एमपी बोर्ड क्लास 9 हिंदी त्रैमासिक पेपर 2021 | 9th Hindi trimasik paper solution

0

एमपी बोर्ड क्लास 9 हिंदी त्रैमासिक पेपर 2021 | 9th Hindi trimasik paper solution

MP board 9th hindi trimasik paper full Solution 2021-22 दोस्तों आज हम आपके लिए क्लास 9th की हिंदी के त्रिमासिक  परीक्षा के लिए most important question बताने वाले हैं सलूशन के साथ यदि आपको समझ नहीं आ रहा है कि आप अपनी त्रिमासिक परीक्षा की तैयारी किस प्रकार करें, कौन-कौन से क्वेश्चन  इंपोर्टेंट है और आप गूगल पर इंपॉर्टेंट क्वेश्चन सर्च कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आ गए हैं क्योंकि आज हम आपको इस पोस्ट में त्रिमासिक परीक्षाओं के लिए most important question बताने वाले हैं जो आपकी त्रिमासिक और वार्षिक दोनों परीक्षाओं की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।


Class 12th त्रिमासिक परीक्षा का syllabus ―

त्रिमासिक परीक्षाओं के आते ही सभी बच्चों के मन में एक ही प्रश्न होता है कि हमारी परीक्षाओं में कितना सिलेबस आएगा आपकी त्रि-मासिक परीक्षाओं में कुल सिलेबस का 33% सिलेबस पूछा जाता है जिसमें आप से किन-किन अध्याय से प्रश्न पूछे जाएंगे आपके इस सवाल का स्पष्ट करने के लिए यहां पर  त्रिमासिक परीक्षा के लिए  9th का विज्ञान का syllabus उपलब्ध है जो कि इस प्रकार है―

एमपी बोर्ड क्लास 9 हिंदी त्रैमासिक पेपर 2021 | 9th Hindi trimasik paper solution

Class 9th Hindi trimasik paper most important question (त्रैमासिक परीक्षा) ― 

विषय- हिन्दी

क्षितिज

पाठ – 1 
दो बैलों की जोड़ी

प्रश्न 1-  गधे के विषय में लेखक किस अनिश्चय की स्थिति में है और क्यों?

उत्तर – गधे के विषय में लेखक की अनिश्चयपूर्ण स्थिति इसलिए है क्योंकि अत्यधिक मूर्ख को मूर्ख न कहकर गधा कहा जाता है। क्या गधा सचमुच ही इतना बेवकूफ़ होता है कि निपट मूर्ख को गधा कह दिया जाता है या गधे के सीधेपन के कारण उसे ऐसा कहा जाने लगा।

प्रश्न 2- गाय और कुत्ता गधे से किस तरह भिन्न है?

उत्तर – गाय और कुत्ता दोनों की ही गणना सीधे-सादे पशुओं में की जाती है। पर ब्याई गाय के बच्चे को जैसे ही कोई छूता है, वह उसे मारने के लिए सींग उठा देती है। इसी प्रकार कुत्ता भी क्रोधित होने पर आदमी को काट खाता है। इसके विपरीत गधा विरोध किए बिना सब कुछ सहता जाता है और कभी क्रोधित नहीं होता है। इस तरह गाय और कुत्ता गधे से सहनशीलता के मामले में भिन्न हैं।

प्रश्न 3- हीरा और मोती की ठठरियाँ क्यों निकल आई थी?

उत्तर – हीरा और मोती एक सप्ताह एक कांजीहौस में बंधे रहे। उन्हें वहाँ कुछ भी खाने के लिए नहीं दिया जाता था। पूरे दिन में मात्र एक बार पानी पिलाया जाता। इस दुर्दशा के परिणामस्वरूप उनकी ठठरियाँ निकल आई थीं।

प्रश्न 4- बैल अपना असंतोष किस प्रकार व्यक्त करता है?

उत्तर – बैल अपना असंतोष अपने मालिक पर सींग उठाकर या उसका काम न करके प्रकट करता है। इसके अलावा वह कई अन्य तरीके से भी अपना असंतोष प्रकट करता है।

प्रश्न 5- मनुष्य किस गुप्त शक्ति से वंचित हैं?

उत्तर – मनुष्य बिना बात-चीत किए एक-दूसरे के मन के भाव-विचार नहीं जान सकता है। वह इस गुप्त शक्ति से वंचित है।

प्रश्न 6. छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?

