कक्षा 9वी समाजिक विज्ञान अर्धवार्षिक पेपर 2021-22 Solution PDF #part_1

कक्षा 9वी समाजिक विज्ञान अर्धवार्षिक पेपर 2021-22 Solution PDF #part_1

Mp board class 9th Social science half yearly paper 2021-22:-  कक्षा 9वी के सभी विषयों के important solution पाने के लिये हमारे साथ बने रहिये। हम आपकी सभी उलझनों को सुलझाने के लिए 9th class के सभी विषयों का important solution हम यहां उपलब्ध कर रहे हैं । आज की इस post में  हम social science  की भारत और समकालीन विश्व इतिहास का important solution दे रहे हैं यदि आप इससे सम्बंधित कोई भी पोस्ट देखना चाहते हैं तो हमारी साइड को visit करते रहें। लाभ उठाने के लिए हमारी इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें।

Blue print भारत और समकालीन विश्व इतिहास –

भारत भारत और समकालीन विश्व इतिहास के अंतर्गत आपको 5 अध्याय दिए गए हैं जिनसे आपके प्रश्न पत्र में प्रश्न पूछे जाएंगे इन सभी अध्यायों में से आपके प्रश्न पत्र में 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न तथा  2 अंकों के  तीन प्रश्न , 3 अंकों का एक प्रश्न, व 4 अंक  का एक प्रश्न पूछा जाएगा।  अर्थात यहां से आपके प्रश्न पत्र में पूरे 5 प्रश्न पूछे जाएंगे और आपको इस खंड से पूरे 20 अंक प्राप्त हो सकते हैं 

परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिए आप आज से ही तैयारी आरम्भ कर दे ऐसा करने से exam के समय में आप पर अधिक दबाब नहीं होगा और आप शांत मन से परीक्षा दे पाएंगे जिसके लिए हम आपको class 9th के सभी विषयों के important solution उपलब्ध कर रहे हैं जिससे आप अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं।

सामाजिक विज्ञान कक्षा -9 
भारत और समकालीन विश्व-I (इतिहास)

Chapter – 1
फ्रांसीसी क्रांति

इस chapter से आपके प्रश्न पत्र में 4 अंक का 1 प्रश्न पूछा जायगा अर्थात यह chapter आपको पूरे 4 अंक प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 1. उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी क्रांति कौन-सी विरासत छोड़ गई है?
उत्तर – 19वीं और 20वीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसीसी
क्रांति की मुख्य देन (विरासत) निम्न प्रकार है-
(i) स्वतंत्रता – स्वतंत्रता का विचार, फ्रांसीसी क्रांति का एक
मूल सिद्धांत था। उन्होंने इसे मनुष्य का प्राकृतिक अधिकार माना। ‘स्वतंत्रता’ से फ्रांसीसी क्रांतिकारियों का अभिप्राय ऐसे काम करने की शक्ति था जो औरों के लिए नुकसान दायक न हो। स्वतंत्रता का यह विचार उपनिवेशों की जनता के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। विश्व के सभी लोकतांत्रिक देशों ने इस अधिकार को अपनाया। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित मानव अधिकारों में भी इसे मानव का नैसर्गिक अधिकार माना गया।
(ii) समानता – फ्रांसीसी क्रांति का अन्य मत्त्वपूर्ण सिद्धांत
समानता का सिद्धांत था जिसे 19वीं सदी के सभी लोकतांत्रिक
देशों द्वारा अपनाया गया। इस प्रकार फ्रांसीसी क्रांति द्वारा स्थापित समानता का आदर्श वर्तमान के समस्त लोकतांत्रिक संविधानों का मूल आधार है।
(iii) बंधुत्व की भावना – फ्रांसीसी क्रांति ने बंधुत्व की
भावना के रूप में विश्व के समक्ष एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया
कि यदि जनता सामूहिक रूप से बंधुत्व के विचार का पालन करे तो वह देश का नवनिर्माण कर सकती है।

प्रश्न 2. नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है?

