कक्षा 9 हिंदी अर्धवार्षिक पेपर 2021-22 के लिए Solution PDF

कक्षा 9 हिंदी अर्धवार्षिक पेपर 2021-22 के लिए Solution PDF

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विषय- हिन्दी

क्षितिज

पाठ – 1 
दो बैलों की जोड़ी

प्रश्न 1-  गधे के विषय में लेखक किस अनिश्चय की स्थिति में है और क्यों?

उत्तर – गधे के विषय में लेखक की अनिश्चयपूर्ण स्थिति इसलिए है क्योंकि अत्यधिक मूर्ख को मूर्ख न कहकर गधा कहा जाता है। क्या गधा सचमुच ही इतना बेवकूफ़ होता है कि निपट मूर्ख को गधा कह दिया जाता है या गधे के सीधेपन के कारण उसे ऐसा कहा जाने लगा।

प्रश्न 2- गाय और कुत्ता गधे से किस तरह भिन्न है?

उत्तर – गाय और कुत्ता दोनों की ही गणना सीधे-सादे पशुओं में की जाती है। पर ब्याई गाय के बच्चे को जैसे ही कोई छूता है, वह उसे मारने के लिए सींग उठा देती है। इसी प्रकार कुत्ता भी क्रोधित होने पर आदमी को काट खाता है। इसके विपरीत गधा विरोध किए बिना सब कुछ सहता जाता है और कभी क्रोधित नहीं होता है। इस तरह गाय और कुत्ता गधे से सहनशीलता के मामले में भिन्न हैं।

प्रश्न 3- हीरा और मोती की ठठरियाँ क्यों निकल आई थी?

उत्तर – हीरा और मोती एक सप्ताह एक कांजीहौस में बंधे रहे। उन्हें वहाँ कुछ भी खाने के लिए नहीं दिया जाता था। पूरे दिन में मात्र एक बार पानी पिलाया जाता। इस दुर्दशा के परिणामस्वरूप उनकी ठठरियाँ निकल आई थीं।

प्रश्न 4- बैल अपना असंतोष किस प्रकार व्यक्त करता है?

उत्तर – बैल अपना असंतोष अपने मालिक पर सींग उठाकर या उसका काम न करके प्रकट करता है। इसके अलावा वह कई अन्य तरीके से भी अपना असंतोष प्रकट करता है।

प्रश्न 5- मनुष्य किस गुप्त शक्ति से वंचित हैं?

उत्तर – मनुष्य बिना बात-चीत किए एक-दूसरे के मन के भाव-विचार नहीं जान सकता है। वह इस गुप्त शक्ति से वंचित है।

प्रश्न 6. छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?

उत्तर– छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम उमड़ने के निम्नलिखित कारण हैं –

(i) छोटी बच्ची को उसकी सौतेली माँ सताती थी, यहाँ गया हीरा-मोती पर अत्याचार कर रहा था।

(ii) छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। उसे अपनों से बिछड़ने के दुख का ज्ञान था।

(iii) छोटी बच्ची माँ के मरने को अपनादुर्भाग्य मानती थी। वह हीरा-मोती को उनका घर छूटने के कारण अपने जैसा ही अभागा समझती थी।

(iv) छोटी बच्ची छल-प्रपंच से अभी दूर थी। उसका निश्छल मन हीरा-मोती पर अत्याचार देख द्रवित हो गया और प्रेम उमड़ आया।

पाठ ― 2
ल्हासा की ओर
राहुल सांकृत्यायन

प्रश्न 1. तिब्बत में यात्रियों के लिए क्या-क्या सुविधाजनक बातें हैं?

उत्तर – तिब्बत में यात्रियों के लिए अनेक सुविधाजनक बातें हैं

(i) वहाँ यात्री घरों के भीतर तक जा सकते हैं।

(ii) तिब्बती स्त्रियाँ अनजान यात्रियों को भी चाय बनाकर दे देती हैं।

प्रश्न 2. तिब्बती लोग किनको घर के अन्दर नहीं आने देते हैं?

उत्तर-तिब्बती लोग भिखमंगों को चोरी के डर से घर के भीतर नहीं आने देते हैं।

प्रश्न 3.  नेपाल से तिब्बत का मुख्य मार्ग सैन्य-दृष्टि से किस तरह महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर – नेपाल से तिब्बत तक जाने वाला यह मार्ग किसी समय सैनिक रास्ता भी हुआ करता था। इस मार्ग पर जगह-जगह फ़ौजी चौकियाँ और किले बने हुए हैं। इन चौकियों और किलों में कभी चीनी सेना रहा करती थी। इस प्रकार सैन्य-दृष्टि से यह मुख्य मार्ग अपना विशेष महत्त्व रखता था।

प्रश्न 4  तिब्बत में लोग डाकुओं से अपनी सुरक्षा के लिए क्या करते हैं?

उत्तर-तिब्बत में लोग डाकुओं से अपनी सुरक्षा के लिएबहथियार लेकर चलते हैं एवं सदा सतर्क रहते हैं।

प्रश्न 5 लेखक ने अपनी यह यात्रा भिखारियों के भेश में क्यों की?

उत्तर- लेखक ने अपनी यात्रा भिखारियों  वेश में इसलिए

की क्योंकि इससे वे डाकुओं की लूटमार और हिंसा का शिकार

होने से बच सके।

प्रश्न 6. लेखक लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गया?

उत्तर लेखक लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से निम्नलिखित कारणों से पिछड़ गया –

(i) लेखक का घोड़ा धीरे-धीरे चल रहा था।

(ii) घोड़े के सुस्त पड़ने से लेखक अपने साथियों से बिछड़ गया और अकेले में रास्ता भूल गया।

(ii) वह गलत रास्ते पर डेढ़-दो मील चलता गया और फिर वापस आकर सही रास्ते पर गया।


प्रश्न 7. लेखक ने इस मार्ग पर क्या-क्या बदलाव देखा?

उत्तर – लेखक ने देखा कि इस मुख्य मार्ग पर चीनी सेना के रहने के लिए बने बहुत से फ़ौजी मकान गिर चुके हैं। किले के कुछ भागों में किसानों ने अपना घर बना लिया है, जिससे वहाँ आबादी बढ़ गई है। इस तरह वहाँ पर्याप्त बदलाव दिखाई दिया है।

पाठ ― 3
उपभोक्तावाद की संस्कृती
श्यामाचरण दुबे

प्रश्न 1. सुख की व्याख्या किस तरह से बदल गई है?

उत्तर – भारतीय संस्कृति में ऋणहीन संतोषी व्यक्ति को दुनिया का सबसे सुखी व्यक्ति माना जाता रहा है। किन्तु आज उस व्यक्ति को सुखी माना जाता है, जिसके पास भौतिकवादी वस्तुओं का संग्रह होता है। जीवन में संतोष शांति हो या न हो, इससे कोई मतलब नहीं रह गया है।

प्रश्न 2. सांस्कृतिक उपनिवेश क्या है? हम उसके शिकार किस तरह बन रहे हैं?

उत्तर – जब कोई सुविधा सम्पन्न देश दूसरे देश पर दबाव बनाते हुए अपनी जीवन-शैली सौंपता है और उस देश के लोग उस जीवन-शैली को अपनाते हुए अपनी स्वयं की जीवन-शैली भूल जाते हैं, तब वह देश उस दबाव बनाने वाले देश का सांस्कृतिक उपनिवेश कहलाता है। हम पाश्चात्य जीवन-शैली अपनाकर उसके शिकार बन रहे हैं।

प्रश्न 3. बौद्धिक दासता किसे कहा गया है? इसका शिकार कौन हो रहा है?