उत्तर– छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम उमड़ने के निम्नलिखित कारण हैं –

(i) छोटी बच्ची को उसकी सौतेली माँ सताती थी, यहाँ गया हीरा-मोती पर अत्याचार कर रहा था।

(ii) छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। उसे अपनों से बिछड़ने के दुख का ज्ञान था।

(iii) छोटी बच्ची माँ के मरने को अपनादुर्भाग्य मानती थी। वह हीरा-मोती को उनका घर छूटने के कारण अपने जैसा ही अभागा समझती थी।

(iv) छोटी बच्ची छल-प्रपंच से अभी दूर थी। उसका निश्छल मन हीरा-मोती पर अत्याचार देख द्रवित हो गया और प्रेम उमड़ आया।

पद्य खंड

पाठ  – 9   
सखियां एवं सबद

प्रश्न 1. ‘मानसरोवर’ से कवि का क्या आशय है?

उत्तर – मानसरोवर से कवि का आशय मनरूपी पवित्र सरोवर से है जिसमें मनुष्य के मन में स्वच्छ विचार रूपी जल भरा है।

प्रश्न 2. इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है?

उत्तर – इस संसार में सच्चा संत वही कहलाता है जो लोभ, मोह-माया, अपने-पराए जाति-पाँति के बंधन एवं मत सम्प्रदाय से ऊपर उठकर भक्ति करते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य प्रभु की प्राप्ति होती है।

प्रश्न 3. मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है?

उत्तर – मनुष्य ईश्वर को मन्दिर, मस्जिद, पूजा स्थल, काबा-काशी, योग-वैराग्य तथा अनेक प्रकार की धार्मिक क्रियाओं में ढूँढ़ता फिरता है।

प्रश्न 4. कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?

उत्तर – कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए निम्नलिखित प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है – 

देवालयों, मंदिरों में ईश्वर मिलता है, ईश्वर मस्जिद में उपासना करने से मिलता है, काबा (हज) करने तथा काशी-कैलाश की तीर्थ यात्रा करने से ईश्वर मिलता है, कर्मकांड या भिन्न- भिन्न उपासना पद्धतियों के पालन से ईश्वर मिलता है, योगी हो जाने या संन्यास ग्रहण करने से ईश्वर मिलता है इन सभी प्रचलित विश्वासों का खण्डन करते हुए कबीर ने इन्हें केवल मिथ्याडंबर बताया है तथा कबीर ईश्वर को सहज भक्ति से पाने की बात कहते हैं।

प्रश्न 5. ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर – ज्ञान की आँधी से भक्त के भ्रम, माया, तृष्णा, कुबुद्धि आदि नष्ट हो जाते हैं, वह प्रेम जल से सराबोर हो जाता है, वह आत्महित नहीं सोचता, उसका मोह भी दूर हो जाता है। ज्ञान का प्रकाश उदित होते ही मन ईश्वरीय आलोक से प्रकाशित हो जाता है।

ब्रज कोर्स

पाठ  ― 1  
सूरज का ब्याह

प्रश्न 1. हकीकत में किस्मत किसे कहते हैं?

(क) सेहत।                    (ख) रहमत 

(ग) सहमत।                   (घ) मेहनत

उत्तर –  मेहनत

प्रश्न 2. जो अपनी किस्मत रचते हैं उन्हें क्या कहते हैं?

(क) साहसी          (ख) आलसी             (ग) रचयिता

उत्तर-   साहसी

प्रश्न 3. सच्ची खुशी का हकदार कौन है?

(क) खुशी देने वाला          (ख) दुःख देने वाला 

(ग) सुख सहने वाला          (घ) दुःख सहने वाला

उत्तर- (घ) दुःख सहने वाला

प्रश्न 4. किसका अंधकार मिटाना है?

(क) हताशा का                (ख) आशा का 

(ग) निराशा का                 (घ) भाषा का

उत्तर – हताशा का

प्रश्न 5. किसे छोड़ने पर किस्मत बनती है?

(क) भाग्य की दुहाई।             (ख) कर्म की दुहाई 

(ग) धर्म की दुहाई                 (घ) गर्म की दुहाई

उत्तर-    (क) भाग्य की दुहाई

प्रश्न 6. जो रूक गया, मिट गया उसका……...

(क) हस्ती                            (ख) व्यवहार 

(ग)  नामों-निशाँ।                   (घ) नाम

उत्तर-  (ग) नामों निशा 

प्रश्न 7   निम्नलिखित शब्दों में कुछ तद्भव और कुछ तत्सम शब्द सम्मिलित हैं। इन्हें चुनकर अलग-अलग कीजिए।

(हस्त , मिट्टी, साग, मौर, भीत, स्वप्न, मृतिका, शाक, भित्ति, चन्द्र, समुद्र, झरना, श्रृंखला, हाथ, गौरा  सपना, हस्ति,चाँद , विद, पाँत, मछली, कान, हिरन)

तद्भव– मिट्टी, साग, मौर, भीत, चाँद समुद्र, झरना,  हाथ, गौरा,  सपना, मछली, कान, हिरन

तत्सम– हस्त, स्वप्न, शाक, भित्ति, चन्द्र श्रृंखला हस्ति विद, पाँत, मृतिका

    पाठ 2    
मेजबान

प्रश्न 1.  दिए गए संज्ञा शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करें।