उत्तर – सन् 1796 निर्देशिका के पतन के तुरंत बाद नेपोलियन का उदय हुआ। निदेशकों का प्रायः विधान सभाओं से झगड़ा होता था जो कि बाद में उन्हें बर्खास्त करने का प्रयास करती। निर्देशिका राजनैतिक रूप से अत्यधिक अस्थिर थी; अत: नेपोलियन सैन्य तानाशाह के रूप में सत्तारूढ़ हुआ। सन् 1804 में नेपोलियन बोनापार्ट ने स्वयं को फ्रांस का सम्राट बना दिया। वह पड़ोसी यूरोपीय देशों पर विजय करने निकल पड़ा, राजवंशों को हटाया और साम्राज्यों को जन्म दियाँ जिसमें उसने अपने परिवार के सदस्यों को आरूढ़ किया। उसने निजी संपत्ति की सुरक्षा जैसे कई कानून बनाए और दशमलव प्रणाली पर आधारित नाप-तौल की एक समान पद्धति शुरू की। अंतत: 1815 ई. में वाटरलू में उसकी हार हुई।

प्रश्न 3- फ्रांसीसी समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए क्या कानून बनाए गए थे?

उत्तर – फ्रांसीसी समाज में; शुरूआत में क्रांतिकारी सरकार ने महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए कई कानून बनाए जैसे-

(i) सभी लड़कियों के लिए विद्यालय जाना अनिवार्य बना दिया गया।

(ii) उनके पिता उनकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती उनका विवाह नहीं कर सकते थे।

(iii) तलाक को वैध माना गया और स्त्रियाँ व पुरुष दोनों इसकी पहल कर सकते थे।

(iv) स्त्रियों को अब नौकरी के लिए प्रशिक्षित किया जाने लगा। वे छोटे उद्योग भी चला सकती थीं।

प्रश्न 4- फ्रांसीसी क्रांति का तात्कालिक कारण क्या था?

उत्तर – खराब फसल के कारण रोटी की कीमतें आसमान छू रही थीं, आटे की कीमतें बढ़ गई थीं, बेकरी वाले भी कभी- कभी स्थिति का शोषण करते थे, और पूर्ति को रोक देते थे। बेकरी पर घंटों लाइनों में खड़े-खड़े, गुस्से में भरी औरतों की भीड़ दुकानों पर टूट पड़ी। इसी समय, राजा ने सेना को पेरिस में घुसने का आदेश दिया और 14 जुलाई, को आंदोलनकारी भीड़ ने उग्र रूप धारण किया और बास्तील को नष्ट कर दिया।

प्रश्न- 5.  फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण क्या थे?

उत्तर- फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे.

(i) लुई सोलहवें का अत्याचारी शासन – लुई सोलहवाँ 1774 में फ्रांस का शासक बना। उसने फ्रांस के राज खजाने को युद्धों में गंवा दिया। अपने दिन-प्रतिदिन के ऐशोआराम और फिजूल खचों को पूरा करने के लिए उसने लोगों पर टैक्स (कर) बढ़ा दिए जिन्हें सिर्फ तृतीय एस्टेट को ही अदा करना होता था।

(ii) फ्रांसीसी समाज का विभाजन – फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में विभाजित था, प्रथम, द्वितीय और तृतीय एस्टेट। इनमें प्रथम और द्वितीय एस्टेट में कुल जनसंख्या का 10% था और इसमें पादरी और कुलीन शामिल थे। उन्हें सभी विशेषाधिकार प्राप्त थे शेष 90% जनसंख्या तृतीय एस्टेट की थी जो सभी प्रकार के प्रत्येक और अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करते थे। इस प्रकार के भेदभाव ने तृतीय एस्टेट को क्रांति के लिए उकसाया।

