राजनीति विज्ञान कक्षा 12 अंतर्राष्ट्रीय संगठन के प्रश्न उत्तर (NCERT Solutions for Class 12 Political Science chapter – 6)

राजनीति विज्ञान कक्षा 12 अंतर्राष्ट्रीय संगठन के प्रश्न उत्तर (NCERT Solutions for Class 12 Political Science chapter – 6)

NCERT Solutions :- दोस्तों  class 12th के प्रत्येक संकाय के सभी विषयों के important solution यहां उपलब्ध हैं यदि आप भी अपनी अच्छी तैयारी के लिए important solution की तलाश कर रहे हैं तो अभी आप बिलकुल सही जगह पर हैं यहाँ पर आपको सभी विषयों का important solution उपलब्ध कराया जायेगा तो हमारी इस वेबसाइट studygro.Com पर बने रहिए। आज की इस पोस्ट में आपको class 12th की politics (राजनीति) के chapter -6 का  important solution उपलब्ध कराया गया है इससे पहले के सभी अध्यायों का important solution हम अपनी पिछली पोस्ट में दे चुके हैं जिनकी लिंक आपको नीचे दी गई है आप वहाँ जाकर उन्हें विजिट कर सकते हैं।

Important solution politics (राजनीति) chapter – 5 समकालीन दक्षिण एशिया class 12th

Half yearly exam important solution class. 12th politics (राजनीति) 2021 – 22

राजनीत 
खण्ड (अ)
समकालीन विश्व राजनीति
Chapter ― 6
अंतर्राष्ट्रीय संगठन

प्रश्न 1. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों का चुनाव किसके द्वारा तथा कितनी समयावधि हेतु किया जाता है?

उत्तर-सुरक्षा परिषद् तथा महासभा द्वारा नौ वर्ष की समयावधि हेतु किया जाता है।

प्रश्न 2. संयुक्त राष्ट्र को विश्वव्यापी बनाने में भारत का क्या योगदान रहा है?

उत्तर- भारत ने सदैव यह प्रयास किया है कि विश्व के सभी राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य बने। जिससे यह संगठन विश्वव्यापी बने।

प्रश्न 3. विश्व बैंक के कोई दो कार्य लिखिए।

उत्तर-(1) उत्पादकता के स्तर को बढ़ाना, (2) सदस्य देशों को ऋण देना।

प्रश्न 4. विश्व बैंक के वर्तमान अध्यक्ष का नाम लिखिए।

उत्तर-डॉ. जिम योंग किम (दक्षिण कोरिया)।

प्रश्न 5. अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कोई दो उद्देश्य लिखिए।

उत्तर-(1) सदस्य देशों में मुद्रा नीति सम्बन्धी सहयोग स्थापित करना तथा (2) विनिमय दरों में स्थायित्व लाना।

प्रश्न 6. सुरक्षा परिषद के कार्य लिखिए।

उत्तर (1) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति का प्रयास-सयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 24 के अनुसार सुरक्षा परिषद् का प्रमुख कार्य अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बनाए रखना है। इसी अनुच्छेद में वह भी उल्लेख किया गया है कि सदस्य देश सुरक्षा परिषद के फैसलों को मानने हेतु वचनबद्ध चार्टर की अवहेलना अथवा शान्ति भंग करने पर सुरक्षा परिषद् सदस्य देश के प्रति उचित कदम उठा सकते हैं। सर्वप्रथम वह समझौते का प्रयास करती है, इसमें असफल होने पर वह सशस्त्र सेनाओं का प्रयोग कर सकती है।

(2) शान्ति भंग की परिस्थिति को टालना-सुरक्षा परिषद् का एक कार्य शान्ति भंग होने के खतरे को टालना भी है। शान्ति भंग होने पर वह झगड़ों का निराकरण पंचायत न्यायालय, आपसी वार्ता, जाँच तथा मध्यस्थता इत्यादि द्वारा करती है। सुरक्षा परिषद् अनेक सुझाव देकर मतभेदों को दूर कराने का प्रयास करती है।

(3) स्व-निर्णयों का क्रियान्वयन-अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा के सम्बन्ध में सुरक्षा परिषद् जो भी फैसला करती है, उसको क्रियान्वित करना उसी का उत्तरदायित्व है। विभिन्न राष्ट्रों को इस सन्दर्भ में कोई फैसला करने की जरूरत नहीं होती है।

(4) झगड़ों की छानबीन एवं जाँच-पड़ताल करना-सुरक्षा परिषद् शान्ति एवं सुरक्षा के भंग होने की सम्भावना पर झगड़ों की छानबीन तथा जाँच पड़ताल करती है। इस सम्बन्ध में वह महासचिव की मदद भी ले सकती है। इसकी रिपोर्ट वह महासभा को भेज सकती है।

(5) कार्य योजना बनाना-सुरक्षा परिषद् जो भी काम करती है, उसकी योजना बनाना उसी का काम है। इसके साथ ही वह उन योजनाओं को क्रियान्वित भी करती है।

(6) अन्य कार्य-नवीन सदस्यों को संघ में प्रवेश देने का काम भी सुरक्षा परिषद् ही करती है। इसी तरह वह अपनी वार्षिक रिपोर्ट महासभा को भेजने का कार्य भी क्रियान्वित करती है।