उत्तर – बौद्धिक दासता का आशय है – मस्तिष्क या सोचने-विचारने की अपनी शक्ति खो देना और सही-गलत का विचार किए बिना दूसरे की सोच को सही मान लेना। हम भारतीय आज पश्चिमी देशों की बौद्धिक दासता का शिकार हो रहे हैं।


प्रश्न -4.  ‘सांस्कृतिक अस्मिता’ से आप क्या समझते हैं ? उसका ह्रास क्यों हो रहा है?

 उत्तर – ‘सांस्कृतिक अस्मिता’ से आशय हमारी सांस्कृतिक पहचान से है अर्थात् हमारी वे विशेषताएँ, जो हमें जान-पहचान दिलाती हैं और जिनके आधार पर हम जाने-पहचाने जाते हैं। हमारा पहनावा, हमारा खान-पान, हमारा दायित्व एवं सत्कार आदि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के अंग हैं। इनका ह्रास इसलिए हो रहा है क्योंकि उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव के कारण हम अपनी पहचान खोते जा रहे हैं।

प्रश्न 5. व्यक्ति केन्द्रकता बढ़ने का आशय क्या है? इसके बजाय लेखक क्या चाहता है?

उत्तर– ‘व्यक्ति केन्द्रकता’ का अर्थ है – अपने तक सिमट जाना, केवल अपने बारे में सोचना तथा दूसरों के सुख-दुख से उदासीन बने रहना। इसके बजाय लेखक चाहता है कि लोगों के बीच सामाजिकता, भाई-चारा, परोपकार जैसे मूल्यों का प्रचार- प्रसार हो।

प्रश्न 6. उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे लिए किस प्रकार बड़ा खतरा है?

उत्तर – उपभोक्तावादी संस्कृति हमारी सामाजिक संरचना की नीव के लिए खतरा बन गई है, क्योंकि इसके प्रभाव के कारण मनुष्य आत्मकेन्द्रित होता जा रहा है। वह सामाजिक सरोकारों को भूल रहा है। इस संस्कृति के कारण हमारी मर्यादाएँ छिन्न-भिन्न हो रही हैं तथा सामाजिक समरसता में कमी आई है।

प्रश्न 7. बुनियाद पर कायम रहने’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘बुनियाद पर कायम रहने’ का आशय है – हम अपनी संस्कृति की अच्छाइयों को अपनाएँ तथा अपनी संस्कृति को आधार मानकर अन्य संस्कृति के गुणों को अपनाने का प्रयास करें।

प्रश्न 8. आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?

अथवा

उपभोक्तावादी संस्कृति के क्या दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं?

अथवा

उपभोक्तावादी संस्कृति से हमें क्या नुकसान हुए हैं?

उत्तर – आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे जीवन को निम्न प्रकार से प्रभावित कर रही है-

(i) आज हम अपने खाने-पीने और पहनने के लिए उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं, जिनका विज्ञापन नित्य प्रति देखते हैं।

(ii) हम पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं।

(iii) उपभोक्तावादी संस्कृति से समाज में वर्गों के बीच दूरी बढ़ रही है।

(iv) सामाजिक सरोकार कम होते जा रहे हैं। इससे व्यक्ति केन्द्रता बढ़ रही है।

(v) नैतिक मापदण्ड तथा मर्यादाएँ कमजोर पड़ती जा रही हैं।

(vi) स्वार्थ की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है।

(vii) इस संस्कृति से भोग की आकांक्षाएँ आसमान छू रही हैं। इससे हमारी सांस्कृतिक नींव हिल रही है।

प्रश्न 9. प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यापद ही क्यों न हों।

उत्तर – उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाववश हम अंधानुकरण में कई ऐसी चीजें अपना लेते हैं, जो अत्यंत हास्यापद हैं; जैसे अमेरिका में लोग मृत्युपूर्व ही अंतिम क्रियाओं का प्रबंध कर लेते हैं। वे ज्यादा धन देकर हरी घास तथा संगीतमय फव्वारे की चाहत प्रकट कर देते हैं। भारतीय संस्कृति में ऐसे अंधानुकरण की हँसी उड़ना ही है।


पाठ ― 4
सांवले सपनों की याद
जाबिर हुसैन


प्रश्न 1. सालिम अली की तुलना किससे की गई है और क्यों?

उत्तर – सालिम अली की तुलना वन पक्षी से की गई है। क्योंकि वह भी उस वन पक्षी की तरह प्रकृति को विलीन हो रहे हैं जो अपनी ज़िन्दगी का आखिरी गीत गाने के बाद मौत की गोद में जा बसा हो।

प्रश्न 2. तहमीना कौन थी? उन्होंने क्या मदद पहुँचाई थी?

उत्तर – तहमीना उनकी जीवन साथी थी। उन्होंने प्रकृति प्रेम से भरी दुनिया को गढ़ने में सालिम अली को काफी मदद पहुँचाई थी।

प्रश्न 3. ‘क्षितिज’ शब्द का अर्थ लिखिए।

उत्तर– दृष्टि की पहुँच की अन्तिम सीमा पर वह गोलाकार स्थान जहाँ आकाश और पृथ्वी दोनों मिले हुए जान पड़ते हैं।

प्रश्न 4.  वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक जिन्दगीका प्रतिरूप बन गए थे।

उत्तर – सालिम अली भी लॉरेंस की भाँति प्रकृति प्रेमी थे। वे प्रकृति से इतना घुल-मिल गए थे कि उनका जीवन ही जैसे प्रकृतिमय हो गया था। वे प्राकृतिक जीवन का ही रूप बन गए थे।


प्रश्न 5. सालिम अली प्रकृति की दुनिया में टापू बनने की बजाय अथाह सागर बनकर उभरे थे।

उत्तर – सागर असीम होता है और उसकी गहराई की थाह पाना असंभव। जबकि टापू का छोटा आकार होता है। सालिम अली जैसा प्रकृति प्रेमी प्रकृति की दुनिया में इतना छोटा नहीं था कि उसे टापू माना जाए वह तो अथाह सागर या जिसकी गहराई नापी नहीं जा सकती।


प्रश्न 6. ‘साँवले सपनों की याद’ शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर – यह शीर्षक उपयुक्त है। सालिम अली वस्तुतः सपना ही थे ऐसा व्यक्ति जिसमें सपनों को खोजने की ललक थी।सालिम के संदर्भ में लेखक ने एक और साँवले का संदर्भ दिया है – आज भी वृंदावन में कृष्ण चरित्र को याद किया जाता है। यमुना का साँवला पानी उनकी याद दिलाता है। सालिम अली भी वैसे ही मिथक बन गए हैं। उनकी याद साँवले सपनों की याद ही है।

पाठ ― 5

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया
चपला देवी


प्रश्न 1. ‘हे’ कौन था?

उत्तर-‘हे’ अंग्रेज सेना का सेनापति था। उसे नाना के महल को लूटने और नष्ट करने का आदेश था।

प्रश्न 2. बालिकामैना ने सेनापति’हे’कोकौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया?

 उत्तर– बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को निम्न तर्क देकर – महल की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया – 

 1. अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वाले को आप सजा दीजिए।हुई

2. इस जड़ पदार्थ मकान ने अंग्रेजों का कुछ नहीं बिगाड़ा है।

3. उसके पिता का मकान होने के कारण यह मकान उसे अत्यन्त प्रिय है।

प्रश्न 3. सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव के क्या कारण थे?