(iii) बढ़ती कीमतें – फ्रांस की जनसंख्या बढ़ गई थी खाद्यान्न की मांग बढ़ने के साथ ही ब्रेड की कीमतें तीव्रता से बढ़ने लगी जिसे गरीब लोग नहीं खरीद पाते थे। अत: गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ने लगी फसलस्वरूप विद्रोह हुआ।

(iv) दार्शनिकों की प्रेरणा – दार्शनिक; जैसे- जॉन लॉक, रूसो और मांटेस्क्यू ने एक ऐसे समाज के विचार का प्रचार किया जहाँ लोग आजादी, समान कानून, समान अवसर का उपभोग कर सकें। उनके विचार ने फ्रांस के आम आदमी को प्रभावित किया।

(v) मध्यम वर्ग की भूमिका – 18वीं सदी में एक नए वर्ग का उदय हुआ जिसे मध्यम वर्ग के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने अपनी संपत्ति, अपने व्यापार का प्रसार करके बनाई। यह व्यापार निर्मित वस्तुओं का था। इस वर्ग में अन्य कर्मचारी; जैसे- वकील, प्रशासनिक कर्मचारी भी शामिल थे। इन सभी का मानना था कि समाज में किसी भी वर्ग को जन्म के आधार पर विशेषाधिकार नहीं मिलने चाहिए।

प्रश्न  6. “जीवन निर्वाह संकट”या”आत्म निर्वाह संकट”क्या था? फ्रांस में ये संकट आने के क्या कारण थे?

उत्तर – जीवन निर्वाह या आत्म निर्वाह संकट एक ऐसी स्थिति थी जिसमें जीविका के आधारभूत साधन संकट में थे। जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ खाद्यान्न की माँग में वृद्धि होने नि लगी। फ्रांस की जनसंख्या 23 लाख से 25 लाख हो गई थी।खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ती मांग के अनुरूप नहीं बढ़ रहा था। अतः ब्रेड की कीमत बढ़ने लगी जो कि अधिकांश जनता के लिए भोजन का मुख्य हिस्सा थी। अधिकांश मजदूर फैक्ट्रियों में मजदूरों के से रूप में काम करने लगे, जिनके मालिक उनकी मजदूरी नियत करते थे। लेकिन ये मजदूरी कीमत वृद्धि के साथ मेल नहीं खाती थी। अत: अमीर-गरीब के बीच की खाई बढ़ती गई। जब सूखे और ओले के कारण फसल नष्ट हो गई तो दशा और भी खराब हो गई थी। इसने आत्म निर्वाह संकट की परिस्थितियाँ तैयार कर दी, जो कि फ्रांस के पुराने शासन में निरंतर होता रहा।

प्रश्न -7.  फ्रांसीसी क्रांति के पश्चात् फ्रांस के नागरिकों को किस प्रकार की स्वतंत्रता दी गई?

उत्तर – (i) बास्तील के विध्वंस के पश्चात् सन् 1789 में जो सबसे महत्वपूर्ण कानून अस्तित्व में आया, वह था-सेंसरशिप की समाप्ति।

(ii) प्राचीन राजतंत्र के अंतर्गत सभी लिखित सामग्री और सांस्कृतिक गतिविधियों की पुस्तक, अखबार, नाटक को राजा के सेंसर अधिकारियों द्वारा पास करने के उपरांत ही उन्हें प्रकाशित या मंचित किया जा सकता था।

(iii) अब अधिकारों के घोषणा-पत्र ने भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नैसर्गिक अधिकार घोषित कर दिया।

(iv) फ्रांस के शहरों में अखबारों, पर्यों, किताबों एवं छपी हुई तस्वीरों की बाढ़ आ गई जहाँ से वह तेजी से गाँव तक जा पहुँची जिनमें फ्रांस में घट रही घटनाओं एवं परिवर्तनों का ब्यौरा होता था।

(v) प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ यह था कि किसी भी घटना पर परस्पर विरोधी विचार भी व्यक्त किए जा सकते थे। प्रिंट माध्यम का उपयोग करके एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को अपने दृष्टिकोण से सहमत कराने की कोशिश की।