शब्द –                वाक्यों में प्रयोग

मेहमान  – राहुल के घर मेहमान आये हैं।

पापड  –  उसकी पत्नी मेहमानों को पापड़ परोसना भूल गई।

थाली  – बंशी ने मेहमानों को पकवानों की थाली परोसी।

पत्नी – उसकी पत्नी बहुत खुश हुई।

भोजन – उसने भोजन में कई व्यंजन बनाए।

प्रश्न 2.  निम्नलिखित में से विशेषण, विशेष्य को छाँटकर लिखें।

जहरीला साँप, करारे पापड़, गर्म-गर्म रोटी, खास मेहमान

उत्तरविशेषण – जहरीला , करारे , गर्म -गर्म,  खास।

            विशेष्य –  सांप , पापड़, रोटी, मेहमान।

प्रश्न 3.  अंतरिक्ष यात्री कौन होते हैं?

उत्तर – साइंटिस्ट अंतरिक्ष यात्री साइंटिस्ट वैज्ञानिक होते हैं जो अपने हर काम में पारंगत होते हैं।

प्रश्न4. अंतरिक्ष यात्री की उम्र क्या होनी चाहिए?

उत्तर – अंतरिक्ष यात्री की उम्र 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए वह स्वस्थ शरीर का व्यक्ति होना चाहिए।

प्रश्न 5.  भारत के अंतरिक्ष केन्द्र का नाम क्या है?

उत्तर –  भारत के अंतरिक्ष केंद्र का नाम ISRO- indian space research organization है।

प्रश्न 6. विश्व का सबसे बड़ा अंतरिक्ष संस्थान कहाँ है? 

उत्तर – विश्व का सबसे बड़ा अंतरिक्ष संस्थान NASA है।

प्रश्न 7.रिक्त स्थान की पूर्ति करें।

(सुंदरता, प्रणेता दुश्मनों,जीत,असफल,अच्छा)

1.    …प्रणेता…दुष्ट व्यक्तियों के साथ-साथ आदर्श

भी होते हैं।

2. …दुश्मनों…के साथ मित्र भी होते हैं।

3. हर विरूपता के साथ…सुंदरता…भी होती है।

4. हार के साथ …जीत…की खुशियाँ मनाना।

5. धोखे से सफलता पाने से…असफल…होना सम्माननीय है।

6. बुरा है कौन और …अच्छा …है कौन?

पाठ ― 3
  पानी रे पानी

प्रश्न 1 .कोष्ठक में दिए गए शब्दों को उनके अर्थानुसार रिक्त स्थान में भरें- 

1. सूरज का तेज़ चारों ओर बिखरा हुआ है। (तेज, तेज़)

2. छत में चढ़ने के लिए जीना_चाहिए। (जीना, जीना)

3. उसने वह पुस्तक नीचे वाले खाना में रखी है । (खाना, खाना)

4. इस किले का राज_कोई नहीं जानता। (राज, राज)

5. पूरे कमरे को गुब्बारों से सज़ा दो। (सजा, सज़ा)

प्रश्न 2. इसी प्रकार आगे दिये गए शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखें-

शब्द

जल –   पानी , नीर, वारि

बादल – मेघ , अब्र, 

भोर – सुबह, प्रातः,सबेरा

सूर्य – दिनकर, भाष्कर, रवि

समुद्र – सागर , समंदर, सिंधु

हवा– वायु, पवन, समीर

नदी – सरिता, नीरा,

प्रश्न 3. इसी प्रकार आगे दिये गए शब्दों के विलोम शब्द लिखें 

शब्द

धरती – आकाश

लाभ – हानि 

दिन – रात

जीवन – म्रत्यु

पुण्य – पाप

देश – विदेश

पाठ  ―  4
 नमक का दरोगा

प्रश्न 1.  नमक का दरोगा  पाठ के लेखक कौन हैं

उत्तर  – मुंशी प्रेमचंद

प्रश्न 2. नमक का दरोगा पाठ से आपको क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – सदैव ईमानदारी से जीवन व्यतीत करना चाहिए।

प्रश्न 3. मासिक वेतन को पूर्णमासी का चाँद क्यों कहा गया है?

उत्तर – क्योंकि मासिक वेतन 1 दिन मिलता है और धीरे धीरे पूरा खत्म हो जाता है इसलिए मासिक वेतन को पूर्णमासी का चांद कहा गया है।

पाठ ― 5.
 डॉक्टर APJ अब्दुल कलाम 

प्रश्न 1. नीचे दी गई सूची में वैज्ञानिकों की खोज के अनुसार मिलान करें।

1. टेलीस्कोप – गेलिलियो

2. टेलीफोन –  अलेक्जेंडर ग्राहम बेल

3. नेपियर लघु गणक – . जॉन नैपियर

4. रेडियम – मेरी क्युरी

5. डायनामाइट – अल्फ्रेड नोबेल

6. गति के नियम – न्यूटन

प्रश्न 2.डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के दोस्तों के नाम लिखिए ।

उत्तर – रामानंद शास्त्री, अरविंदन और शिव प्रकाशन ।

प्रश्न 3- डॉक्टर कलाम की मां और दादी कैसे किस्से सुनाया करती थी?