प्रश्न 7. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।

उत्तर-संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य निम्न प्रकार हैं-

(1) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा की व्यवस्था करना।

(2) अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को शान्तिपूर्ण तरीकों से परस्पर वार्ताओं द्वारा हल करना।

(3) सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा मानवीय क्षेत्रों में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन प्रदान करना।

(4) उपर्युक्त उद्देश्यों की सिद्धि के लिए विभिन्न देशों के लिए प्रयासों में सामंजस्य स्थापित करना।

प्रश्न 8. न्यास परिषद् के प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर-न्यास परिषद् के प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं-

(1) न्यास क्षेत्रों की प्रशासनिक इकाइयों द्वारा प्रेषित प्रतिवेदनों पर विचार विमर्श करना।

(2) न्यास क्षेत्रवासियों द्वारा दिए गए आवेदन पत्रों पर प्रशासनिक इकाइयों द्वारा व्यक्त प्रतिक्रिया के सन्दर्भ में विचार विमर्श करना।

(3) प्रशासकीय इकाई के परामर्श पर न्यास क्षेत्रों की यात्रा करना, तथा

(4) न्यासधारिता समझौते में उल्लेख की गई शर्तों के अनुपालन में अन्य कार्य क्रियान्वित करना।

प्रश्न 9. संयुक्त राष्ट्र संघ की वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति क्या है ?

उत्तर-वीटो का आशय निषेधात्मक वोट है। सुरक्षा परिषद् के प्रत्येक स्थायी सदस्य को निषेधात्मक मत हासिल है। किसी भी स्थायी सदस्य के द्वारा इसका प्रयोग करने पर कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सकता है। अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि सुरक्षा परिषद्के  प्रत्येक सदस्य देश का एक वोट होता है। प्रक्रिया सम्बन्धी मामलों में फैसले हेतु 15 में सदस्यों द्वारा सकारात्मक मतदान करना जरूरी होता है। प्रमुख मामलों में भी 9 वोट का निर्णय के पक्ष में पड़ना परमावश्यक होता है। इसके साथ ही पाँचों सदस्यों की सहमति भी जरी होती है। इन पाँचों सदस्यों की सहमति को महान् शक्तियों की आम सहमति’ तथा वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति के रूप में जाना जाता है। 18 फरवरी, 2011 को सुरक्षा परिषद् में इजराइल के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को अमेरिका द्वारा वीटो कर दिया गया। अर्थात् फिलीस्तीन भू-भाग पर बसाई गई इजरायली बस्तियों को अवैध घोषित करने की माँग को खारिज कर दिया गया।

प्रश्न 10. संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के चार योगदानों को लिखिए।

उत्तर-संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के चार प्रमुख योगदान निम्नवत् हैं-

(1) सयुक्त राष्ट्र संघ को व्यापक संगठन बनाने में भारत का उल्लेखनीय योगदान रहा है।

(2) सुरक्षा परिषद् के लोकतन्त्रीकरण में भारत ने उल्लेखनीय भूमिका का निर्वहन किया है।

(3) संयुक्त राष्ट्र संघ के कोष में अंशदान का भुगतान किया गया है।

(4) संयुक्त राष्ट्र संघ में अनेक भारतीय समय-समय पर विविध पदों पर कार्यरत् रहे हैं।

प्रश्न 11. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के किन्हीं तीन कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के प्रमुख तीन कार्य निम्न प्रकार हैं-

(1) परामर्श सम्बन्धी क्षेत्राधिकार-अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय महासभा, सुरक्षा परिषद्त था अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा सौंपे गए प्रश्नों पर अपना परामर्श देने का कार्य करता है।

(2) विभिन्न विवादों की सुनवाई करना-अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय प्रस्तुत विवादों की सुनवाई करता है। इस न्यायालय के सम्मुख सिर्फ देश ही प्रतिवादी तथा वादी बनकर आ सकते हैं। चार्टर में दिए गए विषय, समझौतों एवं संधियों को भी इस न्यायालय के सुपुर्द किया जा सकता है।

(3) ऐच्छिक क्षेत्राधिकार-अधिकांशतया अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का क्षेत्राधिकार ऐच्छिक होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 36 में यह प्रावधान है कि न्यायालय के समक्ष तभी कोई विवाद आता है जबकि विवाद से सम्बन्धित दोनों पक्ष अपनी सहमति दे चुके हों। एक पक्ष की इच्छा पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय कोई विवाद नहीं सुनता है। वहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले बहुमत से होते हैं।

प्रश्न 12. विश्व में शान्ति की स्थापना में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों में भारत के योगदान पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

अथवा

अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति प्रयासों में भारतीय योगदान को लिखिए।

उत्तर-विश्व में शान्ति स्थापना हेतु संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों में भारत का निम्नलिखित योगदान रहा है-

(1) कोरिया में शान्ति स्थापना में सहयोग,

(2) इण्डो-चीन की समस्या का समाधान,

(3) कांगो में शान्ति स्थापना का प्रयास,

(4) मिस्र की समस्या का समाधान, तथा

(5) नि:शस्त्रीकरण के प्रयासों में योगदान।

Note – दोस्तों हमारी पोस्ट को पूरा  पढ़कर अपनी तैयारी बनाये और बेहतर साथ ही इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करे तथा सभी solution पाने के लिए हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहें। हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद……

#Class 12 Political Science, #NCERT Solutions for Class 12 Political Science, #ncert

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here