प्रश्न 8. “डिरेक्ट्री” क्या थी? इसे फ्रांस से क्यों हटाया गया?
उत्तर – जैकोबिंस के पतन के बाद, एक नया संविधान  बनाया गया जिसने संपत्तिहीन लोगों को मताधिकार देने से इनकार कर दिया। इसने दो निर्वाचित विधायी परिषदें बनाई जिन्होंने एक ”   नई डायरेक्टरी को नियुक्त किया, डिरेक्ट्री एक कार्यपालिका थी जो पाँच सदस्यों से बनी थी। यद्यपि डिरेक्ट्री के भी विधायी परिषद् से मतभेद थे इसीलिए अंत में इसे भी भंग कर दिया गया। इसके साथ फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई जिसने एक सैनिक तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट के उदय को दिशा दी।

Chapter ―2
यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

इस chapter से आपके प्रश्न पत्र में 2 अंको के 2 प्रश्न तथा 2 वस्तुनिष्ट प्रश्न पूछे जायँगे। अर्थात इस chapter से आपको पूरे 6 अंक प्राप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 1.  ड्यूमा क्या था?

उत्तर ड्यूमा – यह एक निर्वाचित परामर्श देने वाली संसद थी जिसका गठन ज़ार ने 1905 की रूसी क्रांति के दौरान किया था।

प्रश्न-2.  रैडिकल किन्हें कहा जाता था?

उत्तर – रैडिकल वह लोग थे जो ऐसी सरकार चाहते थे जो देश की आबादी के बहुमत के समर्थन पर आधारित हो। ये लोग समाज या व्यवस्था में मौलिक (मूलभूत) परिवर्तन (बदलाव) लाना चाहते थे।

प्रश्न -3. रूढ़िवादियों के क्या आदर्श थे?

उत्तर – रूढ़िवादी; रैडिकल और उदारवादी दोनों का विरोध करते थे। वे चाहते थे कि अतीत का सम्मान किया जाए तथा बदलाब की प्रक्रिया धीमी हो।


प्रश्न- 4. रॉबर्ट ओवेन कौन था?

उत्तर – रॉबर्ट ओवेन इंग्लैंड का एक जाना-माना उद्योगपति था। उसने इंडियाना (अमेरिका) में नए समन्वय के नाम से एक नए समुदाय की रचना की।


प्रश्न – 5. रूसी क्रांति क्या है?

उत्तर – फरवरी, 1917 में राजशाही के पतन और अक्टूबर की घटनाओं को ही सामान्यतः रूसी क्रांति कहा जाता है।


प्रश्न 6. 1905 में रूस में हुई क्रांति का तात्कालिक कारण क्या था?

उत्तर – खूनी रविवार वह घटना थी जिससे 1905 की रूसी क्रांति की शुरूआत हुई। इस घटना में 100 से ज्यादा मजदूर मारे गए तथा 300 से अधिक मजदूर घायल हुए।


प्रश्न- 7. ‘पेत्रोग्राद सोवियत’ क्या था?

उत्तर – सोवियत उसी इमारत में जमा हुए जहाँ ड्यूमा की बैठक हुआ करती थी। इसे ही पेत्रोग्राद सोवियत’ के नाम से जाना गया।

प्रश्न- 8. ‘वोल्शेविक पार्टी’को क्या नया नाम दिया गया? 

उत्तर– अपने रैडिकल उद्देश्यों को स्पष्ट करने के लिए बोल्शेविक पार्टी ने अपना नया नाम कम्युनिस्ट पार्टी’ रख लिया।

प्रश्न-9. स्टालिन कौन था?