 उत्तर–  डॉक्टर कलाम की मां और दादी सोते समय रामायण और पैगंबरों की किस्से सुनाया करती थी।

पाठ ― 9
 पण्डित जसराज

प्रश्न 1.निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों का उपयुक्त पर्यायवाची शब्द विकल्पों में से चुनिए :-

1. अचानक चारों ओर आग प्रज्ज्वलित हो गई

क) शोभा       (ख) अग्नि     (ग) समीर

2 उसके नेत्र में छोटा-सा तिनका चला गया।

क) अलक ख) कनक ग) नयन घ) हस्त

3. उसका मन आनंद से भर गया।

क) अलंकार (ख) अपूर्व ( ग) अभिमान  घ) उल्लास

4. हमें ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।

क) गणेश ख) महादेव ग) अनंग घ) परमात्मा

5. क्या कुछ याद आता है उनके बारे में।

क) स्मरण   (ख) स्मृति   (ग) स्मरणशक्ति  (घ) याद्दाश्त

पाठ― 10
  सतपुड़ा के घनें जंगल भवानी प्रसाद मिश्र

प्रश्न1. – सतपुड़ा के जंगलों की विशेषताएं लिखिये।

उत्तर –  कवि के अनुसार इस जंगल मे कई नदी नाले ओर झरने हैं बहुत से हिरण और पक्षी दल भी यहाँ हैं तथा हरि भरी वनस्पतियां है जिनसे यह बहुत सुंदर दिखता है।


पाठ ―11

 हेलेन केलर

प्रश्न 1. हेलेन केलर का जन्म कब और कहाँ हुआ था।

 उत्तर – 27 जून 1880 में अमेरिका में  तसकंबिया नामक छोटे से कस्बे में हेलेन केलर का जन्म हुआ।

प्रश्न 2.हेलेन केलर की माता तथा पिता का नाम लिखिए।

उत्तर-  हेलेन केलर की माता का नाम कैटरीन ऐडम्स केलर तथा पिता का नाम कैप्टन ऑर्थर था।

प्रश्न 3. हेलेन केलर कि गुरु ने किस प्रकार उनका उत्साहवर्धन किया?

उत्तर-  हेलेन केलर की गुनी एनी सुलीवन ने प्रेम धैर्य व लगन क परिचय देते हुए ना केबल उन्हें प्रशिक्षित किया अपितु उनकी अंधकार में जिंदगी में उमंग व उत्साह का संचार भी किया।

प्रश्न 4.  हेलेन केलर ने कौन-कौन सी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया।

उत्तर – हेलेन केलर ने लेटिन फ्रेंच और जर्मन भाषा का ज्ञान प्राप्त किया।

पाठ – 12

भाषा ज्ञान  ―  स्वर, व्यंजन

बहुविकल्पीय प्रश्नों में से उत्तर दीजिए-

1. दो …के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं।

(क) वर्णो (ख) स्वरों ( ग) शब्दों (घ) व्यंजनों

2. पावन का संधि-विच्छेद होगा-

क) पु+अन ख) पौ+वन ग) पो+वन घ) पो+अन

3. व्यंजन वर्णो से स्वर या व्यंजन का मेल होने पर उत्पन्न विकार को

(क) स्वर संधि (ख) व्यंजन (ग) यण संधि (घ) विसर्ग संधि

4.हिम+आलय हिमालय’ किस संधि का उदाहरण है-

क) दीर्घ संधि

ख) यण संधि

ग) व्यंजन सधि घ) स्वर संधि

अपठित गद्यांश

प्रश्न – नीचे लिखे गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(1)

 राम के चरित्र में परिवार, राष्ट्र और उच्चतम मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा की गई है। राम एक पारिवारिक आदमी के आदर्श हैं, जिसे परिवार संगठित करने के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ त्यागना पड़ता है, भावनाओं पर नियंत्रण रखना पड़ता है। वे एक ऐसे समाज के प्रणेता हैं, जिसमें समस्त गिरिजन, आदिवासी लोक जातियों व पिछड़े वर्ग का मेलजोल ही सामाजिक अनिवार्यता है। वे एक ऐसे पराक्रमी युवराज हैं जिन्होंने आंतरिक शांति संबंध दायित्व को जंगल की खाक छानकर भी पूर्ण किया है। अनेक संघर्षों का सामना करते हुए देश के सीमावर्ती उपद्रवकारी राक्षस साम्राज्य का दमन कर देश को सुरक्षित किया।

(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

(ख) राम के चरित्र में किसकी प्रतिष्ठा की गई है।

(ग) राम किस समाज के प्रणेता हैं?

