जनता इतनी दबी-कुचली और उत्पीड़ित है कि अभी तक साधारण नागरिक के अधिकारों का लाभ भी नहीं उठा पा रही है। आदिवासियों से जमीनें छीनी जा रही हैं। व्यापारी उनको अपने शोषण का शिकार बना रहे हैं और उनको गुलाम बना रहे हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी दासता के नर्क में ढकेल देते हैं। गाँव वालों को सूदखोर जमींदार लूट रहे हैं। असली अल्पसंख्यक वही गरीब लोग हैं।

 

 

प्रश्न 4. पं. जवाहरलाल नेहरू ने लोकतन्त्र की अवधारणा में परिवर्तन को जरूरी क्यों माना?

उत्तर-नेहरू जी ने पश्चिमी लोकतंत्र की अवधारणा का विरोध किया और उसमें परिवर्तन को आवश्यक माना। उन्होंने कहा कि हम पश्चिम की नकल नहीं करेंगे। भारत में शासन की जो व्यवस्था स्थापित हो वह हमारे लोगों के स्वभाव के अनुरूप और उनको स्वीकार्य होनी चाहिए। पश्चिम से वहाँ की उपलब्धियों और विफलताओं से सबक लेना जरूरी तो है किन्तु हमें याद रखना चाहिए कि पश्चिमी समाज को भी अन्य स्थानों पर हुए प्रयोगों से बहुत कुछ सीखना पड़ा था और लोकतन्त्र की अवधारणा बदलनी पड़ी थी।

 

प्रश्न 5. राष्ट्रीय भाषा की क्या विशेषताएँ होनी चाहिए ?

उत्तर-महात्मा गाँधी ने राष्ट्रभाषा की निम्न विशेषताएँ बताई थीं-

(1) राष्ट्र भाषा हिन्दुस्तानी भाषा होनी चाहिए। वह न तो संस्कृतनिष्ठ हिन्दी होनी चाहिए और न ही फारसी निष्ठ उर्दू । यह दोनों का सुन्दर मिश्रण होनी चाहिए।

(2) उसे विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं से शब्द खुलकर उधार लेने चाहिए।

(3) विदेशी भाषाओं के ऐसे शब्द लेने में कोई हर्ज नहीं जो हमारी राष्ट्रीय भाषा में अच्छी तरह और आसानी से घुल-मिल सकते हैं।

प्रश्न 6. संविधान सभा का क्या अर्थ है ?

उत्तर-संविधान-सभा का अर्थ-संविधान सभा एक ऐसी निर्वाचित संस्था को कहा जाता है जिसको संविधान निर्माण का काम सौंपा गया हो अर्थात् संविधान सभा का आशय किसी देश के लिये संविधान का निर्माण करने वाली सभा से लगाया जाता है। संविधान सभा की परिभाषा एनसाइक्लोपीडिया ऑफ सोसल साइंसेज ने निम्न प्रकार की है-

‘यह एक ऐसी प्रतिनिधि संस्था होती है जिसे नवीन संविधान पर विचार करने और अपनाने या विद्यमान संविधान में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन करने के लिये चुना जाए।”

 

प्रश्न 7. आदिवासियों के विषय में संविधान सभा में उठाई गई समस्याओं की व्याख्या कीजिए। वे उनके लिए क्या चाहते थे ?

उत्तर-संविधान सभा में आदिवासियों की समस्याओं को मुख्य रूप से एन. जी. रंगा तथा जयपाल सिंह ने उठाया। एन. जी. रंगा ने उन्हें दबी-कुचली जनता बताया। उनकी निम्नलिखित समस्याओं पर प्रकाश डाला गया-

(1) उन्हें वहाँ से बेदखल कर दिया गया जहाँ वे रहते थे।

(2) उन्हें उनके जंगलों और चरागाहों से वंचित कर दिया गया।

(3) उन्हें नए घरों की तलाश में भागने के लिए विवश किया गया।

(4) उन्हें आदिम और पिछड़ा मानते हुए शेष समाज उन्हें हीनता की नजर से देखता है।

 

प्रश्न 8. “अंग्रेज तो चले गए, किन्तु जाते-जाते शरारत के बीज बो गए।” यह किसने और क्यों कहा?