उत्तर-स्टालिन लेनिनका घनिष्ठ सहयोगीथा तथा उसमें वह लेनिन की मृत्यु के पश्चात् सत्ता में आया। उसने खेती के लिए आपात उपायों को शुरुआत की।

प्रश्न- 10. ‘कोलखोज’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर- यह सामूहिक खेत थे; किसान इन जमीनों पर कार्य करते थे और मुनाफे को आपस में बाँट लेते थे। सामूहिकीकरण का विरोध करने वालों को सख्त सजा दी जाती थी।

प्रश्न -11. बोल्शेविकों और रूसी सेना (गैर-बोल्शेविक) के बीच गृह युद्ध के क्या कारण थे?

उत्तर – जब बोल्शेविकों ने भूमि का बँटवारा करने का आदेश दिया, रूसी सेना विभाजित हो गई। गैर-बोल्शेविक समाजवादी, उदारवादी और राजशाही के समर्थकों ने इसका विरोध किया। उनके नेता दक्षिणी रूस की तरफ चले गए और उन्होंने अपनी टुकड़ियाँ संगठित की ताकि बोल्शेविकों से लड़ा जा सके। इन टुकड़ियों और बोल्शेविकों ने एक गृह युद्ध लड़ा जिसमें लूट, डकैती, अकाल आदि आम हो गए।

Chapter – 3

नात्सीवाद और हिटलर का उदय

इस chapter से आपके प्रश्न पत्र में 3 अंको का 1 प्रश्न तथा 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछा जायेगा। अर्थात इस chapter से आपको पूरे 4 अंक मिल सकते हैं।

प्रश्न-1. हिटलर का अंत कैसे हुआ?

उत्तर-हिटलर एवं उसके प्रचार मंत्री ग्योबल्स ने बर्लिन के एक बंकर में पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर ली थी।

प्रश्न-2. नात्सीवाद क्या था?

उत्तर – यह हिटलर द्वारा प्रस्तुत एक प्रणाली थी, जो दुनिया और राजनीति के बारे में एक संपूर्ण व्यवस्था, विचारों की एक पूरी संरचना थी।

प्रश्न – 3. “नवंबर के अपराधी” के नाम से किसे पुकारा गया?

उत्तर– वाइमर गणराज्य के सहयोगियों मुख्यत: समाजवादियों, कैथोलिक तथा डेमोक्रेटों को “नवम्बर के अपराधी” कहकर उनका मजाक उड़ाया गया।

प्रश्न -4.  वाइमर गणराज्य का अनुच्छेद-48′ क्या था?

उत्तर– यह राष्ट्रपति को आपातकाल लागू करने, नगरिक अधिकारों को रद्द करने तथा अध्यादेशों के द्वारा शासन को शक्ति देता था।

प्रश्न-5.  अग्नि अध्यादेश क्या है?

उत्तर– 28 फरवरी 1933 के अग्नि अध्यादेश द्वारा अभिव्यक्ति, प्रेस तथा सभा करने जैसे नागरिक अधिकारों को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया। वाइमर संविधान में इन अधिकारों का काफी महत्व था।

प्रश्न- 6. गैस चैंबरों को क्या कहा जाता था?

उत्तर- गैस चैंबरों को संक्रमण मुक्ति-क्षेत्र कहा जाता था। गैस चैंबर स्नानघर जैसे दिखते थे तथा उनमें नकली फव्वारे भी लगे थे।

प्रश्न 7.  प्रथम विश्व युद्ध के बाद किस प्रकार जर्मन संसद की स्थापना हुई?

उत्तर-जर्मनी की हार और सम्राट के गद्दी त्याग देने से, संसदीय दलों को जर्मन सरकार के पुनःनिर्माण का अवसर मिला। राष्ट्रीय सभा नेवाइमर में मीटिंग की और एकसंघात्मक ढाँचे के साथ लोकतांत्रिक संविधान का निर्माण किया। पदाधिकारियों ने जर्मन संसद’राइवस्टाग का निर्वाचन किया; इसका आधार समान और सार्वभौम मतदान था जिसमें सभी वयस्क तथा महिलाएं भी थीं।

प्रश्न- 8. हिटलरकी विदेश नीति क्या थी?