(घ) ‘स्वार्थ’ शब्द का विलोम लिखिए।

(ङ) राम के पराक्रम को लिखिए।

उत्तर -(क)शीर्षक – ‘आदर्श पुरुष राम ‘

(ख) राम के चरित्र में उच्चतम मानवीय मूल्यों की स्थापना की गई है।

(ग) राम सामान्य व्यक्ति के आदर्श आदिवासी तथा पिछड़े वर्ग के प्रणेता हैं।

(घ) परमार्थ।

(ङ) आंतरिक शांति स्थापना के साथ देश के सीमावर्ती राक्षसों का विनाश किया।

(2)

जिस मनुष्य के हृदय में ईर्ष्या घर बना लेती है वह उन चीजों से आनंद नहीं उठाता जो उसके पास मौजूद हैं, बल्कि उन वस्तुओं से दुख उठाता है जो दूसरों के पास मौजूद हैं। वह अपनी तुलना दूसरों से करता रहता है और इस तुलना में अपने पक्ष के सभी अभाव उसके हृदय पर डंक मारते रहते हैं। डंक के इस दाह को भोगना कोई अच्छी बात नहीं है।मगर, ईर्ष्यालु मनुष्य करे भी तो क्या, आदत से लाचार होकर उसे यह वेदना भोगनी पड़ती है। ईर्ष्या का यही अनोखा वरदान है।

(क) उपर्युक्त गद्यांश का सटीक शीर्षक लिखिए।

(ख) ईर्ष्यालु व्यक्ति अपनी तुलना किससे करता है ?

(ग) ईर्ष्यालु व्यक्ति दुःखी क्यों रहता है ?

(घ) ‘लाचार’ शब्द के अर्थ लिखिए।

(ङ) मनुष्य’ शब्द के दो पर्यायवाची लिखिए।

उत्तर – (क) शीर्षक – ‘ईर्ष्या’।

(ख) ईर्ष्यालु व्यक्ति अपनी तुलना दूसरों से करता रहता है और इस तुलना में अपने पक्ष के सभी अभाव उसके हृदय पर डंक मारते हैं।

(ग) ईर्ष्यालु व्यक्ति इसलिए दुःखी रहता है क्यों कि वह उन चीजों से आनंद नहीं उठाता जो उसके पास मौजूद हैं बल्कि उन वस्तुओं से दुःख उठाता है जो दूसरों के पास मौजूद हैं।

(घ) लाचार – विवश, मजबूर।

(ङ)  मानव, नर।

अपठित पद्यांश 

प्रश्न- नीचे लिखे काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(1)

बहुत दिनों के बाद

अबकीमैंने जी भर देखी

पकी-सुनहली फसलों की मुस्कान

बहुत दिनों के बाद।

बहुत दिनों के बाद

अबकी मैं जी भरकर सुन पाया

धान कूटती किशोरियों की कोकिल कंठी तान

बहुत दिनों के बाद।

बहुत दिनों के बाद

अबकी मैं जी भर छू पाया

अपनी गवई पगडंडी की चंदनवर्णी धूल

बहुत दिनों के बाद।

प्रश्न -(क) कविता में बहुत दिनों के बाद’ का बार- बार उल्लेख क्यों किया गया है?

(ख) कवि को धान कूटती किशोरियों की तान कैसी लगी?

(ग)कवि ने अपनी किन-किन इंद्रियों को तृप्त किया?

(घ) कवि ने किसकी मुस्कान देखी? उसे वह मुस्कान कैसी लगी?

(ङ) गाँव की धूल’ की विशेषता लिखिए।

उत्तर – (क) कविता में बहुत दिनों के बाद’ का बार-बार उल्लेख इसलिए किया गया है क्योंकि कवि बहुत दिनों बाद अपने गाँव आया है। यहाँ का वातावरण उसे बहुत अच्छा लग रहा है।

(ख) कवि को धान कूटती किशोरियों की तान कोयल के समान सुरीली लगी।

(ग) कवि ने अपनी आँख, कान, नाक और त्वचा नामक इंद्रियों को तृप्त किया।

(घ) कवि ने सुनहले रंग के दानों वाली पकी फसलों की मुस्कान देखी। यह मुस्कान उसे बहुत अच्छी लगी। उसने जी भरकर इसका आनंद लिया।