उत्तर-सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि अंग्रेज तो चले गए लेकिन जाते-जाते शरारत का बीज बो गए। उन्होंने कहा कि हम पृथक् निर्वाचिका की माँग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारे लिए यही अच्छा है परन्तु यह कहना पूर्णतः सही नहीं होगा। पटेल ने कहा है कि हम सालों से यह सुन रहे हैं और इसी आन्दोलन के कारण अब हम एक विभाजित राष्ट्र हैं।

 

 

प्रश्न 9. जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव पर अपने भाषण में कौन-से विचार पेश किये?

उत्तर-13 दिसम्बर, 1946 में जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया। इसमें स्वतन्त्र भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत  की गई। इसमें भारत को एक ‘स्वतन्त्र सम्प्रभु गणराज्य’ घोषित किया गया, नागरिकों को न्याय, समानता व स्वतन्त्रता का आश्वासन दिया गया था और यह वचन दिया गया था कि, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों व जनजातीय क्षेत्रों एवं दमित व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त रक्षात्मक प्रावधान किए जाएंगे।’ नेहरूजी ने स्पष्ट कहा कि भारतीय संविधान का उद्देश्य यह होगा कि लोकतंत्र के उदारवादी विचारों और आर्थिक न्याय के समाजवादी विचारों का एक-दूसरे में समावेश किया जाए और भारतीय संदर्भ में इन विचारों की रचनात्मक व्याख्या की जाए। नेहरू इस बात पर जोर दे रहे थे कि भारत के लिए क्या उचित है-इस बारे में हमें रचनात्मक ढंग से सोचना चाहिए।

 

प्रश्न 10. एक शक्तिशाली केन्द्र सरकार की हिमायत में क्या दलीलें दी जा रही

उत्तर-(1) देश में अराजकता, उपद्रव, आदि पर नियन्त्रण लगाने के लिए एक शक्तिशाली केन्द्र की आवश्यकता है।

(2) देश की अखण्डता तथा एकता की रक्षा हेतु एक शक्तिशाली केन्द्र आवश्यक है।

(3) राष्ट्र की सुरक्षा शक्तिशाली केन्द्र ही कर सकता है।

(4) देश के विकास के लिए एक शक्तिशाली केन्द्र की आवश्यकता है।

प्रश्न 11. महात्मा गाँधी को ऐसा क्यों लगता था कि हिन्दुस्तानी राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए?

उत्तर-महात्मा गाँधी का मानना था कि हिन्दुस्तानी राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए। गाँधीजी कहते थे कि प्रत्येक को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए, जिसे लोग आसानी से समझ सकें। हिन्दी और उर्दू के मेल से बनी हिन्दुस्तानी भारतीय जनता के बहुत बड़े हिस्से की भाषा थी और यह विविध संस्कृतियों के आदान-प्रदान से समृद्ध हुई एक साझी भाषा थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, बहुत तरह के स्रोतों से नए-नए शब्द और अर्थ इसमें समाते गए और उसे विभिन्न क्षेत्रों बहुत सारे लोग समझने लगे। महात्मा गाँधी को लगता था कि यह बहु सांस्कृतिक भाषा विविध समुदायों के बीच संचार की आदर्श भाषा हो सकती है। वह हिन्दुओं और मुसलमानों को, उत्तर तथा दक्षिण के लोगों को एकजुट कर सकती है। इसलिए हिन्दुस्तानी भाषा ही राष्ट्र भाषा होनी चाहिए।

 प्रश्न 12. नीति निदेशक तत्व किसे कहते हैं ? यह किस देश के संविधान  से प्रेरित हैं?

उत्तर- संविधान में राज्यों को नीति के अनुसार चलाने के लिए नीति निदेशक तत्व अर्थात नीति का पालन करने हेतु निर्देश वर्णित किए गए हैं यह नीति निदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं तथा यह मुख्यता गांधीवादी आदर्शों और नेहरू के लोक कल्याणकारी राज्य समाजवादी समाज के विचारों पर आधारित है।

 

दोस्तों हमारी पोस्ट को पूरा  पढ़कर अपनी तैयारी बनाये और बेहतर साथ ही इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करे तथा सभी solution पाने के लिए हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहें।हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद……

 

 

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