उत्तर -विदेश नीति में भी हिटलर को बहुत जल्द ही सफलता मिली। 1933 में उसने ‘लीग ऑफ नेशन’ से स्वयं को बाहर किया। 1936 में राइनलैंड पर पुनः कब्जा किया। 1938 में जर्मनी और ऑस्ट्रिया को ‘एक लोग एक साम्राज्य और एक नेता’ के नारे के अंतर्गत एकीकृत किया। फिर वह पश्चिमी जर्मनी की तरफ गया चेकोस्लोवाकिया’से सुदेतनलैंड को छीना। इस सब में उसे इंग्लैंड का गुप्त समर्थन प्राप्त था। जो यह समझता था कि वर्साय की संधि बहुत कठोर थी। इन सफलताओं ने उसे देश और विदेश में देश के सम्मान को पुनः प्राप्त करने में सहायता दी।

प्रश्न 9.  -विशेषाधिकार अधिनियम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-3 मार्च, 1993 को प्रसिद्ध विशेषाधिकार अधिनियम पास हुआ। इस अधिनियम ने जर्मनी में तानाशाही स्थापित कर दी। इस अधिनियम द्वारा हिटलर को वे सारी शक्तियाँ मिल गई जिनसे वह संसद को हटाकर एक अध्यादेश के जरिए शासन कर सकता था। नात्सीदल और इसके सहयोगी दलों के अतिरिक्त सभी दलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, ट्रेड यूनियनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया राज्य का अर्थव्यवस्था पर भी पूरा नियंत्रण हो गया। मीडिया, सेना और न्यायव्यवस्था भी इसके नियंत्रण में थी।

प्रश्न- 10.नात्सी विद्यालयों में किस प्रकार की शिक्षा दी जाती थी?

उत्तर-(i) अवांछित बच्चे-यहूदी, जिप्सी, विकलांग आदि को स्कूल से बाहर फेंका जाता था। 

(ii) नात्सियों के जातिगत विचारों को सिद्ध करने के लिए जाति-विज्ञान पढ़ाया गया। 

(iii) बच्चों को आज्ञाकारी और मिलनसार होने, यहूदियों से नफरत करने और हिटलर की पूजा करने की शिक्षा दी गई। (iv) बाक्सिंग की शिक्षा दी गई क्योंकि हिटलर का विश्वास था कि इससे बच्चे लोहे के दिल जैसे मजबूत और बलवान बनेंगे।

प्रश्न 11. – प्रथम विश्व युद्ध का यूरोपीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – प्रथम विश्व युद्ध यूरोपीय समाज और राजनीति पर गहरी छाप छोड़ गया जिसके प्रभाव को निम्न प्रकार समझा जा सकता है-

(i) सैनिकों को नागरिकों पर तैनात कर दिया गया।

(ii) राजनीतिज्ञ और प्रचारक पुरुषों के बहादुर, मजबूत और आक्रामक होने की आवश्यकता पर जोर दिया जाने लगा।

(iii) मीडिया ने खाइयों (खंदकों) के जीवन का गौरवगान किया लेकिन वास्तव में वहाँ सैनिक बहुत बुरी दशा में रह रहे थे।

(iv) वे विषैली गैसों का सामना कर रहे थे और दुश्मनों की गोलियों का सामना कर रहे थे।

प्रश्न 12.  – अमेरिका किस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध में कूदा ?

उत्तर – अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में फँसने से लगातार बचता रहा क्योंकि वह पहले विश्व युद्ध से उत्पन्न हुई आर्थिक संकट की स्थिति को फिर से झेलना नहीं चाहता था लेकिन वह लंबे समय तक इस युद्ध से दूर न रह सका। जापान पूरब में अपनी शक्ति का प्रसार कर रहा था। उसने फ्रेंच-इंडो-चाइना पर कब्जा कर लिया था और प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसैनिक ठिकानोंपर आक्रमण की योजना बना ली थी। जब जापान ने हिटलर को समर्थन देते हुए पर्ल हार्बर पर अमेरिकी ठिकानों पर बमबारी की तो अमेरिका भी दूसरे विश्व युद्ध में कूद पड़ा। यह युद्ध मई 1945 में खत्म हुआ जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर बमबारी की और हिटलर भी पराजित हो चुका था।