उत्तर – मैना टामस ‘हे’ की पुत्री मेरी की सहेली थी। उन दोनों में गहरा प्रेम था। वह अक्सर मैना से मिलने आती थी। टामस हे भी उस महल में बेटी के साथ आता था और मैना को अपनी पुत्री जैसा प्यार करता था। इसलिए उसके मन में मैना के प्रति दया भाव जागा।


प्रश्न 4. बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर – बालिका मैना के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हम अपनाना चाहेंगे – 1. देश-प्रेम, 2. अपने माता-पिता तथा जन्म स्थान के प्रति प्रेम, 3. निर्भीकता, 4. वाक्पटुता, 5. साहसी, 6.स्पष्टवादिता। ये गुण व्यक्ति में राष्ट्र प्रेम एवं उत्सर्ग की भावना मजबूत बनाते हैं। इसलिए मैं उन्हें अपनाना चाहूँगा।

प्रश्न 5. स्वाधीनता आन्दोलन को आगे बढ़ाने में इस

प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी?

उत्तर– स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के क्रांतिकारी लेखन की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही होगी। इस प्रकार के लेखन से लोगों में अंग्रेजों के प्रति नफरत जमाने और आत्मसम्मानपूर्वक स्वतंत्र जीवन जीने की प्रेरणा दी जा सकती है। द्विवेदी युग में अनेक रचनाकारों ने इस प्रकार के लेखन से जन- जागृति का काम किया। वे चाहे स्वतंत्र रूप से आन्दोलन में नहीं कूद सके हो, पर उनके इस प्रकार के लेखन से अनेक प्रेरित हुए और आन्दोलन को बल मिला।

पद्य खंड

पाठ  – 9   
सखियां एवं सबद

प्रश्न 1. ‘मानसरोवर’ से कवि का क्या आशय है?

उत्तर – मानसरोवर से कवि का आशय मनरूपी पवित्र सरोवर से है जिसमें मनुष्य के मन में स्वच्छ विचार रूपी जल भरा है।

प्रश्न 2. इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है?

उत्तर – इस संसार में सच्चा संत वही कहलाता है जो लोभ, मोह-माया, अपने-पराए जाति-पाँति के बंधन एवं मत सम्प्रदाय से ऊपर उठकर भक्ति करते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य प्रभु की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 3. मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है?

उत्तर – मनुष्य ईश्वर को मन्दिर, मस्जिद, पूजा स्थल, काबा-काशी, योग-वैराग्य तथा अनेक प्रकार की धार्मिक क्रियाओं में ढूँढ़ता फिरता है।

प्रश्न 4. कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?

उत्तर – कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए निम्नलिखित प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है – 

देवालयों, मंदिरों में ईश्वर मिलता है, ईश्वर मस्जिद में उपासना करने से मिलता है, काबा (हज) करने तथा काशी-कैलाश की तीर्थ यात्रा करने से ईश्वर मिलता है, कर्मकांड या भिन्न- भिन्न उपासना पद्धतियों के पालन से ईश्वर मिलता है, योगी हो जाने या संन्यास ग्रहण करने से ईश्वर मिलता है इन सभी प्रचलित विश्वासों का खण्डन करते हुए कबीर ने इन्हें केवल मिथ्याडंबर बताया है तथा कबीर ईश्वर को सहज भक्ति से पाने की बात कहते हैं।

प्रश्न 5. ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर – ज्ञान की आँधी से भक्त के भ्रम, माया, तृष्णा, कुबुद्धि आदि नष्ट हो जाते हैं, वह प्रेम जल से सराबोर हो जाता है, वह आत्महित नहीं सोचता, उसका मोह भी दूर हो जाता है। ज्ञान का प्रकाश उदित होते ही मन ईश्वरीय आलोक से प्रकाशित हो जाता है।

पाठ ― 10
वाख
ललद्यद

प्रश्न 1. कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं?

उत्तर – कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वह सांसारिक बंधनों अर्थात् मोह, माया का त्याग किए बिना कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भव-सागर पार करना चाहती है।


प्रश्न 2. कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर  कवयित्री का घर जाने की चाह से तात्पर्य इस भवसागर से मुक्ति पाकर प्रभु की शरण में जाने से है क्योंकि सभी जीव ईश्वर से उत्पन्न हुए हैं और अंत में उसी में मिल जाते हैं। अतः कवयित्री ने प्रभु के घर को ही अपना वास्तविक घर माना है।प्रभु की शरण में जाना ही घर जाने की चाह है।

प्रश्न 3. बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

उत्तर – बंद द्वार की साँकल खोलने अर्थात् भव-सागर से मुक्ति के लिए ललद्यद ने उपाय सुझाया है कि मनुष्य को सांसारिक विषयों में न अधिक लिप्त रहना चाहिए और न इनसे विमुख होना चाहिए। मध्यम मार्ग अपना कर अपने अंदर समानता का भाव उत्पन्न कर सच्ची ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।

पाठ – 11

सवैया
रसखान

प्रश्न 1. कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण है?

उत्तर – कवि, श्रीकृष्ण और उनसे जुड़ी हर वस्तु से अगाध प्रेम करता है। कवि के आराध्य देव श्रीकृष्ण ब्रज में पले-बढ़े, वहाँ के वनों, बागों और तालाबों में उन्होंने अनेक प्रकार की लीलाएं की। इसलिए कवि भी ब्रज के वनों, बगीचों और तालाबों को पास से निहारना चाहता है उनसे कवि कृष्ण का जुड़ाव तथा लगाव महसूस करता है; क्योंकि इन सब में उसे कृष्ण का अंश महसूस होता है।


प्रश्न 2. एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है?

उत्तर– वह लकुटी (लाठी) और कामरिया (कंबल) श्रीकृष्ण है से संबंधित हैं और कवि श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त है। कवि के आराध्य कृष्ण जब ग्वाले थे तो एक लाठी लेकर गायें चराने जाया करते थे और काली कामरिया को ओढ़ते थे। अतः कवि उन्हें पाने के लिए संसार के सारे सुखों को न्योछावर करने को  तैयार है।


प्रश्न 3. चौथे सवैये के अनुसार गोपियों अपने आपको क्यों विवश पाती हैं?

उत्तर – चौथे सवैये के अनुसार श्रीकृष्ण की मुरली की मंद-.’ मंद धुन अत्यंत मधुर तथा मादक है; यह धुन लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है; उस पर भी उनका रूप सौंदर्य तथा मधुर मुस्कान जिसके प्रति गोपियाँ अत्यन्त आसक्त हैं। गोपियाँ इन दोनों के प्रति अपने आपको विवश पाती है तथा कृष्ण की होकर रह जाती हैं।

पाठ – 12

कैदी और कोकिला

माखनलाल चतुर्वेदी

प्रश्न 1. कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर – कोयल की कूक सुनकर कवि को लगता है कि वह कोई विशेष संदेशा लेकर आई है। इसका कारण यह है कि कोयल प्रायः सबेरे कूकती है और अब वह अर्धरात्रि के समय कूक रही है, अतः कोई विशेष बात अवश्य है।


प्रश्न 2. किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई

है और क्यों?