(ङ) गाँव की धूल की विशेषता यह है कि वह चंदन के रंग जैसी है।

जीवन परिचय

लेखक परिचय
1. प्रेमचन्द

जीवन परिचय-प्रेमचन्द का वास्तविक नाम धनपतराय था। प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई, 1880 ई. को वाराणसी जिले के लमही ग्राम में हुआ था। शिक्षा विभाग में नौकरी करते हुए ये निरीक्षक हो गए। किन्तु नौकरी के कारण इनका लेखन-कार्य नहीं हो पाता था। इसलिये नौकरी छोड़कर इन्होंने अपना जीवन-साहित्य साधना में लगा दिया। 8 अक्टूबर, 1936 ई. को इनकी मृत्यु हो गई।

रचनाएँ – गोदान, कर्मभूमि, पंच परमेश्वर, बूढी काकी, बड़े घर की बेटी।

भाषा-शैली – प्रेमचन्द्र जी पहले उर्दू में लिखते थे परन्तु बाद में हिन्दी में लिखना आरंभ किया इसीलिए उनकी भाषा सरल, सीधी- सादी, चुस्त तथा मुहावरेदार है। इनकी शैली मैंजी हुई,स्वाभाविक एवं आकर्षक है। सरस और प्रवाहपूर्ण शैली का प्रयोग इनकी कहानियों में रोचकता प्रदान करता है।

साहित्य में स्थान-हिन्दी साहित्य जगत में प्रेमचन्दजी एक श्रेष्ठ कहानीकार एवं उपन्यास सम्राट के रूप में जाने जाते हैं।

कवि परिचय

1. कबीरदास

जीवन-परिचय– कबीरदास जी का जन्म काशी में सन् 1398 ई. में हुआ। इनका पालन-पोषण एक जुलाहा दम्पत्ति ने किया। इस नि:सन्तान जुलाहा दम्पत्ति नीरू और नीमा ने। बालक का नाम कबीर रखा। कबीर की शिक्षा विधिवत् नहीं हुई। उन्हें तो सत्संगति की अनंत पाठशाला में आत्मज्ञान और ईश्वर प्रेम का पाठ पढ़ाया गया। कबीर पाखण्ड और अंधविश्वासों के घोर विरोधी थे। 120 वर्ष की आयु में सन् 1518 ई. में देहावसान हो गया।

रचनाएँ – साखी, सबद, रमैनी आपकी तीन प्रकार की रचनाएँ मिलती हैं। बीजक एवं बानी के रूप में आपके काव्य संग्रह मिलते हैं।

भाव-पक्ष– कबीर के काव्य में आत्मा और परमात्मा के सम्बन्धों की स्पष्ट व्याख्या मिलती है। कबीर ने अपने काव्य में परमात्मा को प्रियतम एवं आत्मा को प्रेयसी के रूप में चित्रित किया है। उनके काव्य में विरह की पीड़ा है। कबीर ने कहीं-कहीं अनूठे रूपकों द्वारा अपने गूढ़ भावों को अभिव्यक्ति प्रदान की है।

कला-पक्ष– कबीर के काव्य में चमत्कार के दर्शन होते हैं। कविता उनके लिए साध्य न होकर साधन मात्र थी। उनकी रचनाओं में साहित्यिक सौन्दर्य, कहीं-कहीं छन्द-गठन तथा अलंकार- विधान के सौष्ठव का अभाव भी मिलता है। उनके काव्य में अनायास ही मौलिक एवं सार्थक प्रतीकों, अन्योक्तियों एवं रूपकों का सफल प्रयोग मिलता है।

साहित्य में स्थान – हिन्दी साहित्य में स्वर्णयुग माने जाने वाले भक्तिकाल के महान कवि कबीर उच्च स्थान के अधिकारी हैं। आप रचनाकारों के आदर्श रहे हैं।

 पत्र लेखन

प्रश्न 1.सहेली को जन्म दिन की बधाई देने हेतु पत्र लिखिए।

 अथवा

अपने मित्र को जन्मदिन की बधाई देने हेतु पत्र लिखिए।

उत्तर-

पुस्तक बाजार, भिण्ड

दिनांक 28-8-202x

प्रिय सहेली/मित्र गीता,

मधुर मिलन

तुम्हारे जन्म-दिन का निमंत्रण-पत्र मिला। बहुत ही प्रसन्नता हुई कि इस बार तुम अपना 30वाँ जन्म-दिन मना रही हो। मेरी बहुत इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर तुम्हारे साथ होती, लेकिन घर में जरूरी काम होने के कारण मैं शामिल नहीं हो पा रही हूँ। मेरी ओर से तुम्हें जन्म-दिन की बहुत-बहुत बधाई।

सभी बड़ों को प्रणाम तथा छोटों को स्नेह। दीर्घायु जीवन की शुभकामनाओं के साथ।

तुम्हारी सहेली (मित्र)

     साधना

प्रश्न 1. शुल्क मुक्ति हेतु अपने प्राचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए।*