प्रश्न 13.  जर्मनी पर आर्थिक संकट का क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर-(i) आर्थिक संकट ने लोगों में गहरी बेचैनी और डर उत्पन्न कर दिया।

(ii) मध्यवर्ग विशेष तौर पर वेतनभोगी कर्मचारी एवं पेंशनधारियों ने मुद्रा के अवमूल्यन से अपनी बचत को सिकुड़ते हुए देखा।

(iii) छोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग तथा खुदरा व्यापारियों के रोजगार ठप्प होने से परेशान थे।

(iv) समाज के इन तबकों को सर्वसाधारण का भय सता रहा था। कामगारों को मजदूर बनने या बेरोजगार हो जाने का डर सता रहा था।

(v) सिर्फ संगठित मजदूरों की ही हिम्मत नहीं टूटी थी परन्तु बेरोजगारी उनकी मोल भाव की क्षमता को चोट पहुंचा रही थी।

(vi) बड़े व्यवसाय संकट में थे।

(vii) किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट के कारण परेशान था। अपने बच्चों के पेट भर पाने में असफल औरतों का दिल भी डूबा जा रहा था।

Chapter ― 4
वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

इस chapter से आपके प्रश्न पत्र में केवल 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न तथा 2 अंक का एक प्रश्न पूछा जाएगा।

प्रश्न- 1. हमारी दिन-प्रतिदिन की जिंदगी में वनों के क्या उपयोग हैं?

उत्तर – वन हमारी जिंदगी के अभिन्न अंग हैं। वनों से निम्नलिखित लाभ (उपयोग) हैं –

(i) वनों से हमें किताब का कागज़, मेज़-कुर्सियाँ, दरवाजे- खिड़कियाँ, वे रंग जिनसे आपके कपड़े रंगे जाते हैं, मसाले, टॉफ़ी के सेलोफ़ेन रैपर, बीड़ियों के तेंदू पत्ते, गोंद, शहद, कॉफ़ी, चाय और रबड़ इत्यादि प्राप्त होता है।

(ii) साथ ही चॉकलेट में इस्तेमाल होने वाला तेल जो साल के बीजों से निकलता है, खाल से चमड़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाला चर्मशोधक या दवाओं के रूप में इस्तेमाल होने वाली जड़ी- बूटियाँ भी वनों से ही प्राप्त होती हैं।

प्रश्न – 2. वन विनाश के बाद ब्रिटिशों द्वारा किन नकदी फसलों की खेती कराई गई?

उत्तर – ब्रिटिशों द्वारा जूट, गन्ना, गेहूँ और कपास जैसी में वाणिज्यिक फसलों की खेती ब्रिटिश यूरोप की बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण के लिए कराई गई।

प्रश्न -3.  ब्रिटिशों ने ‘अपराधी कबीलों’ को कौन-सा कार्य करने के लिए बाध्य किया?

उत्तर – उन्हें ब्रिटिशों की निगरानी में फैक्ट्रियों, खानों और बागों में काम करने के लिए मजबूर किया गया।

प्रश्न 4. चाय बगानों में काम करने के लिए किन आदिवासियों की भर्ती की गयी?

उत्तर – झारखंड में संथाल और उराँव तथा छत्तीसगढ़ में गोंड आदिवासी समुदाय चाय वाले बागानों पर काम करने के लिए भर्ती किए गए।

प्रश्न -5.  बस्तर में रहने वाले आदिवासी समुदायों के नाम लिखिए।

उत्तर – मारिया और मुरिया गोंड, धुरवा, भतरा और हलबा बस्तर में रहने वाले आदिवासी समुदाय हैं।


प्रश्न 6.- सुरोंतिको सामिन कौन था?