उत्तर – ब्रिटिश शासन की तुलना तम (अंधेरे) के प्रभाव से की की गई है क्योंकि अंग्रेजी शासक देशवासियों पर अनेक प्रकार के है। इन अत्याचार कर रहे हैं। उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों तथा अंग्रेज आजादी की माँग करने वालों को जेल की काल-कोठरियों में बंद कर दिया जाता था, उन्हें नाना प्रकार की यातनाएँ दी जाती थीं। कोय ब्रिटिश शासन द्वारा दी गई इन यातनाओं को काले कारनामे कहा ।

प्रश्न 3. कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों फुट में दी जाने वाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।उठ

उत्तर – पराधीन भारत की जेलों में कठोर यंत्रणाएँ दी जाती थीं जिनका वर्णन निम्न प्रकार है-

1. पेटभर भोजन नहीं मिलता था।

2. उन्हें हथकड़ियों और बेड़ियों से बाँधकर छोटी-छोटी कोठरियों में चोरों, लुटेरों और डाकुओं के साथ रखा जाता था।

3. उन्हें बैलों के स्थान पर कोल्हू पर बाँध कर कोल्हू खिंचवाया जाता था।

4. उन्हें बात-बात में गालियाँ दी जाती थीं।

5. उन्हें भयंकर यातनाएँ दी जाती थीं, वे न मर सकते थे और ना चैन से जी सकते थे।

प्रश्न 4. अर्द्धरात्रि में कोयल की चीख से कवि को क्या अंदेशा है?

उत्तर – कवि को लगता है कि कोयल ने अर्द्धरात्रि में क्रांति की ज्वाला को जंगल की आग (दावानल) के रूप में देख लिया है। इसलिए वह आधी रात को यह बताने के लिए चीख रही है कि अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की आग फैल चुकी है।

प्रश्न 5. कवि को कोयल से ईर्ष्या क्यों हो रही है?

उत्तर – कवि को कोयल से ईर्ष्या इसलिए हो रही है क्योंकि कोयल हरी-भरी शाखाओं पर अपना घोंसला बना सकती है जबकि कवि काल कोठरी में कैद होकर रह गया है। कोयल स्वतंत्र है वहआकाश में निर्बाध उड़ सकती है जबकि कवि एक सँकरी सी दस फुट की कोठरी में बंद है। कोयल की तान सुनकर लोग ‘वाह’ कह उठते हैं जबकि कवि का रोना भी गुनाह है।

प्रश्न 6. हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है?

उत्तर– इस कथन में गहरी व्यंजना है। हथकड़ियाँ अपराधियों के लिए बंधन हो सकते हैं, पर देश प्रेमी, स्वतंत्रता सेनानियों के लिए वे गहने से कम नहीं। उनके मनोबल को तोड़ने के लिए अंग्रेज उन्हें हथकड़ियाँ पहनाते थे, पर इससे वीरों का जोश और दूना हो उठता था। इसलिए उन्हें गहना कहा गया है।

पाठ ― 13
ग्राम श्री
सुमित्रानंदन पंत

प्रश्न 1. कवि ने गाँव को हरता जन-मन’ क्यों कहा है?

उत्तर – कवि ने गाँव को हरता जन-मन इसलिए कहा है क्योंकि, गाँव का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत मनमोहक है। यहमोहक वातावरण अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

प्रश्न 2. गाँव को ‘मरकत डिब्बे-सा खुला’ क्यों कहा

उत्तर – गाँव में आम, नीम, जामुन, महुआ आदि के पेड़ तथा खेतों में नाना प्रकार की फसलें लहराती हैं। सारा गाँव हरा- भरा होता है, जिसे दूर से देखने पर यह मरकत जैसा लगता है। मरकत एक हरे रंग की मणि होती है। जगह-जगह खिले रंग- बिरंगे फूल, उन पर उड़ती तितलियाँ, सूरज की गुनगुनी धूप से पनिखरता सौंदर्य इस हरीतिमा में चमक पैदा करता है। गाँव हरा-भरा और चमकदार दिखाई देता है, इसलिए उसे मरकत के खुले डिब्बे-सा कहा गया है।


प्रश्न 3. बालू के साँपों से अंकित गंगा की सतरंगी रेती” का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – गंगा तट के किनारे फैली रेत पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो वह चमक उठती है जो रंग-बिरंगी होती हैं। पानी की लहरों के कारण इस पर टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ पड़ जाती हैं जो साँपों का-सा आभास कराती हैं। हवा से रेखाएँ साँप के समान हिलती- डुलती प्रतीत होती हैं।

पाठ ― 14
चंद्र गहना से लौटती बेर
 केदारनाथ अग्रवाल

प्रश्न 1. सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता होगा?

उत्तर-सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि उसके की बात कहना चाहता होगा। ‘सयानी होना’ सरसों का बड़ा होकर उसमें फूल आने की ओर संकेत करता है। सरसों का फूल पीले रंग का होता है कवि का हाथ पीले का आशय यही है।


प्रश्न 2. अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-कवि ने अलसी को भी एक हठीली नायिका के रूप में चित्रित किया है। वह चने के पास हठपूर्वक उग आई है। दुबले शरीर और लचकदार कमर वाली अलसी नीले फूल को सिर पर रखे प्रेमातुर होकर कह रही है कि जो इसे छू लेगा उसे मैं अपने हृदय का दान दे दूंगी।

प्रश्न 3. ‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है?

उत्तर – पोखर के जल में जब सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं तो उसका प्रतिबिंब गोल और लंबा-सा बन जाता है। यह प्रतिबिंब कवि को चाँदी के खम्बे सा लगता है। इस प्रकार इस कथन में कवि की सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है।

प्रश्न 4. कविता के आधार पर ‘हरे चने’ का सौन्दर्य अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।

उत्तर – हरा चना खेत में खड़ा है, वह बित्ते भर ऊँचा है जिसके कारण वह ठिगना-सा लगता है, उसके माथे पर गुलाबी फूलों के गुच्छों को देखकर लगता है जैसे वह दूल्हे की तरह गुलाबी पगड़ी बाँधकर बन-ठन कर खड़ा हो।

कृतिका (सहायक वाचन)

पाठ ― 1

इस जल प्रलय में 
फणीश्वर नाथ रेणु

प्रश्न 1. बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे?

उत्तर– बाढ़ की खबर सुनकर लोग नीचे के सामान ऊपर ले जा रहे हैं। अपने घरों में ईंधन, आलू, दियासलाई, दवाईयाँ, मोमबत्तियाँ, पीने का पानी आदि इकट्ठा करने लगे। दुकानदार लोग अपने सामान को रिक्शा, टमटम, टैम्पो और ट्रकों में लादकर अन्यत्र जाने की तैयारी कर रहे थे।

प्रश्न 2. बाढ़ की सही जानकारी लेने और बाढ़ का रूप देखने लेखक क्यों उत्सुक था?

उत्तर – चूंकि लेखक को गाँव में रहते हुए बाढ़ से घिरने, बहने और भोगने का अनुभव कभी नहीं हुआ था। इसीलिए लेखक पटना में रहते हुए वहाँ आई भीषण बाढ़ की सही जानकारी लेने और बाढ़ का रूप देखने के लिए उत्सुक था।

प्रश्न 3. ‘मृत्यु का तरल दूत’ किसे कहा गया है और क्यों?

उत्तर – ‘इस जल प्रलय में’ नामक पाठ के अंतर्गत ‘मृत्यु का तरल दूत’ बाढ़ के गेरूआ झाग भरे उस पानी को कहा गया है, जो ऊँचे-नीचे स्थानों को डुबोता हुआ, लोगों को भयभीत करता हुआ, मृत्यु का संदेश लेकर आता है। इस गेरूआ झाग भरे पानी से हजारों प्राणियों की जान चली जाती है।

प्रश्न 4. जब लेखक को यह अहसास हुआ कि उसके इलाके में भी पानी घुसने की संभावना है तो उसने क्या-क्या प्रबंध किए?