अथवा

अपने विद्यालय के प्राचार्य महोदय को एक आवेदन-पत्र लिखिये जिसमें अपनी वार्धनता का उल्लेख करते हुए निर्धन छात्र निधि से आर्थिक सहायता माँगिए।

अथवा

विद्यालय के प्राचार्य को शाला शुल्क से मुक्ति हेतु आवेदन पत्र लिखिए।

उत्तर-

सेवा में,

प्राचार्य महोदय,

शा. उ. मा. विद्यालय सबलगढ़

विषय शुल्क मुक्ति हेतु।

महोदय,

विनम्र निवेदन है कि मैंने आपके विद्यालय में इसी वर्ष प्रवेश लिया है । मैं अत्यन्त निर्धन छात्र हूँ। मेरे पिताजी की मासिक आय मात्र 5000 रुपये है और उन पर आठ प्राणियों के जीवन-निर्वाह का भार है। मैं अभी तक बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होता आया हूँ और प्रतिवर्ष पेरी फीस माफ रही है। यदि मुझे शुल्क से मुक्त नहीं किया गया, तो हो सकता है कि मैं आगे पढ़ ही नहीं सकूँ और मेरा भविष्य अंधकारमय हो जाए। मुझे पूर्ण आशा है कि आप मेरी स्थिति पर दया करते हुए मेरी शुल्क-मुक्ति कर देंगे। मैं आपका कृतज्ञ रहूँगा।

दिनांक 15-7-202x

आपका आज्ञाकारी शिष्य

सौरभ जैन         

कक्षा – 9          

प्रश्न – तुम्हारे पिताजी का स्थानान्तरण हो जाने के कारण अपने विद्यालय के बन प्राचार्य को स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र (T.C.) हेतु आवेदन पत्र लिखिए।

अथवा

अपने प्राचार्य को विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र प्रदान करने विषयक् प्रार्थना-पत्र लिखिए।

उत्तर-

सेवा में,

श्रीमान प्राचार्य महोदय,

शा.उ.मा.वि. मालवीय नगर, उज्जैन

मान्यवर महोदय,

सेवा में विनम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9 वीं का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिता का यहाँ से जावरा के लिए स्थानांतरण हो गया है। इस कारण मैं अपना अध्ययन इस विद्यालय में जारी नहीं रख सकता हूँ। अत: मुझे विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें। मैंने विद्यालय का शुल्क, पुस्तकें आदि जमा कर दी हैं । कक्षाध्यापक का ‘कुछ बकाया नहीं’ प्रमाण-पत्र संलग्न है।

आपका आज्ञाकारी शिष्य

संजीव कुमार गुप्ता।   

कक्षा-9         

दिनांक 15-10-202x। 

  

निबंध लेखन

1. पर्यावरण एवं प्रदूषण
अथवा
प्रदूषण – कारण और निदान
अथवा
पर्यावरण संरक्षण हमारा दायित्व

प्रस्तावना– पर्यावरण प्रकृति का बैंक है। इस बैंक में जमा पूँजी के सहारे जिंदगी का कारोबार चलता है। पर्यावरण वह खोल है, जिससे हम घिरे हुए हैं। पृथ्वी, जल, वायु, ध्वनि आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं। हमारा पर्यावरण सारी प्रकृति है, पृथ्वी और आकाश के बीच का अंतराल है। राजनैतिक और भौगोलिक समस्यायें इसे विभाजित नहीं कर सकती हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण-   वृक्ष हमें जीवन देते हैं और हम उन्हीं की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं। नदियों में औद्योगिक कचरा मिलाया जा रहा है इस कारण देश के 70 प्रतिशत जल स्रोत दूषित हैं। मिल की चिमनियाँ और सड़कों पर चलने वाले – पेट्रोल, डीजल वाले वाहन हवा में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड छोड़कर वायु को दूषित कर रहे हैं। जंगलों का विनाश हो रहा है। बहुमूल्य वन्य जीव नष्ट हो रहे हैं। दिन-प्रतिदिन ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

निदान (समाधान)-  वाहनों में साइलेंसर एवं मिलावट रहित ईंधन का उपयोग आवश्यक है। गंदी नालियों की सफाई कराना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। कचरे को सड़ने नहीं देना चाहिए। गटरों के गंदे पानी और औद्योगिक कचरे को नदियों में नहीं बहाना चाहिए। श्रीमती इंदिरा गाँधी ने कहा था-“धरती को केवल इतना छेड़ो कि चीजें उग सकें। इतना मत कुरेदो कि वह रो पड़े”। उगता हुआ पेड़ प्रगतिशील राष्ट्र का प्रतीक है। परमाणु परीक्षण तुरंत रोकने की आवश्यकता है क्योंकि इससे अनेक रोग फैल रहे हैं।