उत्तर वह जावा के रान्दुब्लाटुंग गाँव का निवासी था जिसने जंगलों पर राजकीय मालिकाने पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया।

प्रश्न- 7. ‘भस्म करो भागो’ नीति क्या थी?

उत्तर– जावा में जापानियों के कब्जे से पहले डचों ने ‘भस्म करो भागो’ नीति अपनाई। इसके तहत उन्होंने आरा मशीनों एवं सागौन के विशाल लट्ठों को जला दिया ताकि वे जापानियों के हाथ न लगें।

प्रश्न -8.  झूम कृषि से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- झूम कृषि पद्धति में, जमीन का एक टुकड़ा साफ कर लिया जाता है और जब उसकी उर्वरता समाप्त हो जाती है, वे किसी अन्य वनक्षेत्र में चले जाते हैं इसे घुमंतू कृषि भी कहा जाता है।

प्रश्न -9.  उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन के तीन मुख्य लक्षण बताएँ।

उत्तर – उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन के तीन मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं-

(i) इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है ये भारत के विशाल क्षेत्र में फैले हुए हैं।

(ii) इन वनों में 70 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर के बीच वर्षा होती है।

(iii) ग्रीष्मकाल में छह से आठ सप्ताह के लिए पेड़ों के पत्ते झड़ जाते हैं।

प्रश्न 10. वन अधिनियम 1818 के आधार पर वनों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया ?

उत्तर   – 1865 में वन अधिनियम के लागू होने के बाद इसमें दो बार संशोधन किए गए – पहले 1878 में और फिर 1927 में।1878 वाले अधिनियम में वनों को तीन भागों में बाँटा गया- आरक्षित, सुरक्षित व ग्रामीण वन, सर्वश्रेष्ठ वनों को ‘आरक्षित वन’ कहा गया। गाँव वाले इन जंगलों से अपने प्रयोग के लिए कुछ भी नहीं ले सकते थे। वे घर बनाने या ईंधन के लिए सिर्फ सुरक्षित या ग्रामीण वनों से ही लकड़ी ले सकते थे।

प्रश्न -11. अंग्रेजों ने भारत में वन महानिदेशक क्यों नियुक्त किया?

उत्तर – जहाज निर्माण और रेल की पटरियाँ बिछाने के लिए अंग्रेजों को जंगलों की जरूरत थी।अंग्रजों को इस बात की चिंता थी कि स्थानीय लोगों द्वारा जंगलों का उपयोग व व्यापारियों द्वारा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से जंगल नष्ट हो जाएँगे।इसलिए उन्होंने डायट्रिच चैंडिस नामक जर्मन विशेषज्ञ को वन संरक्षण पर मशवरे के लिए बुलाया और उसे देश का पहला वन महानिदेशक नियुक्त किया।

प्रश्न -12.  स्थानान्तरी कृषि क्या है? यूरोपियनों ने इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया?

उत्तर – वह कृषि जिसमें जंगल के हिस्सों को निरंतर काटा और जलाया जाता है और पहली मानसूनी वर्षा से पहले राख में ही बीज बो दिये जाते हैं स्थानांतरी कृषि कहलाती है। निम्नलिखित कारणों से यूरोपीय लोगों ने इस पर प्रतिबंध लगाए –

 (i) वे जंगलों के लिए इसे नुकसानप्रद मानते थे।

 (ii) उनका मानना था कि कृषि भूमि, रेलवे के लिए आवश्यक लकड़ी को उगाने में असमर्थ हो जाती है। 

Note- chapter 5 से केवल 2 वस्तुनिष्ट प्रश्न पूछे जायँगे।

दोस्तों हमारी पोस्ट को पूरा  पढ़कर अपनी तैयारी बनाये और बेहतर साथ ही इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करे तथा सभी solution पाने के लिए हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहें।हमारे साथ बने रहने के लिए धन्यवाद……

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