उत्तर – लेखक को जब अहसास हुआ कि बाढ़ का बढ़ता पानी उसके इलाके में भी घुस सकता है तो वह चिंतित हो उठा। उसने मोमबत्ती, दियासलाई, सिगरेट, पीने का पानी और दवाइयाँ आदि की व्यवस्था की।

पाठ ― 2

मेरे संग की औरतें
मृदुला गर्ग

प्रश्न 1. लेखिका की नानी की आजादी के आन्दोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?

उत्तर – वैसे देखा जाए तो लेखिका की नानी का आजादी के आन्दोलन में कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं था क्योंकि वे अनपढ़, परम्परागत, परदा करने वाली, दूसरों की जिन्दगी में दखल न देने वाली महिला थीं। लेकिन कम उम्र में ही अपनी मृत्यु को निकट जान उन्होंने अपनी पन्द्रह वर्षीय बेटी (लेखिका की माँ) की शादी एक ऐसे नौजवान से कराई, जिसे आजादी के आन्दोलन में भाग लेने के कारण आई.सी.एस. की परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। इस तरह उनकी स्वतंत्रता आन्दोलन में परोक्ष भागीदारी रही।

पाठ ― 3

रीड की हड्डी
 जगदीश चंद्र माथुर

प्रश्न 1. “रीड की हड्डी ” एकांकी का क्या उद्देश्य है ? लिखिए।

उत्तर – रीढ़ की हड्डी’ नामक एकांकी के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

(i) समाज में लड़कियों को कम सम्मान मिल पाने की समस्या को समाज के सामने लाना।

(ii) लड़कियों के विवाह में आने वाली समस्या को समाज के सामने लाना।

(ii) लड़कियों के विवाह के समय उनकी पसंद-नापसंद, रुचि आदि को महत्त्व न दिया जाना।


प्रश्न 2. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?

उत्तर – समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं-

(i) हमें महिलाओं को हीन दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।

(ii) महिलाओं को उचित सम्मान देना चाहिए तथा ऐसा करने के लिए दूसरों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।

(iii) स्त्री-शिक्षा में हमें योगदान देना चाहिए।

(iv) उनके मान-सम्मान को ध्यान में रखकर अश्लील हरकतें न करें तथा ऐसा करने वालों को हतोत्साहित करें।

(v) अपने समय की महान तथा विदुषी स्त्रियों का उदाहरण समाज में प्रस्तुत करना चाहिए।

(vi) लड़के और लड़कियों की तुलना करते हुए उन्हें कभी हीन नहीं समझना चाहिए।

(vii) लड़कियों के खान-पान तथा पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देना चाहिए। जिससे वे स्वस्थ एवं शिक्षित हो सकें।

पद्य साहित्य का विकास

प्रश्न 1. छायावादी कविता की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

अथवा

छायावाद की चार विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर-(1) सौन्दर्य तथा प्रणय-भावनाओं का प्राधान्य।

(2) भाषा में लाक्षणिकता तथा वक्रता की प्रमुखता।

(3) बाह्यार्थ निरूपण के स्थान पर स्वानुभूति निरूपण की प्रमुखता।

(4) प्रकृति का सजीव सत्य के रूप में चित्रण तथा प्रकृति पर कवि द्वारा अपने भावों का आरोपण।

(5) छन्द विधान में नूतनता।

(6) डॉ. नगेन्द्र के शब्दों में, “छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह था।”


प्रश्न 2. छायावाद के चार प्रमुख कवियों के नाम बताइए।

उत्तर-छायावाद के चार प्रमुख कवि-(1) जयशंकर प्रसाद, (2) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, (3) सुमित्रानन्दन पन्त, तथा (4) महादेवी वर्मा हैं।

प्रश्न 3. पाँच प्रगतिवादी कवियों के नाम बताइए।

उत्तर-पाँच प्रगतिवादी कवि हैं-(1) नागार्जुन, (2) सुमित्रानन्दन पन्त, (3) केदारनाथ अग्रवाल, (4) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, (5) निराला।

प्रश्न 4. नई कविता की चार विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर-(1) नई कविता जीवन के हर क्षण को सत्य ठहराती है।

(2) नई कविता की वाणी अपने परिवेश के जीवन अनुभव पर आधारित है

(3) नई कविता लघु मानवत्व को स्वीकार करती है।

(4) नई कविता में जीवन मूल्यों की पुनः परीक्षा की गयी है।

काव्य बोध

प्रश्न 1. हिन्दी के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।

उत्तर-‘रामचरितमानस’ तथा ‘पद्मावत’ हिन्दी के श्रेष्ठ महाकाव्य है।

प्रश्न 2. ‘वाक्यं रसात्यक काव्यम्’ किसकी परिभाषा है?

उत्तर-वाक्य रसात्मक काव्यम्’ आचार्य विश्वनाथ द्वारा दी गई  काब्य की परिभाषा है।

 प्रश्न 3. ओज गुण से युक्त कोई दो पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर-ओज गुण से युक्त दो पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-

” ‘बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।

खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।'”

प्रश्न 4. माधुर्य गुण किन रसों से युक्त काव्य में होता है ?

उत्तर-करुण, श्रृंगार या शान्त रसों से युक्त काव्य में माधुर्य गुण होता है।

प्रश्न 5. रस की परिभाषा बताइए।

उत्तर-‘काव्यास्वाद से उत्पन्न आनन्द ही रस कहलाता है।’ अर्थात काव्य, उपन्यास, कहानी, नाटक आदि को पढ़ने से जो मानन्द की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं।


प्रश्न 6. रस के भेद बताइए।

उत्तर-रस के कुल दस भेद हैं-(1) हास्य रस, (2) करुण रस, (3) शृगार रस, (4) रौद्र रस, (5) भयानक रस, (6) शान्त रस, (7) अदभुत रस, (8) वात्सल्य रस, (५) वीभत्स रस, (10) वीर रस।

प्रश्न 7. रस निष्पत्ति में सहायक तत्त्वों के नाम लिखिए।

उत्तर-विभावानुभाव संचारी संयोगाद्रस निष्पत्ति, अर्थात् विभाव, अनुभाव एवं संचारी भाव रस की निष्पत्ति के सहायक तत्त्व हैं।

प्रश्न 8. अलंकार की परिभाषा लिखिए।

उत्तर-आचार्य दण्डी के अनुसार- ‘काव्य शोभाकरान्त धर्मान् अलंकारान् प्रचछते’ अर्थात् काव्य का सौन्दर्य बढ़ाने वाले धर्म अलंकार कहलाते हैं।


प्रश्न 9. काव्य के प्रमुख भेद कौन-से माने गये हैं?

उत्तर-भारतीय आचार्यों ने काव्य के दो प्रकार माने है- श्रव्य काव्य , दृश्य काव्य

(1) श्रव्य काव्य-जिस काव्य को आनन्दानुभूति पढ्ने या सुनने से होती है, उसे श्रव्य काब कहते हैं। जैसे-कविता, कहानी आदि।

(2) दृश्य काव्य-जिस काव्य की अनुभूति अभिनय आदि देखकर होती है, उसे दृश्य काव्य कहते हैं, जैसे-नाटक,प्रहसन आदि।

प्रश्न 10. महाकाव्य एवं खण्डकाव्य में दो अन्तर बताइए तथा दोनों काव्यों का एक-एक नाम लिखते हुए उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।

अथवा

हिन्दी के दो खण्डकाव्य एवं उनके रचनाकारों के नाम लिखिए।

उत्तर-(1) महाकाव्य का कलेवर वृहद् (विशाल) होता है जबकि खण्डकाव्य का आकार सीमित होता है।

 (2) महाकाव्य में जीवन का समग्ररूपेण अंकन होता है जबकि खण्डकाव्य में जीवन के किसी एक खण्ड (पक्ष)का विवरण होता है।

महाकाव्य-रामचरितमानस (तुलसीदास) व कामायनी ( जयशंकर प्रसादा।

खण्डकाव्य-मेघदूत (कालिदास) व पंचवटी (मैथिलीशरण गुप्त)।


प्रश्न 11. करुण रस की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर-सहृदय के हृदय में शोक नामक स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तो वह करुण रस का रूप ग्रहण कर लेता है।

उदाहरण-‘प्रिय वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है ?