उपसंहार– पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जनचेतना जाग्रत करना आवश्यक है। पर्यावरण की शिक्षा नवयुवकों की शिक्षा का अभिन्न अंग होना चाहिए। प्रौढ़ शिक्षा एवं विस्तार कार्यक्रम के साथ-साथ पर्यावरण शिक्षा देना आवश्यक है। जनसंख्या और पर्यावरण के बीच गहरा रिश्ता है। अतः जनसंख्या शिक्षा के साथ- साथ पर्यावरण शिक्षा भी आवश्यक है। मनुष्य पर्यावरण का दास है, मित्र है। मित्र का कर्त्तव्य है कि वह उसकी रक्षा करे। वृक्ष कार्बन डाइ-ऑक्साइड सोखकर जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इसलिए हर आदमी वृक्षोरापण करे और उसका अपनी संतान की तरह पालन करे। नगर पालिकायें और नगर-निगम नगरीय प्रदूषण को रोकें। हमें भी अपने आस-पास का पर्यावरण शुद्ध और साफ रखना चाहिए।

2. जीवन में खेलों का महत्त्व
अथवा
खेल और विद्यार्थी

प्रस्तावना – कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। यदि मनुष्य अपना सम्पूर्ण विकास करना चाहता है तो उसके शरीर का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। अतः यदि हम चाहते हैं कि हम अपने जीवन का पूर्ण उपयोग करें और निरन्तर ज्ञान प्राप्त करें तो हमें स्वस्थ रहना चाहिए। शरीर को स्वस्थ बनाने में खेलों का विशेष योगदान है। खेल स्वास्थ्य का सर्वोत्तम साधन है। उत्तम स्वास्थ्य जीवन की सफलता की कुंजी है।

खेल का महत्त्व – खेल एक ओर मनोरंजन का अच्छा साधन है तो दूसरी ओर समय के सदुपयोग का भी। मनोरंजन का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। मनोरंजन से मनुष्य की थकावट और उदासीनता दूर होती है, इसलिये मनुष्य मनोविनोद को जीवन में अपनाता है। खेल के मैदान में खिलाड़ी दिन-भर की थकान की घटनायें इत्यादि भूल जाता है। खेल के मैदान पर उसका मन निर्मल हो जाता है। इसके विपरीत जिन व्यक्तियों की खेल में रुचि नहीं है वे यहाँ-वहाँ बैठकर अपना अमूल्य समय व्यर्थ में नष्ट करते हैं। खेल के मैदान में मनुष्य अपने समय का सदुपयोग करते हैं। खेल के मैदान पर व्यक्ति में सहयोग और मित्रता की सामाजिक भावना का उदय होता है जिसकी जीवन में पग-पग पर आवश्यकता पड़ती है और जिससे जीवन सजता, संवरता और निखरता है। खेल के मैदान में व्यक्ति एक-दूसरे के शत्रु रहकर भी मित्रता का व्यवहार करते हैं। आपस में उनमें बहुत प्रेम रहता है। उनमें सहयोग और सहानुभूति की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। विद्यार्थी जीवन में भी खेल का बहुत महत्व है। विद्यार्थी जीवन में खेल के कारण विद्यार्थी लोकप्रिय होता है। वह सबका समान रूप से स्नेह  होता है। शिक्षा पूर्ण कर लेने के पश्चात् जब वह जीवन क्षेत्र में कूदता है और किसी पद का प्रत्याशी बनता है, तब खेल उसके लिये निर्वाचन की कसौटी सिद्ध होता है। खिलाड़ी प्रत्याशी के रूप में जहाँ भी जाते हैं, सफलता प्राप्त करते हैं। नौकरियों में उनको प्राथमिकता दी जाती है। सरकार अब खिलाड़ियों को विशेष सुविधायें भी देती है।

उपसंहार– हम देखते हैं कि जीवन में खेलों का बहुत महत्व है। दुर्भाग्य यह है कि खेल और शिक्षा के सम्बन्ध में एक भ्रम हमेशा यह रहा है कि जो खिलाड़ी है वह पढ़ाई में बुद्धिमान नहीं हो सकता और जो पढ़ने में बुद्धिमान है वह खिलाड़ी नहीं हो सकता। प्रायः खेल और पढ़ाई को एक-दूसरे का विरोधी माना गया है, लेकिन यह बात सत्य नहीं है। खेल और पढ़ाई का उचित समन्वय कर व्यक्ति अपना शारीरिक व मानसिक विकास कर जीवन में आगे बढ़ सकता है।

Note –  दोस्तों आशा करते हैं आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो यह अवश्य आपकी परीक्षाओं के लिए सहायता प्रदान करेगी इसे अपने सभी दोस्तों में शेयर अवश्य करें जिससे कि सभी विद्यार्थियों की मदद हो सके और हमें कमेंट करके बताएं की आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here