दुःख जलनिधि में डूबी का सहारा कहाँ है ?

लख मुख जिसका आज लौं जी सकी

वह हृदय हमारा नयनतारा कहाँ है?’

प्रश्न 12. हास्य रस की परिभाषा सोदाहरण लिखिए।

उत्तर-अनोखी वेशभूषा, आकार, वाणी तथा कार्य को निहारकर जो ह्रास का भाव उत्पन्न होता है वही हास्य रस की अभिव्यक्ति कराता है।

उदाहरण-‘फादर ने बनवा दिए तीन कोट छ: पैंट।

बेटा मेरा हो गया कॉलेज स्टूडेण्ट ।’

प्रश्न 13. वीर रस की उदाहरण सहित परिभाषा लिखिए।

उत्तर-भावुक के हृदय में जब ‘उत्साह’ नामक स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव एवं संचारी भाव से संयोग होता है तब वहाँ वीर-रस का परिपाक होता है। इसका स्थायी भाव ‘उत्साह’ है।

उदाहरण-‘सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।

बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नयी जवानी थी।’


प्रश्न 14. यमक अलंकार को सोदाहरण परिभाषित कीजिए।

उत्तर-यमक का सामान्य अर्थ है दो। अत: जब एक ही शब्द की भिन्न अर्थ में आवृत्ति होती है, वहाँ यमक अलंकार होता है।

उदाहरण-‘कनक-कनक ते सौ गुणी मादकता अधिकाय।

या पाये बौरात नर वा खाये बौराय॥’

प्रश्न 15. छंद की परिभाषा देते हुए उसके भेद बताइए।

अथवा

छंद किसे कहते हैं ? इसके प्रमुख प्रकार बताइए।

उत्तर-परिभाषा-वर्ण, मात्रा, यति, तुक आदि को ध्यान में रखकर की गयी शब्द -रचना छंद कहलाती है। इससे काव्य में प्रवाह, संगीतात्मकता तथा प्रभावशीलता आ जाती है।

प्रकार-छंद दो प्रकार के होते हैं-(1) मात्रिक छंद, (2) वर्णिक छंद।

(1) मात्रिक छंद-जिस छंद में मात्राओं की गणना की जाती है, उसे मात्रिक छंद कहते हैं।

(2) वर्णिक छंद-वर्णिक छंद में वर्गों की गणना की जाती है।


प्रश्न 16. विभाषा एवं बोली में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-(1) जब बोली किसी कारण महत्त्व प्राप्त करती है तो उसे भाषा कहा जाता है।

(2) प्रत्येक व्यक्ति की भाषा स्वतन्त्र होती है।

(3) एक भाषा के अन्तर्गत कई उप-बोलियाँ होती हैं।


प्रश्न 17. आग में घी डालना’ मुहावरे का अर्थ वाक्य प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-श्याम ने आग में घी डालकर झगड़ा बढ़ा दिया नहीं तो दोनों शान्त हो रहे थे।

प्रश्न 18. निम्नलिखित लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए-

(i) आँख का अंधा नाम नयनसुख, (ii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

उत्तर-(i) आँख का अन्धा नाम नयनसुख-गुण के विपरीत नाम।

(ii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा-काम न जानना और बहाना बनाना।


प्रश्न 19. ‘चाँदी का जूता मारना’ लोकोक्ति का सही अर्थ बताइए।

उत्तर-चाँदी का जूता मारना– पैसे के बल पर काम कराना।

प्रश्न 20. निम्नलिखित लोकोक्ति का अर्थ वाक्य प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए-

आगे नाथ न पीछे पगहा।

उत्तर-तुम्हारे तो आगे नाथ न पीछे पगहा है, इसलिए घूमते रहते हो।


प्रश्न 21. भाव-विस्तार से क्या आशय है?

उत्तर-सूत्र रूप में कही गई बात को विस्तार से समझाना, भाव-विस्तार कहलाता है।


प्रश्न 22. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए-

अन्धे की लकड़ी, ईद का चाँद होना, छप्पर फाड़ कर देना, पेट में चूहे कूदना।

उत्तरअन्धे की लकड़ी (एक ही सहारा)– श्रवण कुमार अपने माता-पिता की अंधे की लकड़ी थे।

ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखना)-श्याम, तुम्हें देखने को आँखें तरस गईं, तुम तो ईद का चाँद हो गए।

छप्पर फाड़कर देना (बिना परिश्रम के अनायास प्राप्ति)-भगवान देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।

पेट में चूहे कूदना ( जोर से भूख लगना)-पेट में चूहे कूद रहे हैं। पहले कुछ खा लें

प्रश्न  23 – रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित विकल्प का चयन कीजिए

(1) समास के ……भेद होते हैं। (छ:/पाँच) हैं।

उत्तर –  छः

(2) जिस समास में पहला पद प्रधान होता है, उसे ……….. कहते हैं।(अव्ययी भाव/कर्मधारय)

उत्तर– कर्मधारय

(3) समास में पूर्वपद संख्यावाची विशेषण ………होता है।

(द्विगु/कर्मधारय)

उत्तर- द्विगु

(4) रसोईघर …… समास का उदाहरण है।

(तत्पुरुष/कर्मधारय)

उत्तर– तत्पुरुष

(5) संधि में दो वर्गों में मेल एवं…… में दो शब्दों में मेल होता है। (समास/वाक्य)

उत्तर– समास

(6) द्विगु समास का उदाहरण …… (गजानन/पंचवटी)

उत्तर–  पंचवटी।

(1) काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्वों को …….कहते हैं।

(2) जहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति हो और अर्थ भिन्न-भिन्न हो

वहाँ……….अलंकार होता है।

(3) ‘निर्बल के बल राम’ – यह…………अलंकार है।

(4) श्लेष का अर्थ………….है।

(5) जगती जगती की भूख-प्यास में……….अलंकार है।

उत्तर-(1) अलंकार, (2) यमक, (3) यमक, (4) चिपका

 हुआ, (5) यमक।

जीवन परिचय

लेखक परिचय
1. प्रेमचन्द

जीवन परिचय-प्रेमचन्द का वास्तविक नाम धनपतराय था। प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई, 1880 ई. को वाराणसी जिले के लमही ग्राम में हुआ था। शिक्षा विभाग में नौकरी करते हुए ये निरीक्षक हो गए। किन्तु नौकरी के कारण इनका लेखन-कार्य नहीं हो पाता था। इसलिये नौकरी छोड़कर इन्होंने अपना जीवन-साहित्य साधना में लगा दिया। 8 अक्टूबर, 1936 ई. को इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ – गोदान, कर्मभूमि, पंच परमेश्वर, बूढी काकी, बड़े घर की बेटी।

भाषा-शैली – प्रेमचन्द्र जी पहले उर्दू में लिखते थे परन्तु बाद में हिन्दी में लिखना आरंभ किया इसीलिए उनकी भाषा सरल, सीधी- सादी, चुस्त तथा मुहावरेदार है। इनकी शैली मैंजी हुई,स्वाभाविक एवं आकर्षक है। सरस और प्रवाहपूर्ण शैली का प्रयोग इनकी कहानियों में रोचकता प्रदान करता है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी साहित्य जगत में प्रेमचन्दजी एक श्रेष्ठ कहानीकार एवं उपन्यास सम्राट के रूप में जाने जाते हैं।

2. महादेवी वर्मा

रचनाएँ – नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, दीपशिखा उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। कविता के साथ-साथ उन्होंने सशत गद्य रचनाएँ भी लिखी हैं जिनमें रेखाचित्र तथा संस्मरण प्रमुख हैं। अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, श्रृंखला की कड़ियाँ उनकी महत्वपूर्ण गद्य रचनाएं हैं।

भाषा-शैली- महादेवी वर्मा जी को भश सरल, प्रौढ़ एवं स्पष्ट है। शब्द चयन प्रभावपूर्ण और सरस है। आपकी गद्यशैली भावात्मक एवं विचारात्मक है।

साहित्य में स्थान- हिन्दी गद्य साहित्य में संस्मरण वं रेखाचित्र लेखन परंपरा को प्रारंभ करने का श्रेय महादेवी जी को है। छायावाद की प्रमुख स्तम्भ महादेवी वर्मा को साहित्य अकादमी एवं ज्ञानपीठ पुस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया।

कवि परिचय

1. कबीरदास

जीवन-परिचय– कबीरदास जी का जन्म काशी में सन् 1398 ई. में हुआ। इनका पालन-पोषण एक जुलाहा दम्पत्ति ने किया। इस नि:सन्तान जुलाहा दम्पत्ति नीरू और नीमा ने। बालक का नाम कबीर रखा। कबीर की शिक्षा विधिवत् नहीं हुई। उन्हें तो सत्संगति की अनंत पाठशाला में आत्मज्ञान और ईश्वर प्रेम का पाठ पढ़ाया गया। कबीर पाखण्ड और अंधविश्वासों के घोर विरोधी थे। 120 वर्ष की आयु में सन् 1518 ई. में देहावसान हो गया।

रचनाएँ – साखी, सबद, रमैनी आपकी तीन प्रकार की रचनाएँ मिलती हैं। बीजक एवं बानी के रूप में आपके काव्य संग्रह मिलते हैं।

भाव-पक्ष– कबीर के काव्य में आत्मा और परमात्मा के सम्बन्धों की स्पष्ट व्याख्या मिलती है। कबीर ने अपने काव्य में परमात्मा को प्रियतम एवं आत्मा को प्रेयसी के रूप में चित्रित किया है। उनके काव्य में विरह की पीड़ा है। कबीर ने कहीं-कहीं अनूठे रूपकों द्वारा अपने गूढ़ भावों को अभिव्यक्ति प्रदान की है।

कला-पक्ष– कबीर के काव्य में चमत्कार के दर्शन होते हैं। कविता उनके लिए साध्य न होकर साधन मात्र थी। उनकी रचनाओं में साहित्यिक सौन्दर्य, कहीं-कहीं छन्द-गठन तथा अलंकार- विधान के सौष्ठव का अभाव भी मिलता है। उनके काव्य में अनायास ही मौलिक एवं सार्थक प्रतीकों, अन्योक्तियों एवं रूपकों का सफल प्रयोग मिलता है।

साहित्य में स्थान – हिन्दी साहित्य में स्वर्णयुग माने जाने वाले भक्तिकाल के महान कवि कबीर उच्च स्थान के अधिकारी हैं। आप रचनाकारों के आदर्श रहे हैं।

2. सुमित्रानन्दन पंत

रचनाएँ-युगान्त, उत्तरा, पल्लव, ग्राम्या, स्वर्ण-किरण, स्वर्ण-धूलि, लोकायतन (महाकाव्य)।

भाव-पक्ष – पन्त जी छायावादी कवि थे। इनकी कविताओं में प्रकृति के मनमोहक चित्र मिलते हैं। पन्त जी की कविता का विशेष गुण अध्यात्म की ओर झुकाव तथा सौन्दर्य प्रेम है। इनको प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है। भाषा में प्रसाद और माधुर्य गुण है। भाषा अत्यंत चित्रमयी एवं अलंकृत है जिसमें प्रत्येक शब्द का अपना विशिष्ट महत्त्व है। खड़ी बोली को आपने रमणीय रूप दिया है।

कला-पक्ष– आपकी कविता ओज और माधुर्य गुण से युक्त है। आपने कविता में प्रायः कोमलकान्त पदावली को ही अपनाया है। आपकी कविता में अलंकृत शैली की प्रधानता है। आपने तुकान्त, अतुकान्त, मुक्तक और स्वच्छन्द छन्दों का प्रयोग किया है। विविध वर्ण, गद्य और ध्वनि नाद का इन्होंने कविता में सजीव चित्रण किया है।

साहित्य में स्थान-निराला जी ने एक बार पन्त जी के लिये बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा था- “यदि तुलसी और साहित्य के सत्य और शिव हैं तो पंत जी सुन्दरम् हैं।”अक्स

 पत्र लेखन

प्रश्न 1.सहेली को जन्म दिन की बधाई देने हेतु पत्र लिखिए।

 अथवा

अपने मित्र को जन्मदिन की बधाई देने हेतु पत्र लिखिए।

उत्तर-

पुस्तक बाजार, भिण्ड

दिनांक 28-8-202x

प्रिय सहेली/मित्र गीता,

मधुर मिलन

तुम्हारे जन्म-दिन का निमंत्रण-पत्र मिला। बहुत ही प्रसन्नता हुई कि इस बार तुम अपना 30वाँ जन्म-दिन मना रही हो। मेरी बहुत इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर तुम्हारे साथ होती, लेकिन घर में जरूरी काम होने के कारण मैं शामिल नहीं हो पा रही हूँ। मेरी ओर से तुम्हें जन्म-दिन की बहुत-बहुत बधाई।

सभी बड़ों को प्रणाम तथा छोटों को स्नेह। दीर्घायु जीवन की शुभकामनाओं के साथ।

तुम्हारी सहेली (मित्र)

     साधना

प्रश्न 1. शुल्क मुक्ति हेतु अपने प्राचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए।*

अथवा

अपने विद्यालय के प्राचार्य महोदय को एक आवेदन-पत्र लिखिये जिसमें अपनी वार्धनता का उल्लेख करते हुए निर्धन छात्र निधि से आर्थिक सहायता माँगिए।

अथवा

विद्यालय के प्राचार्य को शाला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र लिखिए।

उत्तर-

सेवा में,

प्राचार्य महोदय,

शा. उ. मा. विद्यालय सबलगढ़

विषय शुल्क मुक्ति हेतु।

महोदय,

विनम्र निवेदन है कि मैंने आपके विद्यालय में इसी वर्ष प्रवेश लिया है । मैं अत्यन्त निर्धन छात्र हूँ। मेरे पिताजी की मासिक आय मात्र 5000 रुपये है और उन पर आठ प्राणियों के जीवन-निर्वाह का भार है। मैं अभी तक बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होता आया हूँ और प्रतिवर्ष पेरी फीस माफ रही है। यदि मुझे शुल्क से मुक्त नहीं किया गया, तो हो सकता है कि मैं आगे पढ़ ही नहीं सकूँ और मेरा भविष्य अंधकारमय हो जाए। मुझे पूर्ण आशा है कि आप मेरी स्थिति पर दया करते हुए मेरी शुल्क-मुक्ति कर देंगे। मैं आपका कृतज्ञ रहूँगा।

दिनांक 15-7-202x

आपका आज्ञाकारी शिष्य

सौरभ जैन         

कक्षा – 9          

प्रश्न – तुम्हारे पिताजी का स्थानान्तरण हो जाने के कारण अपने विद्यालय के बन प्राचार्य को स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र (T.C.) हेतु आवेदन पत्र लिखिए।

अथवा

अपने प्राचार्य को विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र प्रदान करने विषयक् प्रार्थना-पत्र लिखिए।

उत्तर-

सेवा में,

श्रीमान प्राचार्य महोदय,

शा.उ.मा.वि. मालवीय नगर, उज्जैन

मान्यवर महोदय,

सेवा में विनम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9 वीं का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिता का यहाँ से जावरा के लिए स्थानांतरण हो गया है। इस कारण मैं अपना अध्ययन इस विद्यालय में जारी नहीं रख सकता हूँ। अत: मुझे विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें। मैंने विद्यालय का शुल्क, पुस्तकें आदि जमा कर दी हैं । कक्षाध्यापक का ‘कुछ बकाया नहीं’ प्रमाण-पत्र संलग्न है।

आपका आज्ञाकारी शिष्य

संजीव कुमार गुप्ता।   

कक्षा-9         

दिनांक 15-10-202x। 

  

निबंध लेखन

1. पर्यावरण एवं प्रदूषण
अथवा
प्रदूषण – कारण और निदान
अथवा
पर्यावरण संरक्षण हमारा दायित्व

प्रस्तावना– पर्यावरण प्रकृति का बैंक है। इस बैंक में जमा पूँजी के सहारे जिंदगी का कारोबार चलता है। पर्यावरण वह खोल है, जिससे हम घिरे हुए हैं। पृथ्वी, जल, वायु, ध्वनि आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं। हमारा पर्यावरण सारी प्रकृति है, पृथ्वी और आकाश के बीच का अंतराल है। राजनैतिक और भौगोलिक समस्यायें इसे विभाजित नहीं कर सकती हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण-   वृक्ष हमें जीवन देते हैं और हम उन्हीं की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं। नदियों में औद्योगिक कचरा मिलाया जा रहा है इस कारण देश के 70 प्रतिशत जल स्रोत दूषित हैं। मिल की चिमनियाँ और सड़कों पर चलने वाले – पेट्रोल, डीजल वाले वाहन हवा में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड छोड़कर वायु को दूषित कर रहे हैं। जंगलों का विनाश हो रहा है। बहुमूल्य वन्य जीव नष्ट हो रहे हैं। दिन-प्रतिदिन ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

निदान (समाधान)-  वाहनों में साइलेंसर एवं मिलावट रहित ईंधन का उपयोग आवश्यक है। गंदी नालियों की सफाई कराना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। कचरे को सड़ने नहीं देना चाहिए। गटरों के गंदे पानी और औद्योगिक कचरे को नदियों में नहीं बहाना चाहिए। श्रीमती इंदिरा गाँधी ने कहा था-“धरती को केवल इतना छेड़ो कि चीजें उग सकें। इतना मत कुरेदो कि वह रो पड़े”। उगता हुआ पेड़ प्रगतिशील राष्ट्र का प्रतीक है। परमाणु परीक्षण तुरंत रोकने की आवश्यकता है क्योंकि इससे अनेक रोग फैल रहे हैं।

उपसंहार– पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जनचेतना जाग्रत करना आवश्यक है। पर्यावरण की शिक्षा नवयुवकों की शिक्षा का अभिन्न अंग होना चाहिए। प्रौढ़ शिक्षा एवं विस्तार कार्यक्रम के साथ-साथ पर्यावरण शिक्षा देना आवश्यक है। जनसंख्या और पर्यावरण के बीच गहरा रिश्ता है। अतः जनसंख्या शिक्षा के साथ- साथ पर्यावरण शिक्षा भी आवश्यक है। मनुष्य पर्यावरण का दास है, मित्र है। मित्र का कर्त्तव्य है कि वह उसकी रक्षा करे। वृक्ष कार्बन डाइ-ऑक्साइड सोखकर जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इसलिए हर आदमी वृक्षोरापण करे और उसका अपनी संतान की तरह पालन करे। नगर पालिकायें और नगर-निगम नगरीय प्रदूषण को रोकें। हमें भी अपने आस-पास का पर्यावरण शुद्ध और साफ रखना चाहिए।

2. जीवन में खेलों का महत्त्व
अथवा
खेल और विद्यार्थी

प्रस्तावना – कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। यदि मनुष्य अपना सम्पूर्ण विकास करना चाहता है तो उसके शरीर का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। अतः यदि हम चाहते हैं कि हम अपने जीवन का पूर्ण उपयोग करें और निरन्तर ज्ञान प्राप्त करें तो हमें स्वस्थ रहना चाहिए। शरीर को स्वस्थ बनाने में खेलों का विशेष योगदान है। खेल स्वास्थ्य का सर्वोत्तम साधन है। उत्तम स्वास्थ्य जीवन की सफलता की कुंजी है।

खेल का महत्त्व – खेल एक ओर मनोरंजन का अच्छा साधन है तो दूसरी ओर समय के सदुपयोग का भी। मनोरंजन का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। मनोरंजन से मनुष्य की थकावट और उदासीनता दूर होती है, इसलिये मनुष्य मनोविनोद को जीवन में अपनाता है। खेल के मैदान में खिलाड़ी दिन-भर की थकान की घटनायें इत्यादि भूल जाता है। खेल के मैदान पर उसका मन निर्मल हो जाता है। इसके विपरीत जिन व्यक्तियों की खेल में रुचि नहीं है वे यहाँ-वहाँ बैठकर अपना अमूल्य समय व्यर्थ में नष्ट करते हैं। खेल के मैदान में मनुष्य अपने समय का सदुपयोग करते हैं। खेल के मैदान पर व्यक्ति में सहयोग और मित्रता की सामाजिक भावना का उदय होता है जिसकी जीवन में पग-पग पर आवश्यकता पड़ती है और जिससे जीवन सजता, संवरता और निखरता है। खेल के मैदान में व्यक्ति एक-दूसरे के शत्रु रहकर भी मित्रता का व्यवहार करते हैं। आपस में उनमें बहुत प्रेम रहता है। उनमें सहयोग और सहानुभूति की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। विद्यार्थी जीवन में भी खेल का बहुत महत्व है। विद्यार्थी जीवन में खेल के कारण विद्यार्थी लोकप्रिय होता है। वह सबका समान रूप से स्नेह  होता है। शिक्षा पूर्ण कर लेने के पश्चात् जब वह जीवन क्षेत्र में कूदता है और किसी पद का प्रत्याशी बनता है, तब खेल उसके लिये निर्वाचन की कसौटी सिद्ध होता है। खिलाड़ी प्रत्याशी के रूप में जहाँ भी जाते हैं, सफलता प्राप्त करते हैं। नौकरियों में उनको प्राथमिकता दी जाती है। सरकार अब खिलाड़ियों को विशेष सुविधायें भी देती है।

उपसंहार– हम देखते हैं कि जीवन में खेलों का बहुत महत्व है। दुर्भाग्य यह है कि खेल और शिक्षा के सम्बन्ध में एक भ्रम हमेशा यह रहा है कि जो खिलाड़ी है वह पढ़ाई में बुद्धिमान नहीं हो सकता और जो पढ़ने में बुद्धिमान है वह खिलाड़ी नहीं हो सकता। प्रायः खेल और पढ़ाई को एक-दूसरे का विरोधी माना गया है, लेकिन यह बात सत्य नहीं है। खेल और पढ़ाई का उचित समन्वय कर व्यक्ति अपना शारीरिक व मानसिक विकास कर जीवन में आगे बढ़ सकता